अमित बघेल ने जिस समाज को लेकर विवाद खड़ा किया, उसी समाज ने छत्तीसगढ़ महतारी की पहली प्रतिमा में दिया था योगदान, अग्रवाल समाज ने लगाई थी छत्तीसगढ़ महतारी की पहली मूर्ति, अलग राज्य की मांग के आंदोलन का प्रतीक बने दाऊ आनंद अग्रवाल, लगातार डटे रहे दिल्ली में,दुर्ग के वर्तमान वरिष्ठ  पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के पिता है दाऊ आनंद अग्रवाल जी

अमित बघेल ने जिस समाज को लेकर विवाद खड़ा किया, उसी समाज ने छत्तीसगढ़ महतारी की पहली प्रतिमा में दिया था योगदान, अग्रवाल समाज ने लगाई थी छत्तीसगढ़ महतारी की पहली मूर्ति, अलग राज्य की मांग के आंदोलन का प्रतीक बने दाऊ आनंद अग्रवाल, लगातार डटे रहे दिल्ली में,दुर्ग के वर्तमान वरिष्ठ  पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के पिता है दाऊ आनंद अग्रवाल जी kshititech
दाऊ आनंद अग्रवाल जी

अमित बघेल ने जिस समाज को लेकर विवाद खड़ा किया, उसी समाज ने छत्तीसगढ़ महतारी की पहली प्रतिमा में दिया था योगदान, अग्रवाल समाज ने लगाई थी छत्तीसगढ़ महतारी की पहली मूर्ति, अलग राज्य की मांग के आंदोलन का प्रतीक बने दाऊ आनंद अग्रवाल, लगातार डटे रहे दिल्ली में, वर्तमान पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के पिता है आनंद अग्रवाल

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति-छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल ने सिंधी और अग्रवाल समाज को लेकर टिप्पणी की। उनकी इस टिप्पणी पर विवाद हुआ और देशभर में बवाल मचा। इस बीच एक रोचक तथ्य ये सामने आया है कि छत्तीसगढ़ महतारी की पहली मूर्ति अग्रवाल समाज के आनंद अग्रवाल ने स्थापित कराई थी। आनंद अग्रवाल दुर्ग के वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक SSP विजय अग्रवाल के पिता हैं। उन्होंने पहली मूर्ति घड़ी चौक के पास स्थापित की थी, जो आज मंदिर के रूप में बदल गया है। वर्तमान में इस मंदिर की देखरेख छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कार्यकर्ता कर रहे हैं। यानी आज जिस संगठन का प्रमुख एक पूरे समाज के खिलाफ बयान देकर विवाद में है, उसी संगठन के कार्यकर्ता एक ऐसे मंदिर की सेवा कर रहे हैं, जिसकी नींव अग्रवाल समाज के दाऊ आनंद अग्रवाल ने राज्य आंदोलन के दिनों में रखी थी। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के समय से जुड़े एक वरिष्ठ पत्रकार श्री चतुर्वेदी जी ने बताया कि उन्होंने दाऊ आनंद के जंतर-मंतर वाले धरने पर एक विशेष रिपोर्ट लिखी थी। खबर की हेडलाइन थी- लंगर के सहारे चल रहा राज्य बनाने का आंदोलन,श्री चतुर्वेदी बताते हैं जनवरी 2000 में जब ये खबर प्रकाशित हुई,तो इसका असर तुरंत दिखा। छत्तीसगढ़ के कई लोगों ने दिल्ली फोन कर दाऊ को मदद भेजनी शुरू कर दी। मदद न सिर्फ आंदोलन की ताकत बनी, बल्कि इस बात का प्रमाण भी कि राज्य निर्माण की मांग सिर्फ नेताओं की नहीं, बल्कि आम लोगों की भावनाओं से जुड़ी थी।

घड़ी चौक पर आंदोलन में बैठे रहते थे दाऊ आनंद अग्रवाल

इतिहासकार रामेन्द्रनाथ मिश्र बताते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के समय घड़ी चौक, आंदोलनकारियों को जोड़ने वाला सबसे बड़ा अड्डा था, क्योंकि वहीं अखंड धरना चलता था। इस आंदोलन में हर व्यक्ति की अपनी भूमिका थी। दाऊ आनंद अग्रवाल भी उनमें से एक थे, जो लगातार धरने पर बैठे रहते थे। छत्तीसगढ़ महतारी की पहली तस्वीर साल 1992 में रायपुर के ललित मिश्रा ने बनाई थी। उस समय वे अलग राज्य की मांग के आंदोलन में बतौर छात्र नेता सक्रिय थे।

