अपने भीतर राम जगाकर राम जी के सच्चे सेवक बनो, तभी दशहरा मनाने की है सार्थकता- सीताराम अग्रवाल समाजसेवी रायपुर, मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा एवं जीव की सेवा ही है प्रकृति का सम्मान

अपने भीतर राम जगाकर राम जी के सच्चे सेवक बनो, तभी दशहरा मनाने की है सार्थकता- सीताराम अग्रवाल समाजसेवी रायपुर, मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा एवं जीव की सेवा ही है प्रकृति का सम्मान kshititech
श्री सीताराम शकुंतला देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक, समाजसेवी सीताराम अग्रवाल रायपुर

अपने भीतर राम जगाकर राम जी के सच्चे सेवक बनो, तभी दशहरा मनाने की है सार्थकता- सीताराम अग्रवाल समाजसेवी रायपुर, मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा एवं जीव की सेवा ही है प्रकृति का सम्मान

सक्ति वछत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति- 2 अक्टूबर 2025 को असत्य पर सत्य की जीत के प्रतिक विजयदशमी दशहरे के पावन पर्व पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ समाजसेवी एवं श्री सीताराम शकुंतला देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक सीताराम अग्रवाल ने कहा है कि किसकी विजय, कैसे विजय,कहा है विजय, 108 फीट की निर्मिति कृत्रिम मुर्ति रावण को, किसी राम बनके मनुष्य से मारना एवं फटाका फौङना केवल मनोरंजन ही है,वास्तविक रावण को मारना है तो मनुष्य अपने अन्दर मे बैठे अपने उपर राज करने वाले रावण (क्रोध, मिथ्या, लोभ,अधर्म- प्रवृत्ति,हिंसा, वासना, मोह आदि दुराचार) को मारो, सीताराम अग्रवाल ने कहा कि अपने भीतर राम जगाकर रामजी के सच्चे सेवक वनो। यह होगी विजय,अपना विजय, सबका विजय, विजय दशमी पर्व की सही सार्थकता,सदैव प्रेम से बोले राम रामbजय श्री राम,सीताराम

समाजसेवी सीताराम अग्रवाल ने कहा कि सेवा सर्वोच्च मार्ग है,कोई अन्य मार्ग प्रभु को इतनी गहराई से प्रसन्न नहीं करता, न ही मानव जीवन को इतनी पूर्ण मुक्ति प्रदान करता है।मानवता की सेवा करना ईश्वर की सेवा करना है। प्रत्येक जीव की सेवा करना स्वयं प्रकृति का सम्मान करना है।भटक गए लोगों को फिर से उनका मार्ग दिखाएँ। भटके हुए लोगों को सत्य की ओर वापस ले जाएँ। दुःखी लोगों को साहस और थके हुए लोगों को शक्ति प्रदान करें।गिरे हुए लोगों को करुणा से उठाएँ। वंचितों को उठने में मदद करें। रोने वालों के आँसू पोंछें। बुजुर्गों को कोमल शब्द कहें।राष्ट्र ध्वज के आगे श्रद्धापूर्वक नमन करें। ये सच्ची सेवा के कार्य हैं, महान, निस्वार्थ और अमूल्य। इसके लिए किसी धन-संपत्ति की आवश्यकता नहीं, केवल प्रेम से भरे हृदय की आवश्यकता होती है।सदैव सीताराम- सीताराम जपते रहो, प्रभु की महिमा गाते रहो

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