छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध साहित्यकार बसंती वर्मा का गुजरात में हुआ सम्मान. साहित्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दी है बसंती जी ने. शक्ति जिले के पोता गांव की बिटिया एवं पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा की भाभी जी हैं बसंती जी. पीएचडी की मानद उपाधि से भी हुई सम्मानित. साल 2012 में बसंती जी का मोर अंगना के फूल साहित्य रहा पूरे देश में लोकप्रिय

छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध साहित्यकार बसंती वर्मा का गुजरात में हुआ सम्मान. साहित्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दी है बसंती जी ने. शक्ति जिले के पोता गांव की बिटिया एवं पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा की भाभी जी हैं बसंती जी. पीएचडी की मानद उपाधि से भी हुई सम्मानित. साल 2012 में बसंती जी का मोर अंगना के फूल साहित्य रहा पूरे देश में लोकप्रिय kshititech
साहित्यकार बसंती वर्मा को मिला सम्मान
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध साहित्यकार बसंती वर्मा का गुजरात में हुआ सम्मान. साहित्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दी है बसंती जी ने. शक्ति जिले के पोता गांव की बिटिया एवं पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा की भाभी जी हैं बसंती जी. पीएचडी की मानद उपाधि से भी हुई सम्मानित. साल 2012 में बसंती जी का मोर अंगना के फूल साहित्य रहा पूरे देश में लोकप्रिय kshititech
साहित्यकार बसंती वर्मा को मिला सम्मान

छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध साहित्यकार बसंती वर्मा का गुजरात में हुआ सम्मान. साहित्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दी है बसंती जी ने. शक्ति जिले के पोता गांव की बिटिया एवं पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा की भाभी जी हैं बसंती जी.

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -अविभाजित मध्य प्रदेश के समय से शक्ति जिले ने जहां साहित्य।प्रशासनिक एवं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी एक अमिट पहचान स्थापित की है तो वहीं वर्तमान में सबसे कठिन चुनौती माने जाने वाले साहित्य के क्षेत्र में आज अपने राज्य को छोड़कर अन्य राज्य में अपने कार्यों से अपनी अमिट पहचान बनाना एक बड़े ही गौरव की बात है। तथा यह गौरव हासिल किया है शक्ति जिले के ग्राम पंचायत पोता की बिटिया बसंती वर्मा ने जो की अविभाजित मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री। चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक तथा कांग्रेस नेता नोबेल कुमार वर्मा की भाभी जी हैं।सक्ती जिले के पोता गाँव की बेटी और फगुरम के वर्मा परिवार की बहू वसन्ती वर्मा को छत्तीसगढ़ी काव्य-साहित्य में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए 17 मई 2026 को हिन्दी साहित्य अकादमी, गांधीनगर (गुजरात) ने रजत जयन्ती सम्मान समारोह में ‘साहित्य वाचस्पति’ (पी-एच.डी.) की मानद उपाधि से अलंकृत किया। इस समारोह में देश के सात राज्यों के साहित्यकारों ने भाग लिया और छह साहित्यकारों को विभिन्न उपाधियों से सम्मानित किया गया

वसन्ती वर्मा को वर्ष 2012 में विमर्श के साथ प्रकाशित उनके काव्य-संग्रह ‘मोर अँगना के फूल’ के लिए साहित्य वाचस्पति की मानद उपाधि प्रदान की गई।छत्तीसगढ़ी कवयित्री को हिन्दी साहित्य अकादमी, गांधीनगर (गुजरात) द्वारा सम्मानित किए जाने के उपलक्ष्य में बिलासपुर के प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी सहित अनेक साहित्यिक संस्थाओं ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कवयित्री वसन्ती वर्मा के सम्मान में 25 मई 2026 को बिलासपुर में एक भव्य समारोह आयोजित कर उन्हें बधाई दी।अध्यक्ष की आसंदी से सुप्रसिद्ध भाषाविद् डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा, “एक छत्तीसगढ़ी कवयित्री के रूप में वसंती वर्मा ने जो पहचान स्थापित की है, वह सराहनीय है। डॉ. विनोद कुमार वर्मा के साथ मिलकर विमर्श सहित 2012 में प्रकाशित उनका प्रथम काव्य संग्रह ‘मोर अँगना के फूल’ चर्चित और यशस्वी रहा है। हिंदी साहित्य अकादमी, गुजरात द्वारा उन्हें इस ग्रंथ के लिए ‘साहित्य वाचस्पति’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया जाना छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डॉ. चंद्रभूषण वाजपेयी ने आंचलिक साहित्य में वसंती वर्मा के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी, गांधीनगर (गुजरात) ने ‘साहित्य वाचस्पति’ की मानद उपाधि दी है; इससे हम गौरवान्वित हैं और यह छत्तीसगढ़ी भाषा का भी सम्मान है।प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी, बिलासपुर द्वारा कवयित्री वसंती वर्मा को शाल, श्रीफल व स्मृति चिह्न देकर अतिथियों ने सम्मानित किया। सम्मान समारोह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए श्रीमती वसंती वर्मा ने अपनी साहित्यिक यात्रा का विवरण देते हुए एक प्रतिनिधि कविता सुनाकर वातावरण को सरस बना दिया।उल्लेखनीय है कि श्रीमती वसन्ती वर्मा, कृषि वैज्ञानिक और साहित्यकार डॉ. विनोद कुमार वर्मा की धर्मपत्नी हैं तथा पूर्व मंत्री नोबेल कुमार वर्मा की भाभी हैं। श्रीमती वर्मा की कृतियों से संबंधित प्रश्न लोक सेवा आयोग जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते रहे हैं

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