वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवालने भारत में अप्रेंटिसशिप संस्कृति को फिर से अपनाने की वकालत की

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवालने भारत में अप्रेंटिसशिप संस्कृति को फिर से अपनाने की वकालत की kshititech
वेदांता ग्रुप के संस्थापक अनिल अग्रवाल

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवालने भारत में अप्रेंटिसशि पसंस्कृति को फिर से अपनाने की वकालत की

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कौशल विकास और युवाओं के भविष्य पर अपने विचार साझा किए हैं। हाल ही में फेसबुक पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने अप्रेंटिसशिप को सीखने, आत्मविश्वास विकसित करने और उद्यमिता की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में केवल कक्षा में प्राप्त ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक कार्यस्थल पर सीखने का अनुभव युवाओं को भविष्यके लिए बेहतर तैयार करता है।अप्रेंटिसशिप की अवधारणा पर अपने विचार साझा करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि कुछ दशक पहले भारत समेत दुनिया के कई देशों में स्कूल के बाद उद्योगों में अप्रेंटिसशिप करना एक सामान्य और प्रभावी व्यवस्था थी। इससे युवाओं को व्यावहारिक अनुभव मिलता था और उद्योगों को कुशल कार्यबल तैयार करने में सहायता मिलती थी। उनका मानना है कि भारत को एक बार फिर इस संस्कृति को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि देश का विनिर्माण क्षेत्र और अधिक मजबूत हो सके तथा युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण अवसरों का सृजन हो।अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि वास्तविक कार्यस्थल पर सीखना व्यक्ति को केवल तकनीकी कौशल ही नहीं सिखाता, बल्कि समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने, आत्मविश्वास विकसित करने और नेतृत्व क्षमता को निखारने में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के दौर में व्यावहारिक अनुभव पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है और यही अनुभव युवाओं को रोजगार के साथ-साथ सफल उद्यमी बनने के लिए भी तैयार करता है।यह संदेश केवल अप्रेंटिसशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के लिए भी एक व्यापक विचार प्रस्तुत करता है। अनिल अग्रवाल का मानना है कि यदि भारत सीखते हुए काम करने की संस्कृति को फिर से प्रोत्साहित करे, तो इससे लाखों युवाओं को नए अवसर मिलेंगे, उद्योगों को भविष्य के लिए सक्षम कार्यबल मिलेगा और देश के विनिर्माण क्षेत्र को नई गति प्राप्त होगी।

अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा

तीस-चालीस साल पहले भारत के साथ-साथ दुनिया भर में apprenticeship का बोलबाला था।स्कूल के बाद सीधे यूनिवर्सिटी की डिग्री के पीछे भागने के बजाय, manufacturing sector में ‘learning-by-doing’ का यह एक शानदार जरिया था। यह युवाओं और इंडस्ट्री, दोनों के लिए win-win की स्थिति थी, क्योंकि इससे युवाओं को हुनर मिलता था और उद्योगों को कुशल कारीगर।अब वक्त आ गया है कि भारत में हम फिर से apprenticeship को एक बड़े मिशन के तौर पर अपनाएं, क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है।आज के AI और new technologies के युग में, काम करके सीखना ही सफलता का सबसे सही मंत्र है।यह न सिर्फ युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करेगा, बल्कि उन्हें एक सफल entrepreneur भी बनाएगा। सच कहें तो, यह असल जिंदगी का सबसे बड़ा business school है।कई बार समाज यूनिवर्सिटी डिग्री को जरूरत से ज्यादा अहमियत दे देता है, लेकिन आज के tech-savvy युवाओं के लिए apprenticeship जैसे व्यावहारिक रास्ते डिग्री से कहीं बेहतर और ठोस परिणाम ला सकते हैं।

अनिल अग्रवाल के बारे में

श्री अनिल अग्रवाल वेदांता लिमिटेड के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष और वेदांता समूह के संस्थापक हैं। चार दशकों से अधिक के उद्यमिता अनुभव के साथ, उन्होंने वेदांता समूह की परिकल्पना की और उसका नेतृत्व करते हुए एक साधारण घरेलू खनन कंपनी को महत्वपूर्ण खनिजों, ट्रांजिशन मेटल्स, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत एक वैश्विक और विविधीकृत समूह केरूपः केरूप में विकसित किया।मार्च 2005 से वे यूनाइटेड किंगडम स्थित समूह की होल्डिंग कंपनी वेदांता रिसोर्स के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं और कंपनी केरणनीतिक विकास तथा वैश्विक विस्तार का नेतृत्व कर रहे हैं।वे मानते हैं कि व्यवसायों की जिम्मेदारी समाज को वापस देना भी है। इसी सोच के तहत उन्होंने द गिविंग प्लेज के माध्यम से अपनी 75% संपत्ति समाज के कल्याण के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया है।उनकी संस्था अनिल अग्रवाल फाउंडेशन समुदायों को सशक्त बनाने और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य करती है । फाउंडेशन की प्रमुख पहल नंद घर के तहत पूरे भारत में 15,000 से अधिक केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रोंके माध्यम से बच्चोंको पौष्टिक आहार, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, साथ ही महिलाओं को विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए सशक्त बनाया जाता है।

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