मासिक धर्म पर सिस्टम का अधर्म, स्कूलों में बंटने वाले फ्री नैपकिन लैब जांच में फेल.पीरियड्स का ब्लड नहीं सोख पा रहे पैड. क्योंकि वजन 10 की जगह 5.4 ग्राम ही।थिकनेस भी 30% कम; नतीजा- बच्चियों को स्किन रेशेज और इंफेक्शन.पैड्स के साथ नहीं दिए गए डिस्पोजल पाऊच

मासिक धर्म पर सिस्टम का अधर्म, स्कूलों में बंटने वाले फ्री नैपकिन लैब जांच में फेल.पीरियड्स का ब्लड नहीं सोख पा रहे पैड. क्योंकि वजन 10 की जगह 5.4 ग्राम ही।थिकनेस भी 30% कम; नतीजा- बच्चियों को स्किन रेशेज और इंफेक्शन.पैड्स के साथ नहीं दिए गए डिस्पोजल पाऊच kshititech

मासिक धर्म पर सिस्टम का अधर्म, स्कूलों में बंटने वाले फ्री नैपकिन लैब जांच में फेल.पीरियड्स का ब्लड नहीं सोख पा रहे पैड. क्योंकि वजन 10 की जगह 5.4 ग्राम ही।थिकनेस भी 30% कम; नतीजा- बच्चियों को स्किन रेशेज और इंफेक्शन.पैड्स के साथ नहीं दिए गए डिस्पोजल पाऊच

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -मासिक धर्म में गंदे कपड़े के उपयोग से संक्रमण और गंभीर रोग की पीड़ा को समझते हुए सरकार ने राजस्थान में फ्री सैनेटरी नैपकिन देने का अच्छा निर्णय किया था, मगर ‘सिस्टम’ ने सरकार के अच्छे निर्णय में भी खराबा लगा दिया है। प्रदेश में सप्लाई हो रहे सैनेटरी नैपकिन में इतनी कमियां हैं कि यह खुद एक गंदा कपड़ा ही रह गया है। आरएमएससीएल की ओर से दिए जा रहे नैपकिन गुणवत्ता पर खरे नहीं हैं। इसके बावजूद सप्लाई जारी है। खराब नैपकिन के कारण बच्चियों, युवतियों, महिलाओं को रेशेज व स्किन प्राब्लम्स सामने आई हैं।कई पैमानों में इनकी जांच तक को दायरे से बाहर रखा हुआ है तो होने वाला इंफेक्शन भी सामने नहीं आ पाता। हालांकि कई स्कूलों और आंगनबाड़ियों से इस बारे में शिकायतें आई हैं। इन शिकायतों पर जिम्मेदार अथॉरिटी किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर रही है।जयपुर, भरतपुर, जोधपुर के स्कूल और आंगनबाड़ी से सैनेटरी नैपकिन के 30 सैंपल लिए गए। दो लैब पर जांच कराई गई। दोनों ही जगह इनके खराब होने का पता चला। इस मुद्दे पर एक बार फिर सिस्टम और सरकार का ध्यान खींच रहा है।

कुपोषित पैड्स- वजन आधा ही

मामला जयपुर के सांगानेर आंगनबाड़ी से लिए गए सैनेटरी पैड की है। 10 के पैक का वजन महज 46.4 ग्राम निकला, जबकि 100 ग्राम होना था।जयपुर, भरतपुर, जोधपुर के स्कूल-आंगनबाड़ी में बांटे गए पैड्स की जांच में निकली कई खामियां।कमी है तो विभाग क्रॉस चेक करे, सुधार कराए।जयपुर के सोडाला में राना कॉलोनी, राना बस्ती की आंगनबाड़ी। बैच नंबर hlrj-26001।सांगानेर के महात्मा गांधी सरकारी स्कूल, सेक्टर पांच, प्रताप नगर। बैच नंबर hlrj-26001।जयपुर के सांगानेर महापुरा पंचायत, जयसिंहपुरा 2 की आंगनबाड़ी। बैच नंबर hlrj-26006।जोधपुर में ओसियान ब्लॉक, मोटानिया नगर पंचायत, लखेटा वन की आंगनबाड़ी। बैच नंबर hlrj-26005।जोधपुर में ओसियान ब्लॉक का गर्वनमेंट सीनियर।

