सेवा भाव की मिसाल- मंगल भवन प्रकल्प,मंगल भवन का निर्माण जनसेवा के क्षेत्र में पुण्य का काम- सीताराम अग्रवाल समाजसेवी रायपुर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं सीताराम जी के सेवा कार्य, सीताराम अग्रवाल ने कहा- मानव सेवा ही है माधव सेवा

सेवा भाव की मिसाल- मंगल भवन प्रकल्प,मंगल भवन का निर्माण जनसेवा के क्षेत्र में पुण्य का काम- सीताराम अग्रवाल समाजसेवी रायपुर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं सीताराम जी के सेवा कार्य, सीताराम अग्रवाल ने कहा- मानव सेवा ही है माधव सेवा kshititech
मंगल भवन निर्माण के सूत्रधार सीताराम अग्रवाल रायपुर
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सीताराम अग्रवाल एवं श्रीमती शकुंतला देवी अग्रवाल
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एम्स के नजदीक स्थित श्री सीताराम शकुंतला चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा स्थापित मंगल भवन

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शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति-छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों में विगत वर्षों में समाजसेवी सीताराम अग्रवाल की पहल पर जहां अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सेवा के लिए मंगल भवनो का निर्माण हुआ, तथा इन मंगल भवनों के निर्माण की श्रृंखला ने जहां प्रदेश में सेवा कार्यों की एक बड़ी शुरुआत हुई, तो वहीं इस कार्य में शासन ने भी अपना अहम योगदान हुए इन सेवा कार्यों के बेहतर संचालन में अपना सहयोग प्रदान किया, रायपुर शहर से हुई इन मंगल भवनों की शुरुआत के प्रेरणा स्रोत समाज सेवी सीताराम अग्रवाल ने बताया कि सर्व सुविधायुक्त मंगल भवन का उद्देश्य विभिन्न शहरों के सरकारी अस्पताल में इलाज हेतु आने वाले कमजोर एवं जरूरतमंद मरीजों एवं उनके परिजनों को रहने एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था अति न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराना है।छत्तीसगढ़ की बहुत बड़ी आबादी, गहन चिकित्सा के लिए राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर चिकित्सालय पर निर्भर है। सूदूर गांव कस्बो से सैकड़ों लोग रोजाना यहाँ इलाज करवाने आते है। इसमें से अधिकांश बेहद गरीब परिवार से होते हैं। जब कोई मरीज यहाँ आता है तो उनकी सेवा करने, परिवार के कई लोग साथ आते हैं। बीमार व्यक्ति अपनी बीमारी की वजह से तकलीफ पाता है और साथ आये व्यक्ति यहाँ रहने और खाने पीने को लेकर तकलीफ पाता है। लेकिन आज कह सकते है कि वे तकलीफ पाते थे, अब नहीं। असल में इस अस्पताल के पास बना मंगल भवन ऐसे जरूरतमंदों का अब बहुत बड़ा सहारा बन गया है।

मंगल भवन के सूत्रधार सीताराम अग्रवाल कहते हैं कि मंगल भवन कहने से शादी, पार्टी के लिए किराये में मिलने वाले भवन की छवि बनती है। असल में यह एक सेवा भवन है, जहाँ मरीजों एवं उनके परिजनों के लिये मंगल कामनाएँ हैं।मंगल भवन बनने की कहानी दर्द भरी, करुणा से उपजे संकल्प की कहानी है।जनवरी महीने के एक शाम थी, काफी ठंड थी, किसी काम से अंबेडकर अस्पताल जाना हुआ, वहाँ का दृश्य उन्हें द्रवित कर गया। ठंड में लोग पेड़ के नीचे, सायकल स्टैण्ड के करीब, खुले में, गंदगी में खाना बना रहे थे। सोने की जगह तलाश रहे थे। लोग भी अपनी इस परिस्थिति को नियती मान रहे थे। लेकिन ऐसे लोगों की इस परिस्थिति से उबारने का एक कठोर संकल्प लिया गया।कैसे होगा? क्या होगा? ये कुछ तय नहीं था। मानव सेवा को माधव सेवा मानने वाले के लिये उसका संकल्प लेना ही आधा सफर पूरा करने जैसा था। इसी भरोसे के साथ परिवार और सेवा कार्य के साथियों के बीच साझा किया गया। सब ने माना ये कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है, पर है बहुत जरुरी। इससे हजारों दीन-दुखी और समय के मारे लोगों को सहूलियत मिलेगा। मंगल भवन इसी विचार की परिणिती है। मंगल भवन का सोच अब जमीन पर उतर आया। निर्माण की शुरुवाती संकल्प के बाद, सबसे पहले छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलना हुआ। डॉ. सिंह ने इस अभियान में बहुत दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने तत्काल अपने अधिकारियों को जमीन उपलब्ध कराने का आदेश दिया। जमीन भी बहुत कम समय में आबंटित हो गया और वह भी अम्बेडकर अस्पताल के ठीक सामने।मंगल भवन का निर्माण बड़ी तेजी से प्रारंभ हुआ और जनवरी 2013 में आदरणीय डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पित हुआ। एक समय में 450 व्यक्तियों के रुकने की व्यवस्था वाला यह भवन पूरे भारत में अनूठा है

