अमित गौतम जी की कलम से-हिंदी पत्रकारिता द्विशती सफर नामा- 30 मई 1826 को भारत में पत्रकारिता की हुई थी शुरुआत-वरिष्ठ पत्रकार अमित गौतम ने कहा- भारत में पत्रकारिता का है गौरवशाली 200 वर्षों का सफर. करोड़ों लोगों की आवाज है भारत की पत्रकारिता





हिंदी पत्रकारिता द्विशती सफर नामा 30 मई 1826 को भारत में पत्रकारिता की हुई थी शुरुआत-वरिष्ठ पत्रकार अमित गौतम ने कहा- भारत में पत्रकारिता का है गौरवशाली 200 वर्षों का सफर
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -अविभाजित मध्य प्रदेश के समय से वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष श्री अमित गौतम रायपुर ने हिंदी पत्रकारिता के भारत में सफलतम 200 वर्ष पूर्ण होने पर सभी पत्रकार साथियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता का यह गौरवशाली 200 वर्षों का सफर हम सबके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। जब हम पूरे विश्व में आज पत्रकारिता की अपनी एक अलग पहचान स्थापित किए हुए हैं।भारत में पत्रकारिता की यात्रा विशेषकर पत्रकारिता के 200 वर्ष (द्विशती समारोह) पूरे हो चुके हैं। पत्रकारिता की शुरुआत 30 मई 1826 को कोलकाता में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा पहले समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के साथ हुई थी।इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरे देश में विशेष कार्यक्रमों, संगोष्ठियों (जैसे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और बीएचयू में आयोजित) का दौर है
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों का सफर: एक नज़र में
पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे “हिंदुस्तानियों के हित के हेत” (भारतीयों के कल्याण हेतु) शुरू किया था।अतः पत्रकारिता दिवस हर साल 30 मई को इसी ऐतिहासिक शुरुआत की याद में मनाया जाता है
स्वतंत्रता पूर्व का युग (1826-1947) इस दौरान पत्रकारिता एक मिशन थी। उदन्त मार्तण्ड के बाद ‘बनारस अखबार’, ‘समाचार सुधावर्षण’, और भारतेन्दु हरिश्चंद्र के ‘कविवचन सुधा’ ने समाज में नवजागरण और स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाई। बाद में ‘प्रताप’, ‘कर्मवीर’, और ‘केसरी’ जैसे पत्रों ने जन-चेतना को नई दिशा दी
स्वतंत्रता के बाद का युग (1947-1990) पत्र-पत्रिकाओं का विस्तार हुआ और पत्रकारिता राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समस्याओं और लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम बनी।डिजिटल और आधुनिक युग (1990 के बाद से वर्तमान) भूमंडलीकरण, उपग्रह क्रांति (Satellite revolution) और इंटरनेट ने इसे बदल दिया है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक (टीवी न्यूज़) से होते हुए पत्रकारिता अब डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया (YouTube, Facebook, X) तक आ चुकी है।
हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियां
आज हिंदी पत्रकारिता अपने 200वें वर्ष में पहुँच चुकी है और यह एक विशाल उद्योग बन चुकी है।सकारात्मक पहलू यह है कि जनता की सबसे बड़ी आवाज़ है, जिसकी पहुँच करोड़ों लोगों तक है।एवं व्यावसायिकता (Commercialization) के इस दौर में ‘मिशन’ के भाव में कमी, फेक न्यूज़, सनसनीखेज खबरें (Sensationalism) और विश्वसनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौतियां हैं।






