20 वर्षीय प्रतीक की मौत के बाद प्रशासन  सख्त -शक्ति जिले के दमाऊधारा के लिए जिला प्रशासन ने जारी कर दी नई गाइडलाइन. पर्यटको को सुरक्षा नियमों का करना होगा पालन दुर्घटना के बाद एलर्ट मोड में आया प्रशासन

20 वर्षीय प्रतीक की मौत के बाद प्रशासन  सख्त -शक्ति जिले के दमाऊधारा के लिए जिला प्रशासन ने जारी कर दी नई गाइडलाइन. पर्यटको को सुरक्षा नियमों का करना होगा पालन दुर्घटना के बाद एलर्ट मोड में आया प्रशासन kshititech
शक्ति जिले का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दमोह धारा
20 वर्षीय प्रतीक की मौत के बाद प्रशासन  सख्त -शक्ति जिले के दमाऊधारा के लिए जिला प्रशासन ने जारी कर दी नई गाइडलाइन. पर्यटको को सुरक्षा नियमों का करना होगा पालन दुर्घटना के बाद एलर्ट मोड में आया प्रशासन kshititech
शक्ति जिले का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दमोह धारा

शक्ति जिले के दमाऊधारा के लिए जिला प्रशासन ने जारी कर दी नई गाइडलाइन. पर्यटको को सुरक्षा नियमों का करना होगा पालन दुर्घटना के बाद एलर्ट मोड में आया प्रशासन

शक्ति छत्तीसगढ़ के कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सक्ती-कोरबा मार्ग पर, सक्ती से लगभग 20 किलोमीटर दूर ग्राम ऋषभतीर्थ में स्थित दमउदहरा (दमऊधारा) प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक महत्व का अद्भुत संगम है। यह स्थल वर्षभर पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ तक सड़क मार्ग से निजी वाहन अथवा टैक्सी के माध्यम से आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन सक्ती है। दमउदहरा का प्रमुख आकर्षण यहाँ का मनोहारी जलप्रपात है, जो ऊँची पहाड़ियों से कल-कल धारा के रूप में नीचे गिरता है। वर्षा ऋतु में यह जलप्रपात अपने पूरे सौंदर्य के साथ पर्यटकों का मन मोह लेता है। चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण, प्राकृतिक गुफाएँ, घने जंगल और ऊँची पहाड़ियाँ इसे प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी के शौकीनों तथा रोमांच पसंद पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाती हैं। धार्मिक दृष्टि से भी दमउदहरा अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ राम-जानकी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, ऋषभदेव जैन तीर्थंकर मंदिर, हनुमान मंदिर, भगवान शिव-पार्वती मंदिर तथा विष्णु-लक्ष्मी मंदिर स्थित हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम अपने वनवास काल के दौरान इस क्षेत्र में पधारे थे तथा यहाँ विश्राम एवं पूजा-अर्चना की थी। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। इतिहासकार लोचन प्रसाद पांडेय द्वारा खोजे गए प्रसिद्ध गूंजी शिलालेख में तत्कालीन धार्मिक गतिविधियों, सामाजिक व्यवस्था एवं स्थानीय शासन व्यवस्था का उल्लेख मिलता है, जो इस क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण है। प्रतिवर्ष जनवरी माह में यहाँ विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें प्रदेश सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुँचते हैं। सूर्य ग्रहण के अवसर पर यहाँ विशेष स्नान एवं पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संतों का आगमन होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद घाटी में जंगली बंदरों का उतरना यहाँ का एक विशेष प्राकृतिक दृश्य माना जाता है। दमउदहरा पिकनिक एवं पारिवारिक भ्रमण के लिए भी लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। पर्यटक यहाँ प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताते हैं तथा झरने और हरियाली का आनंद लेते हैं।

पर्यटकों के लिए आवश्यक सावधानियाँ

जिला प्रशासन द्वारा पर्यटकों से अपील की गई है कि वे भ्रमण के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें। वर्षा ऋतु में जलप्रपात एवं नदी-नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है, इसलिए गहरे पानी में जाने अथवा तेज बहाव वाले क्षेत्रों में स्नान करने से बचें। फिसलन वाले पत्थरों एवं चट्टानों पर चढ़ने का प्रयास न करें तथा बच्चों पर विशेष निगरानी रखें। प्राकृतिक स्थल की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक एवं अन्य कचरा इधर-उधर न फेंकें तथा पर्यावरण संरक्षण में अपना सहयोग दें। वन क्षेत्र होने के कारण वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी प्रकार की जोखिमपूर्ण गतिविधि से बचें। वाहन निर्धारित स्थान पर ही खड़ी करें तथा जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करें।प्रकृति, आस्था, इतिहास और रोमांच का अद्भुत संगम दमउदहरा (दमऊधारा) छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यह स्थल न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और पर्यटन को भी नई पहचान प्रदान कर रहा है।

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