गौरवशाली इतिहास है दाऊ कल्याण सिंह जी का.प्रख्यात दानवीर के रूप में रखते थे अपनी पहचान. दाऊजी की देन से ही आज राजधानी रायपुर में संचालित है सेवा के बड़े-बड़े सार्वजनिक प्रकल्प. दानवीरता की मिशाल ऐसे बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी दाऊजी को नमन

गौरवशाली इतिहास है दाऊ कल्याण सिंह जी का.प्रख्यात दानवीर के रूप में रखते थे अपनी पहचान. दाऊजी की देन से ही आज राजधानी रायपुर में संचालित है सेवा के बड़े-बड़े सार्वजनिक प्रकल्प. दानवीरता की मिशाल ऐसे बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी दाऊजी को नमन kshititech
दाऊ कल्याण सिंह जी

गौरवशाली इतिहास है दाऊ कल्याण सिंह जी का.प्रख्यात दानवीर के रूप में रखते थे अपनी पहचान

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -अग्रवाल समाज के एक ऐसे व्यक्तित्व है जिन्होंने दानवीरता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की. आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डीकेएस अस्पताल सहित अनेको ऐसे सार्वजनिक प्रकल्प है जो कि दाऊ कल्याण सिंह जी की देन है.ये है छत्तीसगढ़ की पावन धरा के महादानी दाऊ कल्याण सिंह जी रायपुर शहर का प्रतिष्ठित डी के हॉस्पिटल इन्ही के नाम पर है.दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जी का जन्म 04/04/1876 को हुआ था. दाऊ जी को लोग सिर्फ डी के अस्पताल की जमीन के दानदाता के रूप में जानते हैं, पर ये परिचय इस महान दानदाता के लिए काफी नहीं है

आज का एम्स अस्पताल भी दाऊ जी की दान की हुई जमीन पर ही बना है। दाऊ जी ने 1944 में डी के अस्पताल वाली जमीन के साथ में भवन निर्माण के लिये 1,25,000/- नगद (वर्तमान की गणना में लगभग 70 करोड़) भी दिये थे, लभान्डी की जमीन के साथ कृषि महाविद्यालय और गरीब छात्रों के हास्टल निर्माण के लिए 112000/- (वर्तमान के लगभग 62 करोड़ रूपये), टी.बी.अस्पताल के लिए 323 एकड़ जमीन, रायपुर जगन्नाथ मंदिर के खर्चे के लिये संपूर्ण खैरा ग्राम का दान,कृषि पर रिसर्च के लिये बरोंडा ग्राम में जमीन, भाटापारा में कृषि विज्ञान हेतू विशाल जमीन, भाटापारा में अकाल के समय कल्याण सागर जलाशय का निर्माण, भाटापारा में विशाल मवेशी अस्पताल,गरीबों के लिये पुस्तकालय का निर्माण जैसे अनेकों पुण्य कार्य इस महादानी ने छत्तीसगढ़ में किये। छत्तीसगढ़ के बाहर भी इस पुण्यात्मा ने अनेकों महादान किये जिसमें प्रमुख हैं नागपुर के लेडी ईरविन हास्पिटल के निर्माण में सहयोग, सेन्ट्रल महिला कॉलेज के निर्माण में मुख्य दान, बिहार के भूकंप में महादान,वर्धा की भयंकर बाढ़ में दिल खोलकर दान दिया। दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल आज के बड़े उद्योपतियों से कई गुना ज्यादा धनवान थे।उन्होंने 1937 में लगभग 70000/- राजस्व पटाया था।(आज की गणना में लगभग 39 करोड़ से अधिक) आज इस महादानी,छत्तीसगढ़ के गौरव का नाम कहीं खो गया है खुद छत्तीसगढ़ के वासी भी इस महान माटीपुत्र के बारे में ज्यादा या कुछ भी नहीं

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