शक्ति जिले में अल-नीनो के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने किया किसानों को अलर्ट. खंड वर्षा से चिंतित है किसान. किसानों को मिलेगी ₹2 लाख रुपए की सम्मान राशि आज ही करें आवेदन. जिला पंचायत की बैठक होगी 15 जुलाई को

शक्ति जिले में अलनीनो के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने किया किसानों को अलर्ट. खंड वर्षा से चिंतित है किसान. जिला पंचायत की बैठक होगी 15 जुलाई को

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -जिला पंचायत सक्ती की सामान्य सभा की विशेष बैठक 15 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। यह बैठक सुबह 10:30 बजे से जिला पंचायत सक्ती के सभाकक्ष में की जाएगी। बैठक में एजेंडावार विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जिला पंचायत सीईओ ने संबंधितों को बैठक में उपस्थित होने का आग्रह किया है

खरीफ 2026 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अधिसूचना जारी.अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों से फसल बीमा कराने की अपील

शक्ति -छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ 2026 हेतु अधिसूचना जारी की गई है। जिले के लिए खरीफ मौसम में धान सिंचित एवं असिंचित, मक्का, उड़द तथा मूंगफली फसलों को अधिसूचित किया गया है। धान एवं मक्का फसल के लिए ग्राम को इकाई क्षेत्र तथा उड़द एवं मूंगफली फसल के लिए राजस्व निरीक्षक मंडल क्षेत्र को इकाई माना गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ ऋणी, अऋणी, भू-धारक कृषक, बटाईदार एवं वनपट्टाधारी कृषक ले सकते हैं। जिला सक्ती में फसल बीमा के लिए बजाज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को अनुबंधित किया गया है। जारी अधिसूचना में कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार फसल कैलेंडर में भी संशोधन किया गया है। कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए सभी पात्र किसानों से फसल बीमा योजना का लाभ लेने की अपील की गई है। इस वर्ष अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए मानसून के देर से आने, समय से पहले समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान लंबे समय तक वर्षा नहीं होने जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना है। ऐसे में फसल बीमा किसानों के लिए जोखिम से बचाव का एक बेहतर विकल्प है। योजना के अंतर्गत धान सिंचित के लिए 66,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा धान असिंचित के लिए 47,300 रुपये प्रति हेक्टेयर बीमित राशि निर्धारित की गई है। कृषकों को प्रीमियम राशि बीमित राशि का 2 प्रतिशत जमा करना होगा। धान सिंचित के लिए 1,320 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा धान असिंचित के लिए 946 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रीमियम देय होगा। इसी प्रकार मक्का फसल के लिए 39,600 रुपये, उड़द के लिए 24,200 रुपये तथा मूंगफली के लिए 46,200 रुपये प्रति हेक्टेयर बीमित राशि निर्धारित की गई है। इनके लिए प्रीमियम राशि क्रमशः मक्का हेतु 792 रुपये, उड़द हेतु 484 रुपये तथा मूंगफली हेतु 924 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। उप संचालक कृषि, सक्ती ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, जलप्लावन, ओलावृष्टि आदि के कारण फसल क्षति की स्थिति में फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए सभी किसान फसल बीमा अवश्य कराएं, ताकि जोखिम की स्थिति में आर्थिक क्षति से बचा जा सके। फसल बीमा कराने के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सेवा सहकारी समिति अथवा बैंक से संपर्क कर सकते हैं। अऋणी किसान आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि संबंधी दस्तावेज, बी-1 तथा पी-2 फसल विवरण के साथ अपने नजदीकी सीएससी सेंटर अथवा संबंधित बैंक में आवेदन कर फसल बीमा करा सकते हैं

जिले में 320.3 मि.मी.औसत वर्षा दर्ज

  शक्ति -सक्ती जिले में 1 जून 2026 से 09 जुलाई 2026 तक 320.3 मि.मी.औसत वर्षा दर्ज की गई है। बीते 24 घंटे में जिले में 1.0 मिली मीटर औसत वर्षा हुई है। भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 जून 2026 से अब तक जिले के सक्ती तहसील में 288.8 मिली मीटर, जैजैपुर में 201, मालखरौदा में 369.4, डभरा में 353.8, नया बाराद्वार में 319.4, अड़भार में 271.4, हसौद में 298.3, चंद्रपुर में 473.3 एवं भोथिया में 306.9 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई है।  प्राप्त जानकारी अनुसार आज की स्थिति मे तहसील सक्ती में 2.0 मिली मीटर, जैजैपुर में 0.0, मालखरौदा में 0.0, डभरा में 1.5, नया बाराद्वार में 3.4, अड़भार में 2.1, हसौद में 0.0, चंद्रपुर में 0.0 एवं भोथिया में 0.0 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई है

डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार के लिए 31 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित।विजेता किसान को मिलेंगे 2 लाख रुपये

