चीनी होगी और महंगी दिवाली से पहले उपभोक्ताओं को लग सकता है बड़ा झटका




चीनी होगी और महंगी दिवाली से पहले उपभोक्ताओं को लग सकता है बड़ा झटका
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -भारत एवं ब्राजील चीनी के दो बड़े उत्पादक देश हैं, जो विश्व का करीब 40 प्रतिशत चीनी उत्पादन करते हैं।दोनों देशों में इस बार गन्ने की खेती पर मौसम की मार पड़ी है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ने लगा है और वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी के संकेत हैं। आने वाले दिनों में इसका दबाव भारतीय उपभोक्ताओं पर भी बढ़ सकता है।पिछले वर्ष ब्राजील ने 4.38 करोड़ टन और भारत ने करीब तीन करोड़ टन चीनी का उत्पादन किया था। ऐसे में दोनों देशों के उत्पादन में होने वाला उतार-चढ़ाव वैश्विक चीनी बाजार को सीधे प्रभावित करता है।ब्राजील में इस बार बारिश ने गन्ने की कटाई और पेराई को प्रभावित किया है। 15 सितंबर तक वहां चीनी उत्पादन 14.4 प्रतिशत घटकर 2.607 करोड़ टन रह गया है।भारत में भी कमजोर मानसून ने गन्ने की उपज के साथ चीनी की रिकवरी दर को भी प्रभावित किया है। महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 20 प्रतिशत घटकर करीब 80 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सत्र में 99 लाख टन था।
गन्ने की उपज में 30-40 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन ने भी चेताया है कि ब्राजील-भारत में उत्पादन घटने पर वैश्विक बाजार में चीनी का संकट बढ़ सकता है।नेशनल फेडरेशन आफ कोआपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे के अनुसार अलनीनो का प्रभाव भारत की तरह ब्राजील में भी है। ऐसे में चीनी संकट से इन्कार नहीं किया जा सकता।प्रकाश की चिंता मौजूदा सत्र से आगे की भी है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की बुवाई के लिए अभी भी मौसम अनुकूल नहीं है। इसका असर 2027-28 में भी पड़ सकता है।सवाल है कि जब भारत में तीन करोड़ टन से अधिक चीनी बनती है और घरेलू खपत करीब 280-290 लाख टन है तो वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार पर क्यों पड़ेगा? दरअसल गन्ने की फसल, चीनी का स्टाक, निर्यात से मिलने वाले भाव और भविष्य में आपूर्ति घटने की आशंका के चलते चीनी की कीमतों में उछाल आती है।सरकार का अनुमान करीब तीन करोड़ टन चीनी उत्पादन का है, जबकि पहले यह 3.43 करोड़ टन था। यानी करीब 43 लाख टन कम। ऐसे में नई पेराई शुरू होने से पहले का स्टाक मायने रखता है।चीनी में तेजी का बड़ा कारण वैश्विक बाजार में तेजी भी है। इसमें मिलों को निर्यात में मुनाफा दिखने लगता है। इससे घरेलू बाजार में उपलब्ध चीनी पर दबाव बढ़ जाता है। भविष्य में कमी की आहट मिलने पर मिल द्वारा स्टाक रोक लिया जाता है।अगस्त में ही भारत में चीनी का भाव 20 जुलाई के 48 रुपये से बढ़कर 20 अगस्त को 55.70 रुपये प्रति किलो हो गया था। नए सत्र में चीनी उत्पादन और ब्राजील की स्थिति वैश्विक बाजार की दिशा तय कर सकती है। यदि उत्पादन में गिरावट अनुमान से ज्यादा रही तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है






