भारत सरकार के नीति आयोग विजन प्रभाग में पदस्थ कटघोरा शहर के परितोष गोयल को मिला दुनिया के हार्वर्ड.न्यूयॉर्क और सिंगापुर मैं हायर एजुकेशन मास्टर के लिए एडमिशन का ऑफर. परितोष की बहुमुखी प्रतिभा की दुनिया के बड़े देशों में होती है प्रशंसा



भारत सरकार के नीति आयोग विजन प्रभाग में पदस्थ कटघोरा शहर के परितोष गोयल को मिला दुनिया के हार्वर्ड.न्यूयॉर्क और सिंगापुर देश से हायर एजुकेशन मास्टर में एडमिशन का ऑफर. परितोष की बहुमुखी प्रतिभा की दुनिया के बड़े देशों में होती है प्रशंसा
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -छत्तीसगढ़ के छोटे से नगर कटघोरा के युवा पारितोष गोयल ने वैश्विक शिक्षा जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के तीन प्रतिष्ठित संस्थानों हार्वर्ड कैनेडी स्कूल, हार्वर्ड विश्वविद्यालय, बोस्टन (अमेरिका), कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क (अमेरिका) और ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (सिंगापुर) से लोक नीति एवं लोक प्रशासन की पढ़ाई के लिए प्रवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं।वर्तमान में पारितोष नीति आयोग के विकसित भारत परिप्रेक्ष्य नियोजन एवं विज़निंग प्रभाग में कार्यरत हैं, जहाँ वे भारत के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण और भविष्य की नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान दे रहे हैं।साधारण पृष्ठभूमि और छोटे शहर से आने वाले पारितोष की यात्रा आज हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन रही है। कटघोरा में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने वास्तुकला, शहरी नियोजन और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया। पेशेवर अनुभवों के माध्यम से उन्होंने शासन, विकास और नीति निर्माण से जुड़े विषयों पर अपनी गहरी समझ विकसित की।उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक है कि छोटे शहरों से निकलने वाले युवा अब वैश्विक मंचों पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर जैसे विश्व के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों से एडमिशन लेटर आना अपने आप में एक बड़ी और अत्यंत प्रतिस्पर्धी उपलब्धि माना जाता है!पारितोष का कहना है कि लोक प्रशासन और नीति निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय उनके जमीनी अनुभवों और देश के विकास से जुड़े कार्यों से प्रेरित रहा। उनका मानना है कि भारत जैसे विविध और तेजी से बदलते देश में नीति निर्माण को अधिक समावेशी, संवेदनशील और भविष्य उन्मुख बनाने की आवश्यकता है।अपनी इस उपलब्धि का श्रेय परिवार, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को देते हुए पारितोष ने कहा कि छोटे शहरों के विद्यार्थियों को कभी भी अपनी सीमाओं से घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, “संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपनों और मेहनत की कोई सीमा नहीं होती