शक्ति -कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा प्रदत्त डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार के लिए वर्ष 2026 के लिए कृषकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक कृषक 31 जुलाई 2026 तक आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुरस्कार के लिए आवेदन पत्र उप संचालक कृषि कार्यालय तथा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से निःशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। निर्धारित प्रपत्र में पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन पत्र संबंधित कार्यालय में अंतिम तिथि तक जमा किए जा सकते हैं। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत चयनित कृषक को 2 लाख रुपये की सम्मान राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए वही कृषक पात्र होंगे जो पिछले 10 वर्षों से छत्तीसगढ़ में कृषि कार्य कर रहे हों, राज्य के मूल निवासी हों तथा उनकी कुल वार्षिक आय का कम से कम 75 प्रतिशत भाग कृषि से प्राप्त होता हो। साथ ही, आवेदक पर तकाबी, सिंचाई शुल्क अथवा सहकारी बैंक का कालातीत ऋण नहीं होना चाहिए। कृषकों का चयन फसल विविधीकरण, उत्पादकता वृद्धि के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, उन्नत कृषि तकनीक के प्रचार-प्रसार, अन्य किसानों को प्रेरित करने, विगत तीन वर्षों की उत्पादकता, कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में नवाचार, समन्वित कृषि प्रणाली, भूमि एवं जल संरक्षण, कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा कृषि विपणन में योगदान जैसे विभिन्न मापदण्डों के आधार पर किया जाएगा। प्राप्त आवेदनों का सत्यापन विकासखंड स्तरीय डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार छानबीन समिति द्वारा किया जाएगा। इसके उपरांत जिला स्तरीय छानबीन समिति एवं राज्य स्तरीय जूरी द्वारा अंतिम चयन किया जाएगा, जिसका निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा

अल-नीनो की संभावित स्थिति को देखते हुए किसानों के लिए महत्वपूर्ण कृषि सलाह जारी।खरीफ 2026 में मौसम की अनिश्चितता से निपटने के लिए कृषि विभाग ने जारी की सामान्य आकस्मिक कार्ययोजना

शक्ति -खरीफ वर्ष 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देर से आने, समय से पहले समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान वर्षा में लंबे अंतराल (खण्ड वर्षा) की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को कृषि कार्यों की अग्रिम तैयारी करने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि वर्षा प्रारंभ होने से पूर्व खेतों एवं मेड़ों की सफाई कर लें तथा जुताई एवं अन्य आवश्यक भूमि तैयारी कार्य समय पर पूर्ण करें। साथ ही कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करें, जिससे वर्षा की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) विधि को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। रोपा विधि की अपेक्षा डीएसआर में लगभग 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, उत्पादन लागत लगभग 5000 रुपये प्रति एकड़ कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले पक जाती है। धान की खेती में उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए खेतों में मेड़बंदी करने पर विशेष जोर दिया गया है। उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में किसानों को धान के स्थान पर दलहनी फसलें जैसे अरहर, मूंग एवं उड़द तथा तिलहनी फसलें जैसे मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। फसलों की बुवाई कतार पद्धति से करने पर बल दिया गया है, जिससे खरपतवार नियंत्रण, पौधों की बेहतर वृद्धि एवं भूमि में नमी संरक्षण संभव हो सके। कतारों में बोई गई फसलों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित होती हैं, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 3 से 5 दिन के भीतर अनुशंसित मात्रा में अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी दवाओं का उपयोग करने तथा 20 से 25 दिन बाद पुनः खरपतवार नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। सभी फसलों के बीजों का बुवाई पूर्व उपचार करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। फफूंदनाशी के रूप में कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज तथा कीटनाशी के रूप में थायोमेथोक्साम या इमिडाक्लोप्रिड 1.5 मिली प्रति किलोग्राम बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं जैव उर्वरकों में धान हेतु एजोस्पिरिलम, अन्य फसलों हेतु एजोटोबैक्टर तथा दलहनी फसलों हेतु राइजोबियम (10 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज) के उपयोग की अनुशंसा की गई है। यदि बुवाई के पश्चात 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है तो पुनः बुवाई करने तथा सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। किसानों से जुलाई माह के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई पूर्ण करने तथा अगस्त माह में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का आग्रह किया गया है। भूमि की नमी बनाए रखने और फसलों को सूखे के प्रभाव से बचाने के लिए मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही गांवों के नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बाँध बनाने एवं वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। नालों, डबरियों, तालाबों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं में वर्षा जल एकत्रित कर लंबे शुष्क अंतराल के दौरान जीवन रक्षक सिंचाई (लाइफ सेविंग इरिगेशन) के रूप में उपयोग करने की बात कही गई है। कम वर्षा की स्थिति में नत्रजन उर्वरकों का सीमित उपयोग करने तथा इसके स्थान पर 2 प्रतिशत यूरिया घोल के पर्णीय छिड़काव अथवा प्रति एकड़ दो बोतल नैनो यूरिया के उपयोग की सलाह दी गई है। दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डी.ए.पी. घोल का पर्णीय छिड़काव करने से पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता में सुधार होने की जानकारी दी गई है। किसानों को मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनाने, उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित उपयोग करने तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है। साथ ही फसल विविधीकरण अपनाकर जोखिम कम करने और एक ही फसल पर निर्भरता से बचने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि कृषि संबंधी किसी भी कठिनाई या समस्या के समाधान के लिए अपने निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करें। अल-नीनो की संभावित परिस्थितियों में समय पर तैयारी और वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन अपनाकर फसलों की सुरक्षा एवं उत्पादन को बेहतर बनाया जा सकता है

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु 31 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित

शक्ति –आगामी 03 दिसम्बर 2026 को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।उप संचालक, समाज कल्याण कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु नामांकन एवं आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं भारत सरकार के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल www.awards.gov.in⁠ पर निर्धारित श्रेणियों में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामांकन एवं आवेदन की प्रक्रिया 15 मई 2026 से प्रारंभ हो चुकी है। आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पात्र व्यक्तियों एवं संस्थाओं से निर्धारित समयावधि में आवेदन करने की अपील की है। साथ ही संबंधित विभागों एवं स्वेच्छिक संस्थाओं को भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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