सांसद कमलेश जांगड़े ने करी बाबा धाम के लिए श्रावणी मास स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग एवं साउथ बिहार को नियमित दुर्ग तक संचालित करने का किया आग्रह. रेलवे जोन के महाप्रबंधक को लिखा पत्र. सावन के महीने में जांजगीर चांपा एवं शक्ति जिले से हजारों शिव भक्त करते हैं बाबा धाम की कावड़ यात्रा


सांसद कमलेश जांगड़े ने करी बाबा धाम के लिए श्रावणी मास स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग एवं साउथ बिहार को नियमित दुर्ग तक संचालित करने का किया आग्रह
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -जांजगीर चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े ने 15 जुलाई को दक्षिण पूर्वी मध्य रेलवे बिलासपुर जोन के महा प्रबंधक को पत्र प्रेषित किया है।पत्र में श्रीमती कमलेश जांगड़े ने बिलासपुर से पटना (वैजनाथ धाम) के लिए श्रावणी मास स्पेशल ट्रेन चलाने एवं दानापुर- दुर्ग साउथ बिहार को नियमित दुर्ग तक संचालित करने की मांग करते हुए बताया है कि श्रावणी मास के पावन पर्व पर मेरे संसदीय क्षेत्र से प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में शिव भक्त बाबा बैजनाथ धाम की यात्रा के लिए जाते हैं। तथा वर्तमान में बैजनाथ धाम जाने के लिए एकमात्र दुर्ग से दानापुर तक दक्षिण बिहार एक्सप्रेस है। इसे भी प्रत्येक शुक्रवार को दानापुर से राउरकेला तक ही संचालित कर वापस दानापुर ले जाया जा रहा है। जिससे मेरे संसदीय क्षेत्र के यात्रियों को दिक्कतें हो रही हैं। तो वहीं जिन्होंने 2 महीने पहले से ही अपना आरक्षण करवा लिया है उन्हें भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस ट्रेन को नियमित रूप से दुर्ग तक संचालित किया जाए तथा शुक्रवार को किए गए स्थगित आदेश को निरस्त किया जाए एवं श्रावणी मास को देखते हुए बिलासपुर से राजेंद्र नगर (पटना) तक एक नई श्रावणी मांस स्पेशल ट्रेन प्रारंभ की जाए जिससे पूरे क्षेत्र के यात्री बाबा वैजनाथ धाम की कावड़ यात्रा कर सके
सांसद जी की पहल पर रेल यात्रियों ने किया उनका आभार व्यक्त
सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े द्वारा की गई इस पहल पर क्षेत्र के रेल यात्रियों ने उनका धन्यवाद किया है। तथा रेल यात्रियों का कहना है कि सांसद जी सदैव क्षेत्र में रेल यात्री सुविधाओं के लिए अग्रणी होकर अपनी जिम्मेदारियो का निर्वहन करती है। एवं विगत वर्ष भी उन्होंने बाबा धाम के लिए स्पेशल ट्रेन के लिए पहल करते हुए इसका संचालन करवाया था। जिससे शिव भक्त कांवड़ियों को बाबा धाम जाने के लिए काफी सुविधा मिली थी

