आर- पार की लड़ाई, क्या टूटेगा संघ का निर्णय, सरकार ने लिया बड़ा एक्शन- एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर जारी हुए आदेश, अनुपस्थित अवधि का काटा जाए वेतन, शक्ति जिले की सीएमएचओ मैडम ने 24 घंटे के अंदर कार्य में उपस्थित होने के जारी कर दिये आदेश, नहीं लौटोगे तो होगी अनुशासन की कार्रवाई

आर- पार की लड़ाई, क्या टूटेगा संघ का निर्णय, सरकार ने लिया बड़ा एक्शन- एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर जारी हुए आदेश, अनुपस्थित अवधि का काटा जाए वेतन, शक्ति जिले की सीएमएचओ मैडम ने 24 घंटे के अंदर कार्य में उपस्थित होने के जारी कर दिये आदेश, नहीं लौटोगे तो होगी अनुशासन की कार्रवाई kshititech
फाइल फोटो एक नजर में

आर- पार की लड़ाई, क्या टूटेगा संघ का निर्णय, सरकार ने लिया बड़ा एक्शन- एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर जारी हुए आदेश, अनुपस्थित अवधि का काटा जाए वेतन, शक्ति जिले की सीएमएचओ मैडम ने 24 घंटे के अंदर कार्य में उपस्थित होने के जारी कर दिये आदेश, नहीं लौटोगे तो होगी अनुशासन की कार्रवाई

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ती- छत्तीसगढ़ प्रदेश में एनएचएम कर्मचारियों की चल रही लगातार हड़ताल को लेकर राज्य शासन भी बड़ी कार्रवाई के मूड में आ गया है, तथा लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय रायपुर ने प्रदेश के सभी जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र प्रेषित कर स्पष्ट रूप से कहा है कि एनएचएम कर्मचारियों की अनुपस्थित अवधि का संपूर्ण वेतन (कार्य नहीं तो वेतन नहीं) के आधार पर काटा जाए तथा अनुशासन की कार्रवाई की जाए इसी पत्र के परिपालन में शक्ति जिले की मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी सीएमएचओ मैडम ने भी समस्त कर्मचारियों को जो की हड़ताल अवधि में है उन्हें निर्देशित करते हुए 24 घंटे के अंदर काम पर लौटने के आदेश जारी किए हैं, तथा काम पर न लौटने पर उनके खिलाफ अनुशासन की कार्रवाई करने की भी बात कही है, तथा इस स्थिति में अब यह देखना होगा कि क्या एनएचएम कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल जारी रखेंगे या कि उनके संघ का यह निर्णय टूटेगा, इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति है, किंतु इन सभी आदेशों के बावजूद शक्ति जिले में एनएचएम कर्मचारियों का उत्साह हड़ताल के प्रति कम नहीं हो रहा है, एवं हड़ताली कर्मचारी आर पार आंदोलन के मूड में नजर आ रहे हैं

शासन के आदेश के बावजूद कर्मचारी अड़े हैं अपनी मांगों पर

एनएचएम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को लगातार 15वें दिन भी जारी रही। अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि 100 दिनों के भीतर नियमितीकरण की दिशा में कदम उठाए जाएंगे और 27% लाभ भी दिया जाएगा। लेकिन आज तक उन वादों पर अमल नहीं हुआ और उनकी मांगों को पूरी तरह अनसुना किया जा रहा है।इस बीच शासन की ओर से दमनकारी आदेश जारी किए गए हैं, जिनमें नौकरी से हटाने और नो वर्क, नो पेमेंट जैसी कार्यवाही शामिल है। इसके विरोध में कर्मचारियों ने आदेश की प्रतियां जलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और सरकार एवं अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की,कर्मचारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री उनकी जायज़ मांगों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, जबकि दुर्ग सांसद विजय बघेल भी इन मांगों को उचित और न्यायसंगत मान चुके हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं और उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है।कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक वे हड़ताल पर डटे रहेंगे।

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