बरसेगी गुरुदेव की कृपा- गुरु अनुपम है, गुरु अलौकिक है, शक्ति अंचल के विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी के निवास पर होगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन, गुरुजी के अनुयायी करेंगे उनकी आराधना, महोत्सव की तैयारियां जोरों पर

बरसेगी गुरुदेव की कृपा- गुरु अनुपम है, गुरु अलौकिक है, शक्ति अंचल के विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी के निवास पर होगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन, गुरुजी के अनुयायी करेंगे उनकी आराधना, महोत्सव की तैयारियां जोरों पर kshititech
सुप्रसिद्ध विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी शक्ति

गुरु अनुपम है, गुरु अलौकिक है, शक्ति अंचल के विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी के निवास पर होगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन, गुरुजी के अनुयायी करेंगे उनकी आराधना, महोत्सव की तैयारियां जोरों पर

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ती- शक्ति आंचल सहित पूरे क्षेत्र में सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक एवं ज्योतिषी के रूप में प्रसिद्ध विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी के शक्ति स्थित निवास पर 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, इस अवसर पर जहां पंडित भोलाशंकर तिवारी जी अपने शिष्यों को आशीर्वाद देंगे, तो वहीं शक्ति जिले सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों से उनके अनुयायी एवं शिष्य जन शक्ति पहुंचेंगे तथा गुरुदेव की आराधना करेंगे, इस अवसर पर जहां आगंतुक भक्त जनों एवं शिष्यों के लिए दोपहर समय भंडारा प्रसाद का भी आयोजन किया गया है, तो वहीं सुबह से ही गुरुदेव पूजा अर्चना के साथ ही समस्त क्षेत्रवासियों प्रदेश एवं राष्ट्र की समृद्धि की कामना करते हुए पूरे दिन भर मौजूद रहेंगे

उल्लेखित हो की प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन मौके पर पंडित भोलाशंकर तिवारी जी अपने निवास पर ही शिष्य जनों से मुलाकात करते हैं, एवं वे पूर्व में छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग शक्ति में पदस्थ थे, तथा सेवानिवृत होने के बाद वे निरंतर जहां नित्य पूजा के कार्यों में रहते हैं तो वहीं पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर वर्ष भर उनके सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा, श्री रामायण कथा, सुंदरकांड पाठ सहित विभिन्न धार्मिक कथाओं का निरंतर कार्यक्रम संपन्न हो रहा है, तथा उनसे आशीर्वाद लेने एवं अपनी समस्याओं का निराकरण करवाने हेतु दूर दराज से उनके भक्त जन सह परिवार पहुंचते हैं

गुरु पूर्णिमा( गुरुदेव की महिमा)

दृष्टान्तो नैव दृष्टस्त्रिभुवनजठरे सद्‌गुरोर्ज्ञानदातुः स्पर्श क्षेत्तत्र कल्प्यः स नयति यदहो स्वर्णतामश्मसारम् । न स्पर्शत्वं तथाऽपि श्रितचरणयुगे सद्‌गुरुः स्वीयशिष्ये स्वीयं साम्यं विधत्ते भवति निरूपमस्तेन वाऽलौकिकोऽपि

अर्थात्, सच्चे गुरु के समतुल्य त्रिभुवन में कुछ भी नहीं है। पारसमणि के अस्तित्व की कल्पना को भी यदि सच मान लिया जाय तो वह भी लोहे को केवल सोना बना सकती है, दूसरी पारसमणि नहीं बना सकती। किन्तु पूज्य सद्‌गुरु के चरणों में जो शिष्य आश्रय लेते हैं उन्हें सद्‌गुरु अपने समान ही बना देते हैं। इसलिए गुरु अनुपम है, बल्कि अलौकिक है।

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