डॉ. राम विजय शर्मा ने मुर्गापाट देव पर किया ऐतिहासिक शोध




डॉ. राम विजय शर्मा ने मुर्गापाट देव पर किया ऐतिहासिक शोध
शक्ति -डॉ. राम विजय शर्मा इतिहासकार, पुरातत्ववेता एवं अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता रायपुर भारत ने मुर्गापाट देव पर ऐतिहासिक शोध एवं खोज किया। मुर्गापाट देव का खुला मंदिर खरसिया के पुरानी बस्ती में हनुमान चौक के पास स्थित है। मुर्गापाट देव पत्थर के रूप में है तथा हजारो साल से इनकी पूजा हो रही है। बैगा देवेन्द्र कंवर बताते है कि मेरे दादा मंतैया कंवर बैगा के पद पर पदस्थ थे तथा उनके बाद मेरे पिता जी फागू राम कंवर बैगा का काम देख रहे थे और वर्तमान में मैं बैगा हूँ। इस मंदिर में आदिवासी परम्परा के अनुसार पूजा पाठ होता है। मुर्गापाट देव पर सफेद मुर्गा चढ़ाया जाता है। तथा 3 वर्ष पर एक विशाल पूजा होती है उस समय खैरा बकरा चढ़ाया जाता है इस 3 साला पूजा में पुरे गाँव के लोग शामिल रहते है। तथा पुरे गाँव के लोग चंदा करते है। सगेद मुर्गा एवं खैरा बकरा मुर्गापाट देव का मुख्य प्रसाद है 3 साला पूजा के समय खैरा बकरा का प्रसाद मंदिर के पास ही बनता है तथा वही पत्थर पर बैठ कर प्रसाद ग्रहण करते है। मुर्गापाट देव पर तर्पण के रूप में महुवा शराब चढ़ाया जाता है अंग्रेजी शराब नहीं चढ़ाया जाता है। श्रद्धालु भक्त मंदिर में आकर मन्नत मांगते है और पूरा होने पर सफ़ेद मुर्गा और महुवा शराब चढ़ाते है। डॉ. राम विजय शर्मा ने बताया की हजारो साल से मुर्गापाट देव का इलाके में प्रभाव है और इसे हमारे पूर्वजो ने स्थातिप किया है। किसी व्यक्ति ने इसे स्थापित नहीं किया है। इनके आशीर्वाद से खरसिया तथा आसपास बीमारी हैजा, मलेरिया, अकाल आदि नही होता है हजारों साल पहले उस जमाने में जब बड़े बड़े हॉस्पिटल नहीं थे तब हमारे पूर्वजो ने इस तरह के मंदिर स्थापित कर लोगों को माहमारी बीमारी अकाल से बचाया और इस परंपरा आज तक जीवित है इसके लिए बैगा तथा पूरे क्षेत्र के लोग प्रशंसा के पात्र है जो हजारों साल की संस्कृति को निरंतर जारी रखे है। यह अन्धविश्वास नहीं है बल्कि प्राचीन विश्वास है जिसे हमारे पूर्वजो ने स्थापित किया और जिस पर हमें गर्व है। सफेद मुर्गा और महुवा शराब केवल भोजन और पेय पदार्थ नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है। खरसिया एवं आस पास के हर समाज के लोग लड़का लड़की की शादी के समय प्रथम पूजा मुर्गापाट देव की करते है और हल्दी तेल चढाते है। इसी तरह छत्तीसगढ़ के त्यौहार हरेली, होली, दशहरा, दिवाली एवं अन्य त्योहारों के अवसर पर गाँव के लोग बैगा के माध्यम से पूजा करते है स्वयं नहीं करते है। मुर्गापाट देव आज भी जागृत है और गाँव तथा आस पास की रक्षा करते है। हाल ही में श्री लकेश्वर राठौर मन्नत पूरा होने पर सफेद मुर्गा और महुवा शराब चढ़ाये थे। मुर्गापाट देव अत्यंत शक्तिशाली है और लोगों की मन्नत प्रायः पूरा होती है। बैगा जी ने बताया कि मंदिर जीर्णोधार कुछ दिन पहले हुवा है और चबूतरा बना कर टाइल्स लगवाया गया है। शोध कैंप में मनमोहन सिंह ठाकुर, डॉ. राधेश्याम शर्मा, आनंद श्रीवास (सेवानिवृत प्रधान पाठक), श्रीमती शिवकुमारी, रवि यादव, विजय गुप्ता, राखी साहू सहित धोबी समाज गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण जनता उपस्थित रह कर शोध कैंप को सफल बनाये ।






