शक्ति जिले में उत्साह के साथ महिलाओं ने मनाया वट सावित्री पूजा का पर्व. छत्तीसगढ़ प्रदेश घर वापसी प्रमुख अंजू ग़बेल ने कहा- वट वृक्ष की पूजा होती है ईश्वर की साक्षात आराधना. अंजू ने भी महिलाओं के साथ करी वट सावित्री की पूजा





शक्ति जिले में उत्साह के साथ महिलाओं ने मनाया वट सावित्री पूजा का पर्व
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व पति की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का प्रतीक है। इस बार यह पावन व्रत शनिवार 16 मई को पूरे शक्ति जिले में उत्साह के साथ मनाया गया एवं इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश में घर वापसी प्रमुख श्रीमती अंजू गबेल ने भी महिलाओं के साथ जहां विधि विधान पूर्वक पूजा की तो वहीं महिलाओं में भी वट सावित्री पर्व को लेकर काफी उत्साह देखा गया अंजू ग़बेल ने बताया की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन माता सावित्री ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज को उनके पति सत्यवान के प्राण लौटाने पर मजबूर कर दिया था। माना जाता है कि यमदेव ने बरगद (वट) के पेड़ के नीचे ही सत्यवान को पुनर्जीवन दिया था। इसीलिए इस दिन पर विशेष तौर से वट वृक्ष की पूजा को साक्षात ईश्वर की आराधना माना जाता है।
वट सावित्री पूजा का क्या-क्या है महत्व
अंजू गबेल ने कहा की वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा के दौरान सूती वस्त्र, लाल फूल, सिंदूर, कच्चा सूत, अक्षत (अटूट चावल), जनेऊ, चंदन और पान-सुपारी अर्पित करने चाहिए। इसके बाद पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार, पेड़ के चारों ओर 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत या मौली (लाल/पीला धागा) लपेटें। ऐसा करने से वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं।व्रत के दौरान केवल पेड़ की ही नहीं, बल्कि माता सावित्री की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। माता को सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, चूड़ियां और बिंदी जैसी श्रृंगार की सामग्री जरूर चढ़ाएं। मान्यता है कि माता सावित्री को सुहाग का सामान चढ़ाने से व्रती महिला को ‘अखंड सौभाग्य’ का आशीर्वाद मिलता है।वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष के साथ-साथ सावित्री-सत्यवान और यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन भीगे हुए चने (चने की दाल) का विशेष महत्व है, इसे सावित्री और सत्यवान को अर्पित करें। पूजा में 5 प्रकार के ऋतु फल (जैसे आम, जामुन, केला, तरबूज, खरबूज, नारियल पानी) भी जरूर शामिल करें। इसके साथ ही आप पूरी भी अर्पित कर सकते हैं।अंजू ने बताया कि पूजा के बाद बरगद के फल या कोपल (नई पत्ती) को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान की कथा भी पढ़ते है







