एकता की मिसाल बनी अमरनाथ यात्रा. मुस्लिम भाइयों ने यात्रियों को थमाई लाठियां. 3 जुलाई से प्रारंभ हो गई है यात्रा

एकता की मिसाल बनी अमरनाथ यात्रा. मुस्लिम भाइयों ने यात्रियों को थमाई लाठियां. 3 जुलाई से प्रारंभ हो गई है यात्रा kshititech

एकता की मिसाल बनी अमरनाथ यात्रा. मुस्लिम भाइयों ने यात्रियों को थमाई लाठियां

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -श्री अमरनाथ जी यात्रा 2025 की शुरुआत के साथ ही कश्मीर की वादियों में आस्था और भाईचारे की ऐसी तस्वीर दिखी, जिसने हर दिल को छू लिया।शुक्रवार, 3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिवसीय वार्षिक यात्रा के पहले ही दिन नुनवन आधार शिविर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मानवता की मिसाल पेश की। बारिश के बीच पवित्र गुफा की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं को रोक-रोक कर दुआओं के साथ लाठियां थमाईं गईं, ताकि बाबा बर्फानी तक का ऊबड़-खाबड़ रास्ता आसान हो सके।नुनवन आधार शिविर में गुरुवार देर रात से ही माहौल भावुक था। तड़के जैसे ही श्रद्धालुओं का पहला जत्था पवित्र गुफा की ओर बढ़ा, स्थानीय मुस्लिम युवकों ने उन्हें घेर लिया। किसी के हाथ में लाठियों का गट्ठर था, तो कोई दुआएं दे रहा था – ‘जाओ ऊपर वाले के हवाले – ऊपर वाला आप सब की हिफाजत करे। यह लाठी थाम लो, बर्फानी बाबा तक पहुंचने वाले रास्तों पर यह आपकी मदद करेगी।’कंधों पर सामान लादे, भीगते हुए श्रद्धालु एक-एक कर आगे बढ़ते गए। मुस्लिम भाई उन्हें लाठियां थमाते, गले लगाते और विदा करते। बदले में भक्त भी “धन्यवाद भाईजान” कहकर ‘बम बम भोले’ के जयकारों के साथ आगे बढ़ जाते। यह सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक आखिरी यात्री भी गुफा की ओर रवाना नहीं हो गया।

इन लाठियों की पूरी व्यवस्था पहलगाम के प्रसिद्ध समाजसेवी मुश्ताक पहलगामी और उनकी टीम ने की थी। टीम गुरुवार रात ही नुनवन पहुंच गई थी। मुश्ताक बताते हैं: ‘हमारे ये मेहमान श्रद्धालु अमरनाथ जी के दर्शन को आए हैं। कईयों को पहली बार पहाड़ी रास्तों पर चलना है। सोचा, नुकीले सिरे वाली ये खास पहाड़ी लाठियां उन्हें फिसलने से बचाएंगी, संतुलन बनाने में मदद करेंगी। बस, इन्हीं की सेवा करनी है। दुआ है कि यात्रा सुगम हो, सफल हो।’टीम के सदस्य ताहिर अहमद लोन ने कहा, ‘हम शारीरिक रूप से साथ नहीं जा पाएंगे, पर हमारी दुआएं हर कदम पर इनके साथ रहेंगी। अगर किसी का पांव लड़खड़ाया और लाठी ने संभाल लिया, तो उसके मुंह से हमारे लिए दुआ ही निकलेगी। नेक काम से जो खुशी मिलती है, वो आज मिल रही है।’मुस्लिम समुदाय के इस स्नेह से यात्री भी अभिभूत दिखे। उज्जैन से पहली बार दर्शन करने आए जयदेव बोले, ‘जिस शानदार तरीके से स्वागत हुआ, देखकर मन खुश हो गया। बिल्कुल अजनबी नहीं लगे। इतना अपनापन मिला।” गौतम सावरकर ने कहा, “यहां के लोग भी उतने ही खूबसूरत हैं, जितनी ये धरती। जिस गर्मजोशी से हमें लाठियां दीं, दुआएं दीं, वो भुलाया नहीं जा सकता।’यह नजारा सिर्फ नुनवन तक सीमित नहीं था। इससे पहले गुरुवार को जब जम्मू से श्रद्धालुओं का पहला जत्था घाटी पहुंचा, तो प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों ने भी भव्य स्वागत किया था।दरअसल, अमरनाथ यात्रा सिर्फ आस्था का संगम नहीं, हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। यात्रा की शुरुआत से समापन तक, पवित्र गुफा तक लाने-ले जाने से लेकर हर कदम पर सेवा करने में मुस्लिम समुदाय कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है

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