कब तक बेटी को अपने पास रखोगे, एक ने एक दिन तो उसका विवाह कराओगे, बिलासपुर की सामाजिक कार्यकर्ता भारती मोदी ने अपने शब्दों में बेटियों को लेकर लिखी बहुत सुंदर बातें



कब तक बेटी को अपने पास रखोगे, एक ने एक दिन तो उसका विवाह कराओगे, बिलासपुर की सामाजिक कार्यकर्ता भारती मोदी ने अपने शब्दों में बेटियों को लेकर लिखी बहुत सुंदर बातें
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति बिलासपुर शहर की सामाजिक कार्यकर्ता भारती मोदी ने बेटियों को लेकर अपनी कलम से बहुत ही सुंदर बातें लिखी है, भारती मोदी कहती हैं कि
अपनी इस सोच को बदलो
आज की सोच कहा जा रही,
इस सोच को सोच सको तो सोचो,
बेटी दे दी तो अहसान कर दिया
ऐसी उनकी सोच है, कौन राजा रख सका बेटी को घर मे
चाहो तो पूछ सकते हो राज जनक से,कब तक बेटी को पास रख के पालोगे,इक न इक दिन तो उसका विवाह कराओगे,विवाह नही कराओगे तो,बुढ़ापे मे किसके भरोसे छोड़ जाओगे
आपने अपनी बेटी दी है तो
किसी ने अपना बेटा भी सौपा है,
अपना पाला-पोसा काबिल लड़का तुमको दिया है,ठीक है तुम उसके भरोसे अपना घर छोड़बके आई हो
पर उसे भी तो घरवालो को
साथ लेवके चलना होता है,जिस परिवार मे वह पला- बढ़ा,उसकी जिम्मेदारी भी लेना होता है,ठीक है की उसवपर तुम्हारा प्रथम अधिकार है,पर एक अच्छा बेटा और भाई ही
अच्छा दामाद और पति बनेगा
ये सच भी तो ना निराधार है
तुम्हारा आत्म सम्मान सर्वप्रथम है,कभी भी न उसका गला घोटना
पर जिस घर मे ब्याह के आई होउसके सम्मान से ना पीछे हटना,
बेटी दे के अहसान कर दिया,इस सोच को बदलना होगा, और भी कई बाते है,जिनको हमें समझना होगाबशादी के बाद माँ बनी तो,सर आखों पर बिठाई जायेगी,वरना वही बेटी अपने पिता के घर मे ठुकराई जायेगी, सासरे से आती बेटी का,पीहर मे मान सम्मान है,बहन की डोली उठाना,हर भाई का अभिमान है,बेटी दी है कोई अहसान नही किया,इस सच को अब अपना लोपूर्वजो की जो रीत है,उससे न तुम अलग चलो,बेटी का कन्यादान कर
उसका पीहर से नाता जोड़े रखो,ये दो परिवारों की रीति है ,ना इसे अहसान मे तोलो,उसके सुख-दुख मे साथ खड़े रहो पर उसकी कमजोरी न बनो,उसे उसकी हिम्मत दे उसकी ताकत बनो,नई सोच को अपनाओ समय के साथ चलो,पर बेटी देखे अहसान कर रहेज़अपनी इस सोच को बदलो,अपनी इस सोच को बदलो