राज्य की मांग के आंदोलन का प्रतीक बनी महतारी प्रतिमा स्थापना

छत्तीसगढ़ राज्य की मांग भले ही 1918 में उठी हो, लेकिन 1998 के दौर में आंदोलन चरम पर था। यही वो समय था, जब राज्य निर्माण का जन आंदोलन पूरे प्रदेश में तेजी से फैला। रायपुर में कलेक्टोरेट, घड़ी चौक और शहर के अन्य बड़े स्थान रोज धरना-प्रदर्शन से भरे रहते थे। आंदोलन की आवाज जितनी सड़कों पर गूंज रही थी, उतनी ही तेजी से लोगों का जुड़ाव भी बढ़ रहा था। इसी दौर में रायपुर के घड़ी चौक धरना स्थल पर एक ऐसा काम हुआ, जिसने आंदोलन को एक प्रतीक, एक चेहरा दे दिया। दाऊ आनंद कुमार अग्रवाल, जो उस समय अखंड धरना पर बैठे थे। दाऊ आनंद कुमार अग्रवाल ने घड़ी चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की पहली प्रतिमा स्थापित करवाई थी

दाऊ आनंद अग्रवाल के योगदान पर समाजसेवी हरिवल्लभ अग्रवाल की अपनी जुबानी

रायपुर शहर के वरिष्ठ समाजसेवी हरिवल्लभ अग्रवाल बताते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन मे सबसे ज्यादा समर्पण स्वर्गीय दाऊ आनंद कुमार अग्रवाल जी का रहा, मेरे से उनका बड़ा प्रेम था, उन्होंने जब दिल्ली के जतंर मंतर मे अखंड धरना दिया , तो वै रोज़ाना वहाँ से एक किलोमीटर दूर बंगला साहेब गुरुद्वारा मे लंगर लेकर पैदल ही जंतर मंतर में धरना देने चटाई बिछाकर बैठ जाते थे, मै कई बार उनके दिल्ली धरने में बैठा , रायपुर मे पुरे एक साल वे नगर घड़ी चौक में धरने पर बैठे, मैं लगभग एक – दौ घंटे रोज़ाना उनके पास बैठा करता था सरदार मनमोहन सिंह सैलानी, सविता आर्य व रामसागर पारा के साहू जी जो कपड़े का झोला टाँग कर घुमते थे उनका नाम भूल गया हूँ, सदा उनके साथ रहा करते थे, एक बार उन्होंने शहीद दिवस पर 1991 मे केडिया डिस्टलरी, कुम्हारी मे तालाबंदी की घोषणा कर दी, मैं जब आजाद चौक पहुँचा तो वहाँ दाऊ जी, साहू जी व रामगुलाम ठाकुर जी खड़े थे व तीस – चालीस लोग थे ग्रामीण से आने वाली टीम को पुलिस ने रोक लिया था वहाँ पुलिस की संख्या 100 से उपर थी, फिर मेने साइंस कालेज के अपने साथी प्रमोद चंद्राकर, उमाशंकर दूबे, अपराजित शुक्ला व अन्य से सहयोग लेकर कालेज व हॉस्टल से पांच सौ लड़के लेकर केडिया डिस्टलरी कुम्हारी कुच किए ओर वहाँ प्रतीकात्मक तालाबंदी किए, दाऊ जी का छतीसगढ राज्य के प्रति समर्पण बहुत था उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य संघर्ष मोर्चा बनाया था,जिसकी सदस्यता मैंने भी ली थी,हमारे समाज के दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल द्वारा निर्मित डी. के . अस्पताल को जब शासन महर्षि महेश योगी संस्थान को दे रही थी तब मै ओर आनंद कुमार जी आमरण अनशन पर बैठ गए थे, चार दिन अनशन चला था,इस दौरान हम अस्पताल के बाहर लगे बोर में नहाते थे,सन 2023 में उनकी मृत्यु हुई , अंतिम समय तक वे बहुत मज़बूत थे

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