कॉटन क्वालिटी सबसे खराब लंबाई-चौड़ाई-मोटाई भी कम

फ्री सैनेटरी नैपकिन में किस क्वालिटी की कॉटन होनी चाहिए, यह तय नहीं है। इन पैड्स में सबसे निम्न स्तर की कॉटन है, जिनकी सोखने की क्षमता ठीक है, लेकिन रिसावरोधी नहीं है। पैड्स में मेडिकेटेड कॉटन होना चाहिए, जो नहीं है।

वजन भी बहुत ही कम

एक पैड का वजन 8 से 10 ग्राम होना चाहिए। जांच में 5.4 ग्राम ही मिला है। अन्य पैड का अधिकतम वजन 7.9, 6.4, 7.6 ग्राम निकला।

पैड का थिकनेस भी कम

विभाग ने पैड थिकनेस 9 से 10 एमएम बताई, जांच में 7 एमएम मिली।

सोखने की क्षमता

इस पैड की सोखने की क्षमता 50 एमएल है, जो तय मानक है।लेकिन साइज छोटा और थिकनेस कम होने से लीकेज होता है।

नैपकिन पैड्स को लेकर जहां से सैंपल लिए गए उसमें प्रमुख रूप से सेकंडरी स्कूल, बेथवा साया।डीडवाना आंगनबाड़ी केरप पंचायत, मेघवालों की ढाणी । बैच नंबर hlrj-26006।कुनकुना पंचायत, कुनकुना 3 आंगनबाड़ी। बैच नंबर hlrj-26006।भरतपुर के सेवर ब्लॉक में लुधाबाई 3 का आंगनबाड़ी केन्द्र। बैच नंबर hlrj-26004।भरतपुर सिटी ब्लॉक आनंद नगर, आंगनबाड़ी। बैच नंबर hlrj-26001 है। तथा पूरे मामले को लेकर सवाल- डिस्पोजल पाउच क्यों नहीं दिए, कीमत ₹2 करोड़ से ज्यादा।भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन और टेंडर की शर्तों के अनुरूप हर सेनेटरी पैड के साथ डिस्पोजेबल पाउच दिया जाना जरूरी है, लेकिन कंपनी ने किसी भी स्कूल, आंगनबाड़ी, सरकारी कॉलेजों, मदरसों, पॉलीटेक्निक कॉलेजों, संस्कृत स्कूल-कॉलेजों, महिला कॉलेजों में कहीं भी पाउच नहीं दिए। कम सप्लाई यानी 6.22 करोड़ के सेनेटरी पैड्स में ही डिस्पोजल पाउच नहीं देकर कंपनी ने ₹2 करोड़ सीधे ही गोल कर दिए

कार्टून की जगह असुरक्षित तरीकों से सप्लाई क्यों?

सप्लाई के दौरान नैपकिन कार्टून में सुरक्षित रहते हैं, लेकिन इन्हें असुरक्षित तरीकों से भेजे गया। इससे ये दब जा रहे और फटे-मुड़े निकल रहे। बहरोड़ और अन्य जगह से विभाग को लिखित शिकायत मिली है।सप्लाई भी केवल 12.60% ही की हैं; कंपनी को 22 दिसंबर 2025 में ऑर्डर मिला और इस समय के बाद से ही पूरे प्रदेश में 75 दिन में सैनेटरी नैपकिन सप्लाई करने थे। कंपनी ने दो बार एक्सटेंशन भी ले लिया और खुद विभाग के अनुसार अब तक केवल 12.60% ही सप्लाई की गई है यानी कुल 44 करोड़ नैपकिन बजाय लगभग 6.22 करोड़ ही सप्लाई हुए। कहीं तो सप्लाई शून्य है।हम क्वालिटी टेस्ट करते हैं, लेकिन अन्य विभागों को भी हमने कह रखा है कि वे भी जांच करा लें। सप्लाई क्यों नहीं हो रही? इस बारे में पता कर लेता हूं। यदि सप्लाई नहीं की गई है तो पैनल्टी लगाएंगे। उपरोक्त बातें पुखराज सैन, एमडी, आरएमएससीएल ने बताई

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