बांसुरी की धुन पर जिसने सबको प्रेम रस में नचाया- यही है भगवान श्री कृष्ण जी की बाल लीला. देश की प्रतिष्ठित साहित्यकार उषा जैन केडिया ने कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर प्रकट की रचनाओं के माध्यम से अपनी भावनाएं





बांसुरी की धुन पर जिसने सबको प्रेम रस में नचाया- यही है भगवान श्री कृष्ण जी की बाल लीला. देश की प्रतिष्ठित साहित्यकार उषा जैन केडिया ने कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर प्रकट की रचनाओं के माध्यम से अपनी भावनाएं
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर की प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती उषा जैन केडिया ने 4 सितंबर 2026 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया है। श्रीमती उषा जैन केडिया साहित्यकार के साथ ही देश के विभिन्न साहित्य संगठनों से जुड़कर साहित्य के कार्य को गति दे रही है। तो वहीं पूरी दुनिया में बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने की दिशा में भी काम कर रही है। श्रीमती उषा जैन केडिया ने समस्त देशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा है कि
माखन मिश्री दही खाय गयो रे गोकुल में ऊधम मचाय गयो रे
बाँसुरी की धुन पर सबको प्रेम रस में नचाय गयो रे
कंकरिया मार-मार मटकी फोड़े ब्रज की छोरीन को रुलाय गयो रे
कपड़े चुराय पेड़ पर चढ़ जाये गोपीयन को सबक सिखाय गयो रे
मनीहारी बन राधा को चूड़ी पहनाये भेष बदल सबका मन चुराय गयो रे
पूतना को मार शेषनाग पर चढ़ जाये ऊँगली पर गिरिधर उठाय गयो रे
कंस को बध कर नाना को बिठाया मात-पिता को मुक्त कराय गयो रे
दुर्योधन का मेवा मिश्री छोड़ साग विधुर घर खाय गयो रे,
द्रोपती की लाज बचाया चिर बढ़ाकर भाई-बहन का धर्म निभाय गयो रे,
रुक्मणी का हरण कर पटरानी बनाया सखा बन अर्जुन को रथ थाम लीयो रे
गीता का ज्ञान दे असली रूप दिखाया महाभारत में सुदर्शन चक्र चलाय गयो रे
यशोदा का लाल नंद का दुलारा प्रेम भक्ति को भाव जगाय गयो रे
उषा जैन केडिया (मैसूर)