मंगल भवन निर्माण हो जाने के बाद, जिस उद्देश्य के लिए इसे बनाया गया है उसे लगातार सफलता पूर्वक संचालित करना भी बहुत चुनौती भरा काम है। इसके लिये प्रतिव्यक्ति, प्रतिदिन के हिसाब से पचास रूपया शुल्क रखा गया है। किसी भी औसत दर्जे के होटल में 50 रुपये में एक समय का भोजन मिलना मुश्किल होता है। उतने में यहाँ चार समय का भोजन और नास्ता और रुकने की सुविधा दी जाती है। नियत समय पर रोज स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है। सुबह साढ़े सात बजे नास्ते में इडली, पोहा, चाय आदि होता है। दोपहर और रात में चावल, दाल, सब्जी, रोटी, सलाद और मीठा भी दिया जाता है। शाम साढ़े चार बजे चाय के साथ बिस्किट या टोस्ट आदि दिया जाता है। इतना कुछ मात्र पचास रुपये में। खास बात ये भी है यदि कोई पचास रुपये देने में भी असमर्थ होते हैं, उनके लिये ये सब निःशुल्क उपलब्ध काराया जाता है। और तो और कुछ लोगों के पास इतने भी पैसे नहीं होते कि वे इलाज करवाने के बाद अपने गाँव वापस जा सकें, ऐसे लोगों को बस ट्रेन का किराया भी दिया जाता है और साथ ही जरूरी दवाईयाँ भी दी जाती है,मंगल भवन में आने वाले लोगों को कोई असुविधा ना हों, उसका पूरा ख्याल रखा गया है। लिफ्ट, जनरेटर, सुरक्षा के लिये सीसीटीवी, साउंड सिस्टम, गरम पानी के लिये गीजर और शुद्ध पानी के लिए वाटर कूलर के साथ आरओ प्यूरीफायर लगा हुआ है। कमरे में कूलर, खाना बनाने के लिये ऑटोमेटिक मशीन है। सम्मानपूर्वक बैठकर खाने के लिये डाइनिंग टेबल की व्यवस्था है,सबको समय पर भोजन मिलें, परिसर हमेशा साफ सुधरा रहें और किसी तरह की सेवा में कोई कमी ना रहें, उसके लिये 30 कर्मचारी सेवारत हैं। प्रार्थना के लिये गणेश जी का मंदिर है।अम्बेडकर अस्पताल के करीब का मंगल भवन एक मिसाल बन गया। वर्तमान में इसके अलावा राजनांदगांव जिला चिकित्सालय के पास 150 बेड का श्री मानव सेवा समिति के तत्वावधान में। अंबिकापुर में जिला चिकित्सालय के पास 240 बेड महाराजा अग्रसेन सेवा समिति और अटल नगर (नवा रायपुर) में सत्य सांई चिकित्सालय के पास 150 बेड का मंगल भवन संचालित है

