2 हफ्ते बहाल रहेगी शांति-बिना परमिशन निकले, तो उड़ा देंगे’, सीजफायर के बाद भी ईरान के तेवर तल्ख; होर्मुज में फंसे जहाजों को अल्टीमेटम. फुल पावर में है ईरान. झुकने का नहीं है



2 हफ्ते बहाल रहेगी शांति-बिना परमिशन निकले, तो उड़ा देंगे’, सीजफायर के बाद भी ईरान के तेवर तल्ख; होर्मुज में फंसे जहाजों को अल्टीमेटम. फुल पावर में है ईरान. झुकने का नहीं है
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर दो हफ्तों के लिए विराम लग गया है. अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर पर बात बनी है. दोनों देश 10 अप्रैल से इस्लामाबद में समझौतों पर चर्चा करेंगे. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खोलने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन ईरान अभी भी इस समुद्री जलमार्ग को लेकर सख्ती अपनाए हुए है. दरअसल, ईरानी नौसेना ने बुधवार (08 अप्रैल) को होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद जहाजों को सूचित किया जो भी शिप इस रास्ते को पार करना चाहते हैं, उन्हें तेहरान की अनुमित लेनी होगी. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की नौसेना ने रेडियो मैसेज के जरिए जहाजों को इस संबंध में सख्त चेतावनी दी है. तेहरान ने कहा कि अगर कोई जहाज बिना अनुमति के वहां से गुजरता है, तो उसको नष्ट कर दिया जाएगा.
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रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की ओर से समुद्र में फंसे जहाजों को लिए जारी मैसेज में कहा गया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए आपको ईरानी सेपाह नौसेना से अनुमति लेनी होगी। यदि कोई भी पोत बिना अनुमति के पारगमन करने का प्रयास करता है, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा. गौर करने वाली बात है कि ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की गई है. बुधवार सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरीके से खोल दिया जाए, तो केवल दो हफ्ते के लिए अमेरिका की ओर से हमलों को रोक दिया जाएगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में होर्मुज स्ट्रेट के पास अलग-अलग देशों के जहाज फंसे हैं, जिनमें अधिकांश ईरान की अनुमति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. हालांकि, युद्ध के बीच भी ईरान ने केवल अपने पांच मित्र देशों के जहाजों को इस रूट से जाने की अनुमति दी थी, जिसमें भारत और चीन के दहाज शामिल रहे. बता दें कि ईरान का कहना है कि वह इस समुद्री मार्ग पर अपना एकाधिकार रखना चाहता है, लेकिन जब तक सीजफायर लागू है, उस वक्त तक इसका नियंत्रण ओमान के पास रहेगा

