शराब अगर खाडी से आती तब क्या होता ? गैस और पेट्रोल में हम भले ही दुनिया पर निर्भर हों,पर शराब मे.हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं. अकेले रायपुर में ही होली पर बिकी 58 करोड़ 9 लाख रुपए की शराब

शराब अगर खाडी से आती तब क्या होता ? गैस और पेट्रोल में हम भले ही दुनिया पर निर्भर हों,पर शराब मे.हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं. अकेले रायपुर में ही होली पर बिकी 58 करोड़ 9 लाख रुपए की शराब kshititech
फाइल फोटो एक नजर में

शराब अगर खाडी से आता तब क्या होता ? गैस और पेट्रोल में हम भले ही दुनिया पर निर्भर हों,पर शराब मे.हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं. अकेले रायपुर में ही होली पर बिकी 58 करोड़ 9 लाख रुपए की शराब

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -एशिया युद्ध की संभावनाओं को लेकर अभी दुनिया में गैस और पेट्रोल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।कहीं सप्लाई रुक रही है, कहीं कीमतें आसमान छू रही हैं, कहीं देश विदेशी निर्भरता से परेशान हैं।लेकिन हमको इन सब चिंताओं से क्या लेना-देना.हमारी किस्मत तो बड़ी अच्छी है।कम से कम शराब के मामले में हम किसी भी देश पर निर्भर नहीं हैं।इस क्षेत्र में तो छत्तीसगढ़ ने आत्मनिर्भरता का ऐसा मॉडल बना दिया है कि बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी दंग रह जाएँ।शराब के आंकड़े बताते हैं कि शराब खपत में छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष राज्यों में गिना जाने लगा है।और इसका ताज़ा नमूना होली पर देखने को मिला.सिर्फ होली के मौके पर ही छत्तीसगढ़ का एक जिला रायपुर 58 करोड़ 9 लाख रुपये की शराब गटक गए।यानि होली में रंग कम उड़े, बोतलें ज्यादा खुलीं।सरकार भी खुश।क्योंकि खजाना भर रहा है.दुकानदार खुश।क्योंकि कारोबार चमक रहा है।और लोग भी खुश …?.की मजा आ रहा है ,खेत खार ,घर द्वार सब बिक रहा है.और लोग धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहे है.एक समय था जब छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता था।लेकिन अगर यही रफ्तार रही तो आने वाले समय में इतिहासकार लिखेंगे“यह वही प्रदेश है जहाँ खेतों से ज्यादा.सरकारी शराब दुकानों की फसल लहलहाने लगी थी।” और तब शायद हम गर्व से कहेंगे.गैस और पेट्रोल में भले ही दुनिया पर निर्भर हों,पर शराब में.हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं।।

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