समाज सेवी सीताराम अग्रवाल जी कहते हैं की इस कारवां का बहुत बड़ा पड़ाव होगा एम्स हॉस्पिटल रायपुर में 500 बिस्तरों का मंगल भवन ये भवन, अत्याधुनिक सर्व सुविधाओं से पूर्ण होगा। इस महान सेवा कार्य का पूरा खर्च श्री सीताराम शकुंतलादेवी चेरिटेबल ट्रस्ट उठा रही है। जो एक व्यक्तिगत ट्रस्ट है। इस प्रकल्प के निर्माण में करीब 7 करोड़ खर्च हो रहे हैं। अपने आप में एक अनूठा सेवा प्रकल्प होगा। इस कार्य में पूरा परिवार का सहयोग है,श्रीसीताराम जी का संकल्प लगातार आकार लेता जा रहा है। इसकी अगली कड़ी रायगढ़, कोरबा, जगदलपुर, दुर्ग के जिला अस्पतालों के करीब मंगल भवन के रुप में जल्द साकार होगा जिसका प्रयास जारी है। मंगल भवन प्रकल्प को सिर्फ छत्तीसगढ़ तक ही सीमित ना रखते हुए देश के अन्य हिस्सों में विस्तार देने की कोशिश जारी है।इस अनूठे और महान अभियान में कई हमसफर है एवं सेवा साथी है पर इसके कर्णधार है श्री सीताराम अग्रवाल। उनका परिवार पूरे तन-मन-धन से इस सेवा प्रकल्प में लगा हुआ है। हालांकि वे बहुत सहजता से कहते है- संकल्प ईश्वर की कृपा और साथियों के सहयोग से पूरा हो पा रहा है। वैसे भी ये काम एक सजग सामाजिक व्यक्ति के रुप में हमारी जिम्मेदारी हैं और ईश्वर की कृपा है की हमें इस जिम्मेदारी को निभाने के योग्य बनाया है।दीन-दुखी जरूरतमन्द लोगों की सेवा ही केवल उद्देश्य है, जिनसे वापसी में उन्हें धन्यवाद सुनने की भी लालसा नहीं हैं। लालसा है तो बस इतना कि सभी स्वास्थ्य होकर और मंगल भवन प्रकल्प से अच्छी यादें लेकर लौटें। और अंत में बात ये नहीं है कि आप समाज के लिये क्या करते हैं बात ये है कि आप किस भाव से करते हैं. और सेवा का भाव ही सबसे उत्तम है।अपने दुख में रोने वाले कभी हंसना भी सीख लें। औरों की हंसी लाने के लिये कभी रोना भी सीख लें, सेवा कार्य कोई भी छोटी या बड़ी नहीं होती, प्रत्येक कार्य को प्रभु पूजा के तुल्य माने। मानव की सेवा ही माधव की सेवा है। प्रभु सब में निवास करते हैं। वही आपकी सेवा को पूजा के रूप में ग्रहण कर रहे हैं इसी भाव से सबकी सेवा करें। प्राणधारी जीवों की सेवा द्वारा ही भगवान की श्रेष्ठतम पूजा संभव है ईश्वर ही आपसे सेवा कार्य करवाते आप उनके हाथ की कठपुतली हैं। अहंकार वश यह ना समझ बैठे कि आप ही सेवा कर रहे हैं। आप यह माने की प्रभु कृपा-प्रभु प्रेरणा से ही आप सेवा कर पा रहे हैं। तब आपकी शक्ति बढ़ेगी और अहंकार घटेगा। प्रार्थना और सेवा कार्य को साथ-साथ चलना चाहिए सभी सेवा कार्य भक्ति पूर्वक श्रद्धा भाव से करें। दत्तचित्त होकर परिणाम की चिंता छोड़कर सेवा करें। सफलता तथा असफलता सब प्रभु के अधीन है। सेवा कार्य अनासक्त भाव से करना चाहिए। कितना ही आकर्षक और प्रिय सेवा कार्य क्यों न हो उसमें अभिमान त्याग दें। सेवा के बदले में कुछ भी न चाहें बल्कि सेवा का सुअवसर देने वाले को धन्यवाद दें क्योंकि उसने आपकी सेवा स्वीकार की। अपनी आय का कुछ अंश सेवा कार्य में लगाएं यही सबसे बड़ा भगवान भोग है। नारायण भाव के साथ दुखियों की सेवा कीजिये।आओ आगे बढ़े, अलग से कुछ करना भाग्यशाली और सहासी वीर का कार्य है। कुछ नया करने की ठान लें उनमें अपना नाम अंकित करवायें। बिना विचारें बाहर की अंधी दौड़ में भागते जाना बुद्धिमता या वीरता नहीं। बुद्धिमान बनें, सच्चे वीर बनें।तभी मंजिल दूर थी, जब राह से गुमराह थे। राह को जब पा लिया, मंजिल नजर आने लगी।।दीन दुखी, जरूरतमंद, असहाय मरीज की सेवा को जीवन में प्राथमिकता दें। सेवा सच्ची मानवता है सेवा वास्तविक स‌द्भावना है सेवा से ही यर्थाथ समता, सामाजिक समरसता आ सकती है। मिली हुई सामर्थ्य, संपन्नता का सदुपयोग सेवा में करें। इससे दोहरा लाभ होगा। सेवा से अंतःकरण पवित्र होगा दूसरों का हित होगा। परोपकार करने की इच्छा एक सर्वोत्तम प्रेरणा शक्ति है। ध्यान रखें की दूसरों की सहायता करना सुअवसर एवं सौभाग्य की बात है। धन्य पाने वाला नहीं होता, देने वाला होता। दान देकर स्वयं अपना उपकार करें। संसार की सेवा करने से हम वास्तव में स्वयं का ही कल्याण करते हैं, ईश्वर की श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं। सेवा कार्य से ही प्रभु प्रसन्न होते हैं।ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो। राह में आये जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो।।

