वेदांता के चेयरमैन अनिल जी ने कहा-मुझे लगता है कि हर लीडर को खुद से एक सवाल जरूर पूछना चाहिए – मेरे एक घंटे की कीमत क्या है? अगर उस एक घंटे का काम कोई और कर सकता है, तो उसे हायर कीजिए। और अपना समय वहां लगाइए जहां उसकी असली कीमत है – बड़े सपनों को पूरा करने में


वेदांता के चेयरमैन अनिल जी ने कहा-मुझे लगता है कि हर लीडर को खुद से एक सवाल जरूर पूछना चाहिए – मेरे एक घंटे की कीमत क्या है? अगर उस एक घंटे का काम कोई और कर सकता है, तो उसे हायर कीजिए। और अपना समय वहां लगाइए जहां उसकी असली कीमत है – बड़े सपनों को पूरा करने में
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -देश दुनिया के प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बतौर लीडरशिप एक प्रेरणादायक अनुभव साझा करते हुए बताया है कि शुरुआती दिनों में मुझे बिजनेस खड़ा करने का सबसे बड़ा सबक एक बड़ी डील के हाथ से निकल जाने पर मिला, और वो था – delegation (काम सौंपने) का महत्व, और ऐसा न करने का नुकसान।सरल शब्दों में कहें तो – “खुद सब कुछ करने के बजाय, किसी काम के लिए सही व्यक्ति को चुनकर उसे जिम्मेदारी देना और उसपर भरोसा करना ही डेलिगेशन है।”मैं शुरुआती दिनों में अपने सारे काम खुद ही संभालता था – एक ‘one man army’ की तरह।मेरी सुबह buyers को फोन करने में बीतती थी, दोपहर suppliers के साथ, और शामें बैंक में। मुझे लगता था कि हर काम खुद से करना ही सफलता का एकमात्र रास्ता है, भले ही उसमें दिन का हर एक मिनट लग जाए।लेकिन फिर एक दिन, सिर्फ एक form समय पर न भर पाने की वजह से एक बहुत बड़ी deal मेरे हाथ से निकल गई। मैं अंदर से टूट गया। तब समझ आया कि भले ही मैं दिन-रात एक कर रहा था, पर मेरा तरीका गलत था।और फिर मैंने पहली बार एक ‘मुंशी’ को hire किया।मुझे लगता है कि हर leader को खुद से एक सवाल जरूर पूछना चाहिए – मेरे एक घंटे की कीमत क्या है? अगर उस एक घंटे का काम कोई और कर सकता है, तो उसे hire कीजिए। और अपना समय वहां लगाइए जहां उसकी असली कीमत है – बड़े सपनों को पूरा करने में।

