माहेश्वरी सभा रायपुर द्वारा आज शाम निकाली जाएगी गणगौर उत्सव पर भव्य शोभा यात्रा, श्री गोपाल मंदिर सदर बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा, माहेश्वरी सभा के सूरज प्रकाश राठी ने दी जानकारी, पूरी दुनिया में मारवाड़ी समाज द्वारा मनाया जा रहा है गणगौर उत्सव

माहेश्वरी सभा रायपुर द्वारा आज शाम निकाली जाएगी गणगौर उत्सव पर भव्य शोभा यात्रा, श्री गोपाल मंदिर सदर बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा, माहेश्वरी सभा के सूरज प्रकाश राठी ने दी जानकारी, पूरी दुनिया में मारवाड़ी समाज द्वारा मनाया जा रहा है गणगौर उत्सव kshititech
रायपुर की माहेश्वरी सभा द्वारा 11 अप्रैल को आयोजित गणगौर उत्सव कार्यक्रम एक नजर में
माहेश्वरी सभा रायपुर द्वारा आज शाम निकाली जाएगी गणगौर उत्सव पर भव्य शोभा यात्रा, श्री गोपाल मंदिर सदर बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा, माहेश्वरी सभा के सूरज प्रकाश राठी ने दी जानकारी, पूरी दुनिया में मारवाड़ी समाज द्वारा मनाया जा रहा है गणगौर उत्सव kshititech
11 अप्रैल को गणगौर उत्सव की सभी समाज बंधुओ को हार्दिक शुभकामनाएं
माहेश्वरी सभा रायपुर द्वारा आज शाम निकाली जाएगी गणगौर उत्सव पर भव्य शोभा यात्रा, श्री गोपाल मंदिर सदर बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा, माहेश्वरी सभा के सूरज प्रकाश राठी ने दी जानकारी, पूरी दुनिया में मारवाड़ी समाज द्वारा मनाया जा रहा है गणगौर उत्सव kshititech
11 अप्रैल को गणगौर उत्सव की सभी समाज बंधुओ को हार्दिक शुभकामनाएं

माहेश्वरी सभा रायपुर द्वारा आज शाम निकाली जाएगी गणगौर उत्सव पर भव्य शोभा यात्रा, श्री गोपाल मंदिर सदर बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा, माहेश्वरी सभा के सूरज प्रकाश राठी ने दी जानकारी

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति- पूरे विश्व में मारवाड़ी समाज द्वारा गणगौर महोत्सव का आयोजन धूमधाम के साथ किया जाता है, तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी माहेश्वरी सभा द्वारा 11 अप्रैल की शाम 7:00 बजे से श्री गोपाल जी मंदिर सदर बाजार रायपुर से शोभायात्रा निकाली जाएगी, उपरोक्त जानकारी देते हुए माहेश्वरी सभा के सूरज प्रकाश राठी ने बताया कि इस शोभायात्रा में माहेश्वरी समाज के बंधु सहपरिवार पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे, साथ ही इस अवसर पर शोभा यात्रा, गणगौर पूजन, संगीतमय गीतों की श्रृंखला, पारंपरिक वेशभूषा में समाज बंधुओ का समागम, सुस्वादु फलाहार, पारस्परिक मेल मिलाप के कार्यक्रम होंगे, साथ ही माहेश्वरी सभा के इस आयोजन में सहयोगी संगठन के रूप में माहेश्वरी भवन निर्माण समिति, माहेश्वरी महिला समिति, श्री गोपाल मंदिर ट्रस्ट, माहेश्वरी युवा मंडल, माहेश्वरी पूजा मंडल महिला समिति प्रमुख रूप से शामिल है, माहेश्वरी सभा के सदस्य सूरज प्रकाश राठी ने सभी समाज बंधुओ को 11 अप्रैल की रात्रि 07 बजे से निकलने वाली इस शोभायात्रा में शामिल होने का आग्रह किया है तो वही सूरज प्रकाश राठी ने बताया कि

गणगौर पूजा 25 अप्रैल – 11अप्रैल 2024 तक होंगी,एवम यह राजस्थान एवं सीमावर्ती राज्यों में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है,इस वर्ष गणगौर 11 अप्रैल 2024 को मनाया जाएगा और दैनिक पूजा सोमवार 25 मार्च 2024 से शुरू हुई है,गणगोर आयी चेतमें, केशर कुंकू हाथ में,इसरजी होंगे साथमें, गणेशजी बैठे गोदमें,सखीयाँ आयी पासमें, अखंड सुहाग की आस मे,माँ गौरा आपकी हर मनोकामना पुरी करे,गणगौर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के निमाड़, मालवा, बुंदेलखण्ड और ब्रज क्षेत्रों का एक त्यौहार है जो चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीज) को आता है। इस दिन कुँवारी लड़कियाँ एवं विवाहित महिलाएँ शिवजी (इसर जी) और पार्वती जी (गौरी) की पूजा करती हैं। पूजा करते हुए दूब से पानी के छींटे देते हुए “गोर गोर गोमती” गीत गाती हैं। इस दिन पूजन के समय रेणुका की गौर बनाकर उस पर महावर, सिन्दूर और चूड़ी चढ़ाने का विशेष प्रावधान है। चन्दन, अक्षत, धूपबत्ती, दीप, नैवेद्य से पूजन करके भोग लगाया जाता है।

