बड़ी खबर- एटीआर में प्रवेश और फायरिंग का मामला-नए साल ने दिया सबको नया सबक, जंगल के कानून से हुए जेल दाखिल, वन विभाग के अधिकारियों सहित प्रतिष्ठित परिवारों के बच्चे हैं शामिल, सोशल मीडिया पर वीडियो स्वयं किया वायरल


बड़ी खबर- एटीआर में प्रवेश और फायरिंग का मामला-नए साल ने दिया सबको नया सबक, जंगल के कानून से हुए जेल दाखिल, वन विभाग के अधिकारियों सहित प्रतिष्ठित परिवारों के बच्चे हैं शामिल
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
सक्ती-नए साल का लुत्फ उठाने के जोश में तीन युवक जंगल के कानून के तहत जेल जा पहुंचे। इनमें तीन को ज़मानत न मिलने पर 16 जनवरी तक रिमांड तक जेल भेजा है। यह सब अपना किया भुगतेंगे परन्तु इस प्रकरण ने अन्य कई को सबक दिया रहा है। जिसमें वन विभाग के अफसर और बड़े धनी घरों के गुमराह नवयुवक शामिल हैं,अचानकमार टाइगर रिजर्व ( एटीआर) के कोर जॉन में गन ले कर घुसने वाले चार युवक तफरीह उठते हुए कब कानून की सीमा लांघ गए उनको पता ही नहीं लगा अगर पता होता तो अपनी सारी करतूत का वीडियो बना कर लोकल मीडिया में खुद कभी वायरल नहीं करते,जब वीडियो वायरल हुआ तो वन विभाग के हाथ पैर फूले कि यह सब हो कब गया।अब वन विभाग के सामने इस प्रकरण का जुर्म दर्ज कर गिरफ्तारी के अलावा विकल्प नहीं था
गिरफ्तार तीन युवक आपस में रिश्तेदार भी है और फिलहाल जेल दाखिल हैं।अजीत दास वैष्णव मेजबान है जो लोरमी का रहने वाला। चौथा अभी पुलिस के हाथ नहीं लगा है वह कोरबा में किसी भाजपा नेता के रिश्तेदार है। आज के दौर में बच्चों की ऊर्जा जब परिवार संसाधनों के माध्यम बढ़ा देता है तो उनके शौक़ इसी तरह गुमराह होते हैं। यह सबक उन सबके लिए जिनके युवा गुमराह हो रहे और उनको इसमें प्रतिष्ठा बढ़ती प्रतीत हो रही है।अब आएं हम एटीआर की रीति नीति पर,1975 यह अभ्यारण्य बना और अभी तक 19 गांव बसे हैं। टाइगर की संख्या अब डेढ़ दर्जन है। तथापि सफरी में कभी टाइगर दिख जाएं तो वह खबर हो जाती है। इसका शिवतराई गेट कैमरे की निगरानी में यहां से टूरिस्ट की जिप्सी से एंट्री की व्यवस्था है। छपरवा मंदिर भी जाना हो तो इस गेट से बाहरी स्लिप बनती है, जिसमें गाड़ी से मोबाइल नम्बर,सँख्या दर्ज तथा जाने के समय ,कारण सब दर्ज किया जाता है। ठीक उसकी दूसरी तरफ लोरमी,पंडरिया, मुंगेली की तरफ से प्रवेश की लिये गेट है जमुनाही। जहां की व्यवस्था पर अफ़सरो की पकड़ ढीली है।युवकों ने जो फ़िल्म बनाई वह सुरही गेट से शुरू होती है जो पार्क का कोर एरिया है। यही फ़िल्म इस प्रकरण की विवेचना का आधार है, जिसमें युवकों की संख्या,वाहन,गन,कैम्प फायर और फायरिंग सब प्रमाण है। यह सब टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क में प्रतिबंधित है
वीडियो में जिस तरह गाड़ी के आते हो सुरही गेट खुलता है, उससे पता लगता है यहां कोई औपचारिकता नहीं होती और ये सब आते जाते रहते हैं। शिवतराई गेट पर टाइगर रिजर्व है ।पर यह जिस गेट से युवक प्रवेश किये वहां व्यवस्था भगवान भरोसे एक अदने व्यक्ति पर है,जबकि यह आखेट की दृष्टिकोण से संवेदनशील है। यह शुरू से चल रहा है। प्रवेश के कोई स्लिप बनती हो ऐसा नहीं लगता, इस मामले के उजागर होने से पार्क की व्यवस्थाजन्य कमजोरी जाहिर हुई है। अब बेतहर है कि अन्य सब कमियों पर चर्चा कर उनका उन्मूलन किया जाएं। पार्क की व्यवस्था टाइगर को बचाने के दृष्टिकोण को सम्मुख रख किया जाये। पार्क के इस जॉन व बफर जोन के गेट में पदस्थ सभी को भी ट्रेंड और सक्षम बनाना होगा। सबके लिए यह प्रकरण सबक है इसको इस नजरिये से लेना होगा। गांव के भीतर रहने वाले गन जमा करें औऱ कुत्ते नहीं पाले। कुत्ते और शिकारी चीतल मार देते हैं जो बढ़ते टाइगर की मुख्य खुराक है


