भारतीय जन संघ के संस्थापक थे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी-गिरधर गुप्ता. पूर्व प्रदेश महामंत्री गिरधर ने कहा- मुखर्जी जी के बलिदान को सदैव याद रखेंगे देशवासी। मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर गिरधर ने दी श्रद्धांजलि। मुखर्जी जी ने कहा था-एक देश में दो विधान. दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी
मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन
छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा के पूर्व महामंत्री श्री गिरधर गुप्ता खरसिया

भारतीय जन संघ के संस्थापक थे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी….. गिरधर गुप्ता. पूर्व प्रदेश महामंत्री गिरधर ने कहा- मुखर्जी जी के बलिदान को सदैव याद रखेंगे देशवासी। मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर गिरधर ने दी श्रद्धांजलि। मुखर्जी जी ने कहा था-एक देश में दो विधान. दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -23 जून को भारतीय जन संघ के संस्थापक एवं काश्मीर समस्या के लिए अपना सर्वत्र बलिदान कर देने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर पूरे देशवासी एवं भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें स्मरण कर रहे हैं। तो वहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का जीवन सदैव के प्रेरणादाई एवं मार्गदर्शक रहा। उपरोक्त बातें मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर एक भेंटवार्ता में अविभाजित मध्य प्रदेश खनिज विकास निगम के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा के पूर्व महामंत्री गिरधर गुप्ता खरसिया ने कही। श्री गुप्ता ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ एवं 23 जून 1953 को एक महान शिक्षाविद, बैरिस्टर और भारतीय राष्ट्रवाद के प्रखर नेता हम सभी को छोड़कर चले गए।वे ‘भारतीय जनसंघ’ के संस्थापक थे, जो आज की भाजपा का पूर्ववर्ती रूप है। कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने के लिए उनके संघर्ष और बलिदान को भारतीय इतिहास में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। गिरधर गुप्ता ने बताया कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का जन्म कोलकाता शहर के एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार में हुआ था।उनके पिता प्रसिद्ध शिक्षाविद और कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सर आशुतोष मुखर्जी थे। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में ऑनर्स और बंगाली में एम.ए. किया। 1926 में इंग्लैंड के लिंकन इन (Lincoln’s Inn) से बैरिस्टर बने।विश्वविद्यालय के कुलपति: मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति (Vice-Chancellor) बने

श्री गुप्ता ने बताया डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का राजनीतिक सफर 1929 में कलकत्ता विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए बंगाल विधान परिषद में प्रवेश से प्रारंभ हुआ वे सन 1943 से 1946 तक अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे। 1946 में उन्होंने बंगाल के विभाजन का पुरजोर समर्थन किया। ताकि हिंदू-बहुमत वाले क्षेत्रों को पाकिस्तान में जाने से बचाया जा सके। स्वतंत्रता के बाद वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के आमंत्रण पर भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बने।  और कश्मीर संघर्ष मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दिया। नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के बीच हुए ‘नेहरू-लियाकत समझौते’ (Liaquat-Nehru Pact) से मतभेद होने के कारण 6 अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।तथा 21 अक्टूबर 1951 को उन्होंने ‘भारतीय जनसंघ’ की स्थापना की। डॉ. मुखर्जी अनुच्छेद 370 के सख्त खिलाफ थे। उनका नारा था: “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे।कश्मीर में भारतीयों के लिए लागू ‘परमिट व्यवस्था का डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विरोध करते हुए, 11 मई 1953 को बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश करने की कोशिश की। इसके चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में बंद रहने के दौरान ही 23 जून 1953 को रहस्यमयी परिस्थितियों में उनका निधन हो गया। उनके इस बलिदान को देश ‘बलिदान दिवस’ के रूप में याद करता है

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