शर्मनाक करतूत-रेलवे पुलिस का अमानवीय चेहरा- ट्रेन से कटे व्यक्ति की लाश को माल ढोने वाले ठेले पर लादकर भेजा अस्पताल. ग्रामीणों ने करी जिम्मेदार रेलवे अधिकारियो एवं पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग


रेलवे पुलिस का अमानवीय चेहरा- ट्रेन से कटे व्यक्ति की लाश को ठेले पर लादकर भेजा अस्पताल
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -दानापुर रेल मंडल के बाढ़ कोर्ट हाल्ट पर सोमवार को ट्रेन की चपेट में आने से एक अधेड़ व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद रेल पुलिस का एक बेहद अमानवीय और संवेदनहीन चेहरा सामने आया है।स्टेशन परिसर और अस्पताल में सरकारी एम्बुलेंस की व्यवस्था होने के बावजूद रेल पुलिस ने मृतक के शव को सम्मानजनक तरीके से ले जाने के बजाए एक समान ढोने वाले ठेले पर लादकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।रेल पुलिस की इस घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को देखकर स्टेशन पर मौजूद आम यात्रियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाढ़ थाना क्षेत्र के गोनावां कॉलोनी निवासी 42 वर्षीय मनीष कुमार सोमवार को किसी काम से रेलवे लाइन के किनारे-किनारे होकर बाढ़ कोर्ट हाल्ट की तरफ जा रहे थे।इसी दौरान पटरी पार करने या अचानक असंतुलन होने के कारण वे एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन के धक्के से घटनास्थल पर ही मनीष कुमार की दर्दनाक मौत हो गई।घटना की भनक लगते ही रेल पुलिस (जीआरपी) की टीम मौके पर पहुंची और शव को हाल्ट से उठाकर बाढ़ रेलवे स्टेशन परिसर में लाकर रख दिया, जिसके बाद शिनाख्त होने पर मृतक के परिजनों को इसकी सूचना दी गई।हद तो तब हो गई जब कानूनी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल भेजने की बारी आई। नियमानुसार और मानवीय दृष्टिकोण से शव को एम्बुलेंस या किसी बंद वाहन से भेजा जाना चाहिए था।अनुमंडलीय अस्पताल व प्रशासन के पास इसकी पर्याप्त व्यवस्था भी रहती है, लेकिन रेल पुलिस ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए ₹800 में एक निजी ठेले वाले को तय किया और खुलेआम शव को उस पर लादकर बाजार के रास्ते अस्पताल भेज दिया।राहगीरों ने जब रेल पुलिस की इस अमानवीय हरकत को देखा, तो हर कोई प्रशासन की इस कार्यशैली की थू-थू करने लगा। इधर, हादसे की खबर मिलते ही गोनावां कॉलोनी स्थित मृतक मनीष कुमार के घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि सरकार और रेल प्रशासन भले ही दावों में संवेदनशीलता की बात करते हों, लेकिन जमीन पर पुलिस कर्मियों का रवैया आज भी औपनिवेशिक और संवेदनहीन बना हुआ है।किसी भी शव की इस तरह गरिमा तार-तार करना न्यायसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने वरीय रेल अधिकारियों से इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