सूरज प्रकाश राठी ने बताया कि गण (शिव) तथा गौर (पार्वती) के इस पर्व में कुँवारी लड़कियाँ मनपसन्द वर पाने की कामना करती हैं। विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं,होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक, 18 दिनों तक चलने वाला त्योहार है -गणगौर। यह माना जाता है कि माता गवरजा होली के दूसरे दिन अपने पीहर आती हैं तथा अठारह दिनों के बाद ईसर (भगवान शिव ) उन्हें फिर लेने के लिए आते हैं ,चैत्र शुक्ल तृतीया को उनकी विदाई होती है।

गणगौर की पूजा में गाये जाने वाले लोकगीत इस अनूठे पर्व की आत्मा हैं। इस पर्व में गवरजा और ईसर की बड़ी बहन और जीजाजी के रूप में गीतों के माध्यम से पूजा होती है तथा उन गीतों के उपरांत अपने परिजनों के नाम लिए जाते हैं। राजस्थान के कई प्रदेशों में गणगौर पूजन एक आवश्यक वैवाहिक रीत के रूप में भी प्रचलित है,निमाड़ में गणगौर का पवित्र त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है त्योहार के अंतिम दिन प्रत्येक गांव में भंडारे का आयोजन होता है तथा माता की विदाई की जाती है,गणगौर पूजन में कन्याएँ और महिलाएँ अपने लिए अखण्ड सौभाग्य, अपने पीहर और ससुराल की समृद्धि तथा गणगौर से प्रतिवर्ष फिर से आने का आग्रह करती हैं,गणगौर व्रत कथा-एक समय की बात है, भगवान शंकर, माता पार्वती एवं नारद जी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए। वह चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गांव में पहुंचे। उनका आना सुनकर ग्राम कि निर्धन स्त्रियां उनके स्वागत के लिए थालियों में हल्दी व अक्षत लेकर पूजन हेतु तुरंत पहुंच गई । पार्वती जी ने उनके पूजा भाव को समझकर सारा सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। वे अटल सुहाग प्राप्त कर लौटी,थोड़ी देर उपरांत धनी वर्ग की स्त्रियां अनेक प्रकार के पकवान सोने चांदी के थालो में सजाकर सोलह श्रृंगार करके शिव और पार्वती के सामने पहुंची। इन स्त्रियों को देखकर भगवान शंकर ने पार्वती से कहा तुमने सारा सुहाग रस तो निर्धन वर्ग की स्त्रियों को ही दे दिया। अब इन्हें क्या दोगी? पार्वती जी बोली प्राणनाथ! उन स्त्रियों को ऊपरी पदार्थों से निर्मित रस दिया गया है,इसलिए उनका सुहाग धोती से रहेगा। किन्तु मैं इन धनी वर्ग की स्त्रियों को अपनी अंगुली चीरकर रक्त का सुहाग रख दूंगी, इससे वो मेरे सामान सौभाग्यवती हो जाएंगी। जब इन स्त्रियों ने शिव पार्वती पूजन समाप्त कर लिया तब पार्वती जी ने अपनी अंगुली चीर कर उसके रक्त को उनके ऊपर छिड़क दिया जिस पर जैसे छींटे पड़े उसने वैसा ही सुहाग पा लिया

पार्वती जी ने कहा तुम सब वस्त्र आभूषणों का परित्याग कर, माया मोह से रहित होओ और तन, मन, धन से पति की सेवा करो । तुम्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी। इसके उपरांत पार्वती जी भगवान शंकर से आज्ञा लेकर नदी में स्नान करने चली गई । स्नान करने के पश्चात बालू की शिव जी की मूर्ति बनाकर उन्होंने पूजन किया,भोग लगाया तथा प्रदक्षिणा करके दो कणों का प्रसाद ग्रहण कर मस्तक पर टीका लगाया। उसी समय उस पार्थिव लिंग से शिवजी प्रकट हुए तथा पार्वती को वरदान दिया आज के दिन जो स्त्री मेरा पूजन और तुम्हारा व्रत करेगी उसका पति चिरंजीवी रहेगा तथा मोक्ष को प्राप्त होगा। भगवान शिव यह वरदान देकर अंतर्धान हो गए ,इतना सब करते-करते पार्वती जी को बहुत समय लग गया। पार्वती जी नदी के तट से चलकर उस स्थान पर आई जहां पर भगवान शंकर व नारद जी को छोड़कर गई थी

शिवजी ने विलंब से आने का कारण पूछा तो इस पर पार्वती जी बोली मेरे भाई भावज नदी किनारे मिल गए थे। उन्होंने मुझसे दूध भात खाने तथा रुकने का आग्रह किया,गणगौर नृत्य,गणगौर राजस्थान एवं मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। इस नृत्य में कन्याएँ एक दूसरे का हाथ पकडे़ वृत्ताकर घेरे में गौरी माँ से अपने पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हुई नृत्य करती हैं। इस नृत्य के गीतों का विषय शिव-पार्वती, ब्रह्मा-सावित्री तथा विष्णु-लक्ष्मी की प्रशंसा से भरा होता है। उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जयपुर सहित राजस्थान के कई नगरों की यह प्राचीन परम्परा है

माहेश्वरी सभा रायपुर द्वारा आज शाम निकाली जाएगी गणगौर उत्सव पर भव्य शोभा यात्रा, श्री गोपाल मंदिर सदर बाजार से प्रारंभ होगी यात्रा, माहेश्वरी सभा के सूरज प्रकाश राठी ने दी जानकारी, पूरी दुनिया में मारवाड़ी समाज द्वारा मनाया जा रहा है गणगौर उत्सव kshititech
11 अप्रैल को गणगौर उत्सव की सभी समाज बंधुओ को हार्दिक शुभकामनाएं
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