”प्रदर्शन के नाम पर गुंडागर्दी और कारोबार ठप करने का खेल अब बंद होना चाहिए!”दिल्ली के व्यापारियों ने त्रस्त होकर प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र. व्यापारी संगठनों ने कहा- त्योहारों के सीजन में अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए बाजारों को ठप्प करना लोकतंत्र नहीं बल्कि अराजकता. अब नहीं होगा और बर्दाश्त 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट प्रदर्शन से हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा व्यापारियों ने



”प्रदर्शन के नाम पर गुंडागर्दी और कारोबार ठप करने का खेल अब बंद होना चाहिए!”दिल्ली के व्यापारियों ने त्रस्त होकर प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र. व्यापारी संगठनों ने कहा- त्योहारों के सीजन में अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए बाजारों को ठप्प करना लोकतंत्र नहीं बल्कि अराजकता*
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -दिल्ली में विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के उपद्रव से भारी नुकसान झेल रहे व्यापारिक संगठनों ने त्योहारों के सीजन में कारोबार प्रभावित होने पर चिंता जताई है। संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और व्यापारियों के हितों की रक्षा की गुहार लगाई है। व्यापारियों ने कहा है कि त्योहारों के सीजन में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए बाजार ठप करना लोकतंत्र नहीं, सीधे-सीधे अराजकता है!
फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने लिखा मोदी जी को पत्र
फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन दिल्ली ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 अक्टूबर 2026 को एक पत्र प्रेषित किया है पत्र में बताया है कि दिल्ली में बार-बार होने वाले प्रोटेस्ट प्रदर्शनों से व्यापारियों को हो रहे भारी नुकसान एवं मुआवजे के संबंध में शीघ्र ही आवश्यक पहल करें तथा मैं यह पत्र फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन सेंट्रल मार्केट लपट नगर के महासचिव के रूप में दिल्ली के समस्त दुकानदारों एवं व्यापारियों की ओर से आपकी सेवा में प्रेषित कर रहा है।दिल्ली के व्यापारी लगातार हो रहे प्रोटेस्ट और मार्च के कारण अत्यंत गंभीर स्थिति और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस संबंध में हम निम्नलिखित प्रमुख बिंदु आपके समक्ष रखना चाहते हैं:
01. व्यापार पर गंभीर असरः हाल ही में 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट की कॉल की वजह से उससे 4-5 दिन पहले और 4-5 दिन बाद तक बाज़ारों से ग्राहक पूरी तरह गायब रहे, जिससे हमें करोड़ों रुपये की कमाई का भारी नुकसान हुआ है।
02. आजीविका पर संकटः हमारी दुकान की कमाई से ही हमारे परिवार चलते हैं। इसी से हम अपने कर्मचारियों, वयोवृद्ध माता-पिता, पत्नी और बच्चों की देखभाल, पढ़ाई, इलाज, किराया व घर के खर्चे पूरे करते हैं।
03. त्योहारों का सीज़नः पूरे साल हम अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर (नवरात्रि, दिवाली आदि) के त्यौहारों का इंतज़ार करते हैं, क्योंकि हमारी साल भर की ज्यादातर बिक्री इसी दौरान होती है। ऐसे समय में प्रोटेस्ट होने से हमारा व्यापार पूरी तरह ठप हो जाता है।
04. असुरक्षा एवं अव्यवस्थाः ये प्रदर्शन बिना किसी पूर्व इंतज़ाम और नियम-कानूनों के विपरीत होते हैं। एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या फर्स्ट एड जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
05. आयोजकों एवं एक्टिविस्टों की जवाबदेहीः देश भर के वही 20-30 लोग जिनमें कुछ बड़े सेलिब्रिटी और प्रोफेशनल एक्टिविस्ट शामिल हैं- बार-बार प्रोटेस्ट की कॉल देकर आम व्यापारियों की रोजी-रोटी को तबाह कर देते हैं।
प्रेषित पत्र में व्यापारी संगठनों की प्रमुख माँगें
01-क्षतिपूर्ति व मुआवज़ाः 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट से हुए नुकसान का सही आकलन कर दुकानदारों को मुआवज़ा दिया जाए और यह राशि प्रोटेस्ट की कॉल देने वाले मुख्य आयोजकों व प्रदर्शनकारियों से वसूली जाए।
02-अनुमति पर रोकः 16 अक्टूबर तथा आने वाले त्योहारों के पूरे सीजन के दौरान दिल्ली में किसी भी प्रकार के प्रोटेस्ट, मार्च या प्रदर्शन की अनुमति न दी जाए।
व्यापारियों के संगठन ने कहा है कि हम केंद्र सरकार, माननीय उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं संबंधित प्रशासन से विनम गुज़ारिश करते हैं कि दिल्ली के व्यापारियों की रोजी-रोटी की रक्षा हेतु इन प्रदर्शों पर तत्काल रोक लगाई जाए। उपरोक्त पत्र महासचिव फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, नई दिल्ली की ओर से लिखा गया है






