अमेरिकी डॉलर का उपयोग नहीं करेंगे रूस और चीन. दोनों ने लिया अहम फैसला. वैश्विक व्यवस्था को बदल सकता है यह निर्णय

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अमेरिकी डॉलर का उपयोग नहीं करेंगे रूस और चीन. दोनों ने लिया अहम फैसला

दिल्ली से हमारे संवाददाता की विशेष खबर

दिल्ली-दुनिया की आर्थिक ताकत का खेल अब एक नए मोड़ पर पहुँचता दिख रहा है।रूस और चीन ने मिलकर एक ऐसा फैसला लिया है, जो आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था को बदल सकता है। दोनों देशों ने साफ कर दिया है कि अब वे आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल नहीं करेंगे, बल्कि अपनी-अपनी मुद्राओं में लेन-देन करेंगे।यह सिर्फ एक व्यापारिक निर्णय नहीं है, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक चाल है जिसे आज की भाषा मेंडी-डॉलराइजेशन कहा जा रहा है। यानी दुनिया की अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे अमेरिकी डॉलर की पकड़ से बाहर निकालना। दशकों से डॉलर वैश्विक व्यापार की रीढ़ रहा है, तेल से लेकर अंतरराष्ट्रीय सौदों तक, हर जगह उसी का दबदबा रहा है। इसी वजह से अमेरिका को एक अलग तरह की आर्थिक ताकत और नियंत्रण मिला हुआ था चाहे वह प्रतिबंध लगाना हो या वैश्विक बाजारों को प्रभावित करना।लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों और चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत ने इस सोच को और तेज कर दिया है कि क्यों न डॉलर पर निर्भरता कम की जाए। अपनी मुद्रा में व्यापार करने से न सिर्फ बाहरी दबाव कम होगा, बल्कि दोनों देश अपनी आर्थिक संप्रभुता को भी मजबूत कर पाएंगे।इस कदम का असर सिर्फ रूस और चीन तक सीमित नहीं रहेगा। अगर और देश भी इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले समय में डॉलर का वर्चस्व धीरे-धीरे चुनौती के घेरे में आ सकता है। इससे वैश्विक व्यापार के नियम, मुद्रा बाजार और भू-राजनीतिक संतुलन all कुछ बदल सकता है।सीधे शब्दों में कहें तो दुनिया अब एक ही आर्थिक केंद्र के भरोसे नहीं रहना चाहती,
और यही बदलावडी-डॉलराइजेशन की असली शुरुआत है

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