देश की संवैधानिक संस्थाओं की कार्यशैली को लेकर हो रहे पहली बार विरोध को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने कहा-चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के हर झूठ को किया बेनकाब! चुनाव आयोग ने भी 6 अक्टूबर को जारी किया प्रेस नोट. इलेक्शन कमिशन ने छह बिंदुओं पर कहीं अपनी बात.



भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने कहा-चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के हर झूठ को किया बेनकाब! चुनाव आयोग ने भी 6 अक्टूबर को जारी किया प्रेस नोट. इलेक्शन कमिशन ने छह बिंदुओं पर कहीं अपनी बात
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने सोशल मीडिया के माध्यम से विगत कुछ दिनों से लगातार कांग्रेस पार्टी एवं विपक्षी राजनैतिक दलों द्वारा चलाए जा रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध को लेकर कहा है कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर एक के बाद एक झूठे आरोप लगाए, लेकिन चुनाव आयोग ने हर बार उनके झूठे दावों की एक-एक कर सच्चाई जनता के सामने रख दी।
झूठ नंबर 1
राहुल गांधी का दावा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले फैसले लेते हैं।
लेकिन तीनों चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट कर दिया कि आयोग में फैसले सामूहिक रूप से लिए गए हैं और लिए जाते हैं।
झूठ नंबर 2
राहुल गांधी आज दिनभर कहते रहे कि उन्हें चुनाव आयोग से मिलने नहीं दिया जा रहा।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस या इंडी गठबंधन की ओर से मुलाकात की कोई औपचारिक रिक्वेस्ट ही नहीं मिली थी।
झूठ नंबर 3
शाम 4 बजे पुलिस के DCP के माध्यम से पता चला कि राहुल गांधी मिलना चाहते हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधियों के माध्यम से मिलने के लिए वह तुरंत तैयार था, लेकिन राहुल गांधी इस प्रक्रिया के तहत मिलने के लिए तैयार नहीं हुए।
भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि सवाल साफ है… जब तथ्य सामने हैं, तो राहुल गांधी और कांग्रेस अब कौन-सा नया झूठ बोलेंगे?
भारत निर्वाचन आयोग में 6 अक्टूबर को जारी किया प्रेस नोट
भारत निर्वाचन आयोग के उपनिदेशक पी पवन ने 6 अक्टूबर 2026 को एक प्रेस नोट जारी किया है.जिसमें उन्होंने बताया है कि आज दिन में कुछ राजनीतिक दलों के निर्वाचन आयोग की ओर मार्च के दौरान मीडिया के माध्यम से यह पता चला कि कुछ सांसद अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोग से मिलना चाहते हैं। आज के घटनाक्रम के संबंध में आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि आज शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से निर्वाचन आयोग से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था।इसके बाद शाम लगभग 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों (MPs) का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है।भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की थी। इसकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को दी गई है और वे इसी प्रक्रिया का पालन करते हैं। जब भी किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल या कई दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है, तो वह अपने विधिवत अधिकृत प्रतिनिधि (Authorised Representative) के माध्यम से आयोग से मिलने का समय मांगता है। इसके बाद दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय किए गए समय पर मुलाकात होती है।जब निर्वाचन आयोग, आज शाम 4 बजे के बाद, माननीय सांसदों के उपरोक्त मुलाक़ात के प्रस्ताव पर विचार कर रहा था, तो उन्हें दिल्ली पुलिस के DCP के द्वारा बताया गया कि जिस बैठक की मांग की जा रही थी, वह 240 सांसदों के समूह के साथ होनी थी और बैठक का प्रस्तावित स्थान संसद भवन ‘Annexe’ थी। निर्वाचन आयोग द्वारा विचार किया गया कि यह अनुरोध असामान्य है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्यूँकि प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी मुलाकात भारत निर्वाचन आयोग के परिसर में ही होती है। ECI ने प्रस्ताव दिया कि माननीय सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजा जा सकता है, जो कि अपने आप में ही एक अभूतपूर्व कदम होता। हालांकि, इस अनुरोध को भी माननीय सांसदो द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।ECI देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है, और अपने स्वयं के प्रोटोकॉल और परंपराओं का भी सम्मान करता है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कोई भी राजनीतिक दल, किसी भी समय, चुनाव आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है; एवं आयोग समय की अनुकूलता के दृष्टिगत, उनसे मिलने की तिथि और समय निर्धारित कर सकता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।






