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मुस्लिम समाज के गौरव- हिफ़्ज़ ए कुरान को पूरा किया सक्ती शहर के लाल अहमद राजा ने,समस्तबरेज पप्पू खान के पोते हैं रजा, दुर्ग के जामिया- तुल- मदीना से की पढ़ाई, शक्ति के जामा मस्जिद ने भी किया अभिनंदन

मुस्लिम समाज के गौरव- हिफ़्ज़ ए कुरान को पूरा किया सक्ती शहर के लाल अहमद राजा ने,समस्तबरेज पप्पू खान के पोते हैं रजा, दुर्ग के जामिया- तुल- मदीना से की पढ़ाई, शक्ति के जामा मस्जिद ने भी किया अभिनंदन kshititech
छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में स्थापित जामिया तुल मदीना
मुस्लिम समाज के गौरव- हिफ़्ज़ ए कुरान को पूरा किया सक्ती शहर के लाल अहमद राजा ने,समस्तबरेज पप्पू खान के पोते हैं रजा, दुर्ग के जामिया- तुल- मदीना से की पढ़ाई, शक्ति के जामा मस्जिद ने भी किया अभिनंदन kshititech
शक्ति पहुंचे अहमद रजा का हुआ स्वागत

हिफ़्ज़ ए कुरान को पूरा किया शहर के लाल अहमद राजा ने,समस्तबरेज पप्पू खान के पोते हैं रजा, दुर्ग के जामिया- तुल- मदीना से की पढ़ाई, शक्ति के जामा मस्जिद ने भी किया अभिनंदन

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ती- सक्ति नगर के लाल अहमद रजा ने पूरा किया ‘हिफ्ज-ए-कुरान’, नगर में हर्ष का माहौल,वे सक्ति नगर के वरिष्ठ समाज सेवी हाजी मुनव्वर खान और वरिष्ठ पत्रकार शम्स तबरेज खान के पोते है,सक्ति नगर के एक होनहार युवा हाफिज अहमद रजा नेजामिया-तुल-मदीना, दुर्ग से अपनी तालीम पूरी कर ‘हाफिज-ए-कुरान’ बनने का गौरव प्राप्त किया है। अहमद रजा की इस धार्मिक उपलब्धि पर उनके परिवार सहित पूरे मुस्लिम समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है।

शक्ति शहर के प्रतिष्ठित परिवार से है नाता

हाफिज अहमद रजा का ताल्लुक क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित परिवार से है। वे सक्ति नगर के वरिष्ठ समाज सेवी हाजी मुनव्वर खान और वरिष्ठ पत्रकार शम्स तबरेज खान के पोते हैं। उनके पिता हाजी अब्दुल कलाम ने इस मौके पर अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए बेटे की सफलता पर प्रसन्नता जाहिर की है।

दुर्ग के जामिया-तुल-मदीना से पूरी की पढ़ाई

अहमद रजा ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से दुर्ग स्थित प्रसिद्ध दीनी संस्थान जामिया-तुल-मदीना से कुरान-ए-पाक को कंठस्थ (हिफ्ज) किया है। उनकी इस उपलब्धि पर समाज के लोगों ने कहा कि आज के दौर में भी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना काबिले तारीफ है।

जामा मस्जिद सक्ति में किया गया जोरदार स्वागत

इस खुशी के मौके पर स्थानीय मस्जिद में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। हाफिज अहमद रजा के मस्जिद पहुंचते ही लोगों ने फूल-मालाओं के साथ उनका इस्तकबाल किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके दादा हाजी मुनव्वर खान और शम्स तमरेज खान को भी बधाई दी।

दुआओं का दौर

कार्यक्रम के अंत में समाज के बुजुर्गों ने हाफिज अहमद रजा के उज्ज्वल भविष्य और उनकी इस तालीम का लाभ समाज को मिलने के लिए विशेष दुआएं मांगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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