व्यापारियों के विरोध के बाद सरकार हुई अलर्ट- यूपीआई पर लगे सर चार्ज को लेकर व्यापारियों के साथ बैठक करेगी सरकार.एमडीआर शुल्क पर मचा है बवाल. अनेकों व्यापारियों ने यूपीआई से पेमेंट लेना ही कर दिया है बंद




व्यापारियों के विरोध के बाद सरकार हुई अलर्ट- यूपीआई पर लगे सर चार्ज को लेकर व्यापारियों के साथ बैठक करेगी सरकार.एमडीआर शुल्क पर मचा है बवाल. अनेकों व्यापारियों ने यूपीआई से पेमेंट लेना ही कर दिया है बंद
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूलने के मामले में सरकार जल्द ही खुदरा कारोबारी एसोसिएशन के साथ बैठक करने जा रही है।कारोबारियों ने कहा था कि वे 2000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगने वाले शुल्क ग्राहकों से ही वसूलेंगे। अगले 15 अक्टूबर से यूपीआई पर एमडीआर शुल्क का नियम लागू होने जा रह है।सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स व अन्य कारोबारी संगठनों के साथ वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होने जा रही है। ताकि कारोबारियों को ऐसा करने से रोका जा सके।
सूत्रों के मुताबिक इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) भी एमडीआर शुल्क को लेकर जागरूकता अभियान चलान जा रहा है ताकि एमडीआर शुल्क को लेकर खुदरा दुकानदार व ग्राहकों के बीच कोई असमंजस नहीं रहे।एमडीआर शुल्क के नाम पर अभी से कई जगहों पर खुदरा दुकानदारों ने यूपीआई भुगतान लेना बंद कर दिया है। इसलिए आईबीए को वित्त मंत्रालय ने जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है।हालांकि एमडीआर शुल्क से ग्राहकों को पूरी तरह से मुक्त रखा गया है, लेकिन लोगों के बीच यह आशंका फैल गई है कि किसी न किसी रूप में ग्राहकों से ही यह शुल्क वसूला जाएगा।इसलिए आईबीए एक मैकेनिज्म भी तैयार करेगा ताकि कारोबारी ऐसा नहीं कर सके। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंप वाले यूपीआई एमडीआर शुल्क के नाम पर अभी से यूपीआई भुगतान लेना बंद कर दिए हैं।इस पर सरकारी सूत्रों का कहना है कि असल में पेट्रोल पंप वालों का मामला उनके मार्जिन का है जो पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनी और उनके बीच का मसला है।लेकिन यूपीआई एमडीआर के नाम पर वे सरकार को अपना मार्जिन बढ़ाने के लिए दबाव बना रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल पंप संगठन ने इस संबंध में वित्त मंत्रालय में आकर मुलाकात भी की है।वित्त मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि 2000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत का जो शुल्क लगेगा, उनमें से 40 प्रतिशत राशि बैंकों को जाएगी। 30 प्रतिशत राशि मर्चेंट बैंक या पेमेंट गेटवे को जाएगी।20 प्रतिशत राशि यूपीआई एप को तो 10 प्रतिशत राशि यूपीआई के स्पांसर बैंक को दी जाएगी। सरकार को इस 0.4 प्रतिशत के शुल्क में से कोई राशि नहीं मिलेगी। इसलिए एमडीआर शुल्क न तो टैक्स है और न ही सेस व कोई सरचार्ज।वित्त मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि एमडीआर शुल्क पर 18 प्रतिशत का जो जीएसटी लगेगा, अगर उससे आम जनता पर कोई प्रभाव पड़ता है तो जीएसटी काउंसिल उस पर आम जनता के हित में फैसला ले सकता है







