13 सितंबर से 19 सितंबर तक जयपुरिया परिवार की पितृ मोक्षार्थ गया श्रद्धा अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का बम्हनीनडीह में होगा आयोजन. प्रसिद्ध कथावाचक डॉ.अनिरुद्धचार्य जी महाराज कराएंगे कथा का रसपान. आयोजक परिवार के मुरली जयपुरिया चांपा ने दी जानकारी

13 सितंबर से 19 सितंबर तक जयपुरिया परिवार की पितृ मोक्षार्थ गया श्रद्धा अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का बम्हनीनडीह में होगा आयोजन. प्रसिद्ध कथावाचक डॉ.अनिरुद्धचार्य जी महाराज कराएंगे कथा का रसपान. आयोजक परिवार के मुरली जयपुरिया चांपा ने दी जानकारी kshititech
परम पूज्य डॉक्टर अनिरुद्धचार्य जी महाराज
13 सितंबर से 19 सितंबर तक जयपुरिया परिवार की पितृ मोक्षार्थ गया श्रद्धा अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का बम्हनीनडीह में होगा आयोजन. प्रसिद्ध कथावाचक डॉ.अनिरुद्धचार्य जी महाराज कराएंगे कथा का रसपान. आयोजक परिवार के मुरली जयपुरिया चांपा ने दी जानकारी kshititech
जयपुरिया परिवार का आमंत्रण आप सभी श्रद्धालु भक्तजनों के लिए

13 सितंबर से 19 सितंबर तक जयपुरिया परिवार की पितृ मोक्षार्थ गया श्राद्ध अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का होगा आयोजन. प्रसिद्ध कथावाचक  डॉ.अनिरुद्धचार्य जी महाराज कराएंगे कथा का रसपान. आयोजक परिवार के मुरली जयपुरिया चांपा ने दी जानकार

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -आगामी 13 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक बम्हनीनडीह।कोरबा एवं रायगढ़ के प्रतिष्ठित जयपुरिया परिवार द्वारा बम्हनीनडीह में पितृ मोक्षार्थ गया श्रद्धा अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया है। जिसका साधना एवं श्रद्धा चैनल पर लाइव प्रसारण किया जाएगा। उपरोक्त जानकारी देते हुए आयोजक जयपुरिया परिवार के सदस्य मुरली जयपुरिया चांपा ने बताया की कथा समय प्रतिदिन दोपहर 3:00 से शाम 6:00 बजे तक होगा। जिसमें सुप्रसिद्ध कथा वाचक अनिरुद्ध जी महाराज व्यास पीठ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराएंगे। मुरली जयपुरिया ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आयोजन को लेकर जहां पुरा जयपुरिया परिवार जोर-जोर से जुटा हुआ है। तथा कथा स्थल के लिए भव्य पंडाल का निर्माण कराया गया है। जहां बहुत ही व्यवस्थित ढंग से कथा श्रवण की व्यवस्था की गई है

13 सितंबर से होंगे पावन प्रसंग

आयोजक परिवार के सदस्य मुरली जयपुरिया ने बताया की 13 सितंबर को शुभारंभ दिवस सुबह 10:00 बजे कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी जो कि शहर का भ्रमण करते हुए कथा स्थल पहुंचेगी एवं 13 सितंबर 2026 दिन- रविवार को देव प्रतिष्ठा। भागवत महात्मय एवं सुकदेव आगमन का प्रसंग होगा। 14 सितंबर सोमवार को विराट स्वरूप वर्णन एवं श्री ध्रुव चरित्र।15 सितंबर मंगलवार को प्रहलाद चरित्र एवं गजेंद्र मोक्ष। 16 सितंबर बुधवार को वामन अवतार। श्री कृष्ण जन्मोत्सव एवं नंदोत्सव। 17 सितंबर गुरुवार को बाल लीला। माखन चोरी। गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग। 18 सितंबर शुक्रवार को रुक्मणी विवाह महोत्सव एवं सुदामा चरित्र तथा 19 सितंबर 2026 दिन शनिवार को नव योगेश्वर संवाद और अवधूतोपाख्यान द्वादश स्कंध एवं कथा का विश्राम होगा

