पनीर- घी-मक्खन के नाम पर धड़ल्ले से बाजारों में बिकने वाले गैर मानकीकृत डेयरी उत्पादों की बिक्री पर लगाई गई रोक. शुद्ध डेयरी उत्पाद के नाम पर उपभोक्ताओं के हितों से हो रहा था खिलवाड़




पनीर- घी-मक्खन के नाम पर धड़ल्ले से बाजारों में बिकने वाले गैर मानकीकृत डेयरी उत्पादों की बिक्री पर लगाई गई रोक
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -उत्तराखंड में पनीर, घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों के नाम पर बिकने वाले गैर-मानकीकृत एनालॉग डेयरी उत्पादों पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रामक उत्पादों से बचाना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।एनालॉग डेयरी उत्पाद वे खाद्य पदार्थ हैं, जो देखने और पैकेजिंग में पनीर, घी, मक्खन या अन्य दुग्ध उत्पाद जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन उनका निर्माण पूरी तरह दूध से नहीं होता। इनमें दूध की जगह या उसके साथ वनस्पति वसा, वनस्पति तेल और अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया जाता है। कम लागत के कारण ऐसे उत्पाद कई बार असली डेयरी उत्पाद बताकर बाजार में बेचे जाते हैं, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं।प्रतिबंध उन सभी गैर-मानकीकृत एनालॉग डेयरी उत्पादों पर लागू होगा, जिनकी पैकेजिंग, लेबलिंग या विपणन उपभोक्ताओं को यह आभास कराता है कि वे शुद्ध डेयरी उत्पाद हैं। हालांकि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों के अनुरूप तैयार फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे।
आदेश लागू होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाएगा। डेयरी निर्माण इकाइयों, गोदामों, थोक और खुदरा बाजारों के अलावा होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों की भी जांच होगी। संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया जाएगा। चारधाम यात्रा और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए निगरानी और सख्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर उत्पाद जब्त किए जाएंगे, लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है और मुकदमा भी दर्ज होगा।यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी माना जाएगा। प्रतिबंध एक वर्ष तक या भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा इस विषय पर अंतिम मानक अधिसूचित किए जाने तक लागू रहेगा।







