वेदांता पॉवर प्लांट में हुआ हादसा प्रबंधन व राज्य सरकार की आपराधिक लापरवाही : मोहम्मद सिद्दीक़.हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख की सहायता दे सरकार.दोषी प्रबंधन पर दर्ज हो गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा, अन्यथा होगा उग्र आंदोलन।

वेदांता पॉवर प्लांट में हुआ हादसा प्रबंधन व राज्य सरकार की आपराधिक लापरवाही : मोहम्मद सिद्दीक़.हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख की सहायता दे सरकार.दोषी प्रबंधन पर दर्ज हो गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा, अन्यथा होगा उग्र आंदोलन। kshititech

वेदांता पॉवर प्लांट में हुआ हादसा प्रबंधन व राज्य सरकार की आपराधिक लापरवाही : मोहम्मद सिद्दीक़.हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख की सहायता दे सरकार.दोषी प्रबंधन पर दर्ज हो गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा, अन्यथा होगा उग्र आंदोलन।

रायपुर-प्रदेश कांग्रेस कमेटी असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक़ ने शक्ति जिले के वेदांता पॉवर प्लांट में हुए भीषण हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे प्रबंधन की खुली लापरवाही करार दिया है। उन्होंने इस घटना में जान गंवाने वाले श्रमिक भाइयों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मजदूरों की जान के साथ किया गया क्रूर खिलवाड़ है।

प्रबंधन और सरकार पर तीखा हमला

श्री मोहम्मद सिद्दीक़ ने अपने बयान में कहा, “शक्ति के वेदांता प्लांट में हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। यह हादसा फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और मुनाफे की अंधी दौड़ का नतीजा है। प्रदेश में बार-बार हो रहे ऐसे हादसों से स्पष्ट है कि सरकार और श्रम विभाग केवल मूकदर्शक बने हुए हैं। क्या मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं है?”
उन्होंने आगे कहा कि प्लांट में न तो पर्याप्त सुरक्षा ऑडिट कराया जाता है और न ही बिना ट्रेनिंग वाले मजदूरों की भर्ती पर कोई रोक है। शासन-प्रशासन की चुप्पी यह संकेत देती है कि उन्हें मजदूरों के पसीने और खून से कोई सरोकार नहीं है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें:

असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक़ की ओर से निम्नलिखित मांगों को सरकार और प्रबंधन के सामने रखा है:

  1. तत्काल मुआवजा: मृत प्रत्येक श्रमिक के परिजनों को फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान की जाए।
  2. घायलों का उपचार: सभी घायल श्रमिकों को 20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाए और उनके उच्च स्तरीय मुफ्त इलाज की पूरी गारंटी प्रबंधन ले।
  3. न्यायिक जांच: पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच हो और दोषी प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
  4. सुरक्षा ऑडिट: पूरे प्लांट का तत्काल सुरक्षा ऑडिट हो। बिना पंजीकरण और विधिवत प्रशिक्षण के एक भी मजदूर से काम लेना बंद किया जाए।
    7 दिन का अल्टीमेटम
    असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक़ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी 7 दिनों के भीतर उक्त मांगें पूरी नहीं की गईं, तो कांग्रेस पार्टी समस्त श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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