कथा आयोजन को सफल बनाने में जुटे सदस्य गण

मुरली जयपुरिया ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के इस आयोजन को लेकर जयपुरिया परिवार बम्हनीनडीह।चांपा। कोरबा एवं रायगढ़ के सभी परिवार जन सक्रियता के साथ लगे हुए हैं एवं कार्यक्रम से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आयोजित जयपुरिया परिवार के प्रेम जयपुरिया कोरबा।अशोक जयपुरिया बम्हनीनडीह।राजू जयपुरिया चांपा। आनंद जयपुरिया बम्हनीनडीह।पंकज जयपुरिया चांपा।पुरुषोत्तम जयपुरिया बम्हनीनडीह।मुरली जयपुरिया चांपा।अश्वनी जयपुरिया रायगढ़। गगन जयपुरिया बम्हनीनडीह एवं आलोक जयपुरिया बम्हनीनडीह सहित परिवार जन जुटे हुए हैं

जयपुरिया परिवार का श्रद्धालु भक्तजनों से आग्रह

जयपुरिया परिवार ने समस्त श्रद्धालु भक्तजनों से आग्रह करते हुए कहा है कि अपार हर्ष का विषय है कि जन जन के हृदयघट में विराजमान परमाराध्य ठा. श्री बाँकेबिहारी जी महाराज की असीम अनुकम्पा एवं पितरों के शुभाशीर्वाद से पितृमोक्षार्थ गया श्रद्धान्तर्गत श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का पुनीत आयोजन बम्हनीडीह की पावन धरा में किया जा रहा है। जिसमें व्यास पीठ पर परम पूज्य डॉ. श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज विराजमान होकर अपने सुमधुर वाणी द्वारा भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित कर भक्तों को कथा का रससुधा पान करायेंगे ।अतएव आप सभी धर्म प्रेमी भक्तजनों को सादर एवं स्नेहिल आमंत्रण है कि कथा श्रवण कर अपना जीवन कृतार्थ करें ।

कथावाचक परम पूज्यश्रीअनिरुद्धाचार्य जी महाराज का संक्षिप्त जीवन परिचय

परम पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज का जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में माँ नर्मदा के पावन तट के समीप स्थित रिवंज्ञा ग्राम के एक संस्कारी ब्राह्माण परिवार में हुआ। माता-पिता के दैवीय संस्कारों के सान्निध्य में पले-बढ़े महाराज जी बचपन से ही अत्यंत सरल, मधुरभाषी एवं कुशाग्र बुद्धि वाले थे।बाल्यकाल से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता एवं भक्ति की ओर था। वे प्रतिदिन अपने गाँव के ही श्री राधाकृष्ण मंदिर में जाकर ठाकुर जी की सेवा-पूजा किया करते थे। धर्म, सेवा और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि थी। इसी कारण उन्हें श्रीधाम वृन्दावन में वेद, पुराण एवं शास्त्रों का अध्ययन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अपनी अल्पायु में ही उन्होंने अनेक धार्मिक ग्रंथों को कंठस्थ कर लिया।श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज को श्रीधाम वृंन्दवन में रामानुजाचार्य संम्प्रदाय के परम तपस्वी एवं तेजस्वी संत पूज्य श्री गिरिराज शास्त्री जी महाराज से दीक्षा प्राप्त हुई। गुरु कृपा और कठोर साधना के बल पर उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।जब उन्होंने समाज में मातृशक्ति को उपेक्षित, पीड़ित और असहाय अवस्था में देखा, तब उनके हृदय में सेवा का एक नया संकल्प जागृत हुआ। उन्होंने ऐसा स्थान बनाने का विचार किया जहाँ माताएं सम्मानपूर्वक, सुरक्षित एवं आध्यात्मिक वातावरण में जीवन व्यतीत कर सकें। इसी पावन संकल्प के परिणाम स्वरूप वर्ष 2019 में श्रीधाम वृन्दावन में एक महान सेवा-योजना के रूप वृद्धा ऑश्रम की नींव रखी गई जहाँ विश्व भर के श्रद्धालु सेवा से जुड़कर मातृशक्ति की सहायता कर सके तथा पुण्य अर्जित कर सकें।इसके अतिरिक्त, वृन्दावन में गौरी गोपाल अनक्षेत्र की स्थापना की गई, जहाँ प्रतिदिन हजारों संतों, श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों को निःशुल्क भोजन प्रसाद प्रदान किया जाता है। यह सेवा आज भी निरंतर जनकल्याण का माध्यम बनी हुई है।पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज अपने प्रवचनों, सेवा कार्य एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से जन-जन को सनातन धर्म से जोड़ने का अनवरत प्रयास कर रहे हैं। उनका जीवन सेवा, भक्ति और मानव कल्याण का प्रेरणादायी उदाहरण है।आइए, हम सभी इस पावन अभियान का हिस्सा बनकर धर्म और सेवा के इस महान कार्य में अपना योगदान दें।

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