मंगल भवन, (एम्स हॉस्पिटल के पास रायपुर)

श्री सीतराम शकुन्तलादेवी चैरीटेबल ट्रस्ट के श्री सीताराम अग्रवाल जी के द्वारा एम्स हॉस्पिटल रायपुर में ईलाज हेतु आने वाले मरीज एवं उनके परिजनों के रहने एवं भोजन की न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराने हेतु निजी जमीन पर 5 मंजिल का 500 बिस्तर के मंगल भवन का निर्माण किया गया। जिसकी अनुमानित लागत 10 करोड़ रु. है। एम्स में आने वाले मरीज एवं परिजनों को असुविधा को देखते हुए सीताराम अग्रवाल ने मंगल भवन निर्माण करने का निर्णय लिया एवं संपूर्ण निर्माण खर्च स्वयं के संसाधन से उपलब्ध कराने की इच्छा रखते हुये किया गया। जिसकी भूमिपूजन प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के करमकमलों से संपन्न हुआ। विशिष्ट अतिथि के रुप में पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस जी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल जी, पूर्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, श्री राजेश मूणत, श्रीमती रमशीला साहू, श्री भैयालाल राजवाड़े, श्री अमर अग्रवाल, श्री खेलावन साहू, विधायक, पूर्व महापौर श्री प्रमोद दुबे एम्स के डायरेक्टर श्री नागारकर जी एवं सीताराम अग्रवाल जी के परिवार के श्रीमती शकुन्तला अग्रवाल, श्याम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल, श्यामा कावँटिया, पुत्रवधु श्रीमती बबीता अग्रवाल, श्रीमती पूजा अग्रवाल, श्रेया अग्रवाल, प्रथम अग्रवाल, कृष्णा अग्रवाल, दिव्या अग्रवाल, शैलेश कावँटिया एवं अनेक सदस्य उपस्थित थे।

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महाराजा अग्रसेन सेवा सदन धर्मशाला अंबिकापुर छत्तीसगढ़
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श्री मानव सेवा संस्थान सत्य साइ हॉस्पिटल के पास नवा रायपुर
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राजनांदगांव में स्थित मंगल भवन
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मानव सेवा ही है माधव सेवा
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परम पूज्य विजय कौशल जी महाराज का संदेश
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प्रार्थना
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मानव सेवा को लेकर अपनों के विचार अपनों के बीच
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सेवा कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने किया था समाजसेवी सीताराम अग्रवाल को महाराजा अग्रसेन सम्मान से सम्मानित

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