भाजपाइयों की होगी बल्ले, बल्ले- सरकारी स्कूलों की जन भागीदारी समितियां को सरकार ने किया भंग-छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश, स्कूलों के प्राचार्य ही होंगे समितियो के प्रभारी अध्यक्ष, सत्ता बदलते ही भाजपा ले रही बड़े फैसले, भाजपा कार्यकर्ताओं को मिलेगा सरकारी स्कूलों की समितियां में स्थान

सरकारी स्कूलों की जन भागीदारी समितियां को सरकार ने किया भंग-छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश, स्कूलों के प्राचार्य ही होंगे समितियो के प्रभारी अध्यक्ष, सत्ता बदलते ही भाजपा ले रही बड़े फैसले, भाजपा कार्यकर्ताओं को मिलेगा सरकारी स्कूलों की समितियां में स्थान

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति-छत्तीसगढ़ प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही जहां निगम, आयोग, मंडल,सहित विभिन्न सरकारी संस्थानों में हुई राजनैतिक नियुक्तियों को तत्काल समाप्त किया जा रही है तो वहीं छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव आर पी वर्मा ने एक आदेश जारी कर प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में बनाई गई शाला प्रबंधन समिति ,शाला विकास समिति एवं जन भागीदारी समितियो में मनोनीत सदस्यों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है, एवं अस्थाई तौर पर नई नियुक्तियां होने तक संबंधित स्कूलों के प्राचार्य को ही समितियो के प्रभारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है

तथा अब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को इन समितियो में शामिल होने का मौका मिलेगा, वहीं छत्तीसगढ़ प्रदेश में लाखों की संख्या में प्राइमरी, मिडिल,हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल है जहां की जन भागीदारी समितियो के माध्यम से राजनैतिक दल अपने-अपने कार्यकर्ताओं को स्थापित करते हैं, तथा जन भागीदारी समितियो के माध्यम से नियुक्त होने वाले कार्यकर्ताओं को शासन से यह निर्देश रहता है कि संबंधित स्कूलों में वे वहां की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में जन सहयोग लेकर प्रयास करें, किंतु वर्तमान में जन भागीदारी समितियां एवं शाला विकास समितियो की स्थिति का आकलन करें तो आज सरकारी स्कूलों की व्यवस्था इतनी बदतर है कि वहां बनने वाली समितियो के लोग भी केवल अपनी जेबें भरने के चक्कर में लगे रहते हैं, एवं विद्यालय की व्यवस्थाओं से उन्हें कोई लेना देना नहीं रहता, तथा छत्तीसगढ़ शासन की मंशानूरूप इन समितियो के सदस्यों को नियुक्त करने के बाद उनके सदस्यों के लिए एक गाइडलाइन होनी चाहिए कि वे संबंधित विद्यालय के हित में अपना योगदान दें ना कि अपनी स्वार्थ पूर्ति करने के लिए

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