ठगा महसूस कर रहे सहारा खाताधारक– सहारा निवेशक घूम रहे एजेंटों के दफ्तर में, नहीं मिल रहा उनकी रकम वापसी का कोई जवाब, गृह मंत्री अमित शाह ने किया था 18 जुलाई को सहारा रिपोर्ट रिफंड पोर्टल लांच, क्या होगा सहारा निवेशकों का लगा सवालिया निशान, केंद्र की सरकार ने किए थे रिफंड संबंधी बड़े-बड़े वायदे, शक्ति जिले की ही लगभग 100 करोड़ की राशि है निवेश

<em>ठगा महसूस कर रहे सहारा खाताधारक-- सहारा निवेशक घूम रहे एजेंटों के दफ्तर में, नहीं मिल रहा उनकी रकम वापसी का कोई जवाब, गृह मंत्री अमित शाह ने किया था 18 जुलाई को सहारा रिपोर्ट रिफंड पोर्टल लांच, क्या होगा सहारा निवेशकों का लगा सवालिया निशान, केंद्र की सरकार ने किए थे रिफंड संबंधी बड़े-बड़े वायदे, शक्ति जिले की ही लगभग 100 करोड़ की राशि है निवेश</em> kshititech
18 जुलाई से प्रारंभ हुआ सहारा रिफंड
पोर्टल भी आधा-अधूरा
<em>ठगा महसूस कर रहे सहारा खाताधारक-- सहारा निवेशक घूम रहे एजेंटों के दफ्तर में, नहीं मिल रहा उनकी रकम वापसी का कोई जवाब, गृह मंत्री अमित शाह ने किया था 18 जुलाई को सहारा रिपोर्ट रिफंड पोर्टल लांच, क्या होगा सहारा निवेशकों का लगा सवालिया निशान, केंद्र की सरकार ने किए थे रिफंड संबंधी बड़े-बड़े वायदे, शक्ति जिले की ही लगभग 100 करोड़ की राशि है निवेश</em> kshititech
18 जुलाई को केंद्र सरकार ने लांच किया सहारा पोर्टल
<em>ठगा महसूस कर रहे सहारा खाताधारक-- सहारा निवेशक घूम रहे एजेंटों के दफ्तर में, नहीं मिल रहा उनकी रकम वापसी का कोई जवाब, गृह मंत्री अमित शाह ने किया था 18 जुलाई को सहारा रिपोर्ट रिफंड पोर्टल लांच, क्या होगा सहारा निवेशकों का लगा सवालिया निशान, केंद्र की सरकार ने किए थे रिफंड संबंधी बड़े-बड़े वायदे, शक्ति जिले की ही लगभग 100 करोड़ की राशि है निवेश</em> kshititech
सहारा निवेशक काट रहे दफ्तरों के चक्कर

ठगा महसूस कर रहे सहारा खाताधारक– सहारा निवेशक घूम रहे एजेंटों के दफ्तर में, नहीं मिल रहा उनकी रकम वापसी का कोई जवाब, गृह मंत्री अमित शाह ने किया था 18 जुलाई को सहारा रिपोर्ट रिफंड पोर्टल लांच, क्या होगा सहारा निवेशकों का लगा सवालिया निशान, केंद्र की सरकार ने किए थे रिफंड संबंधी बड़े-बड़े वायदे, शक्ति जिले की ही लगभग 100 करोड़ की राशि है निवेश

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति-वर्षों से अपना खून- पसीना एक कर जमा की गई पूंजी को वापस लेने सहारा के खाताधारक एजेंटों के चक्कर काट-काटकर थक गए थे, तथा अनेकों निवेशकों ने तो उपभोक्ता आयोग का भी दरवाजा खटखटाया तथा उपभोक्ता आयोग से उनके पक्ष में फैसला आने के बावजूद सालों बीत गए किंतु उनकी रकम वापसी की कोई प्रक्रिया नहीं हुई,किंतु 18 जुलाई को भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने जब केंद्रीय पंजीयक सहारा रिफंड पोर्टल लांच किया तो सहारा के निवेशकों को कुछ उम्मीद जगी कि अब उनका पैसा वापस मिलेगा, किंतु पोर्टल लांच होने के 5 दिन बाद भी आज सहारा के खाताधारक अपनी रकम वापसी के लिए सहारा के स्थानीय एजेंटों एवं दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, किंतु उनकी रकम वापसी संबंधी प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी नहीं मिल पा रही है, तथा कंप्यूटर सेंटरों में जब लोग उक्त पोर्टल में अपनी जानकारी डालने पहुंच रहे हैं तो कंप्यूटर ऑपरेटर भी उस प्रक्रिया को पूर्ण नहीं कर पा रहे हैं तथा कुछ सहारा एजेंटों का कहना है कि अभी इस पोर्टल में तकनीकी खराबी आ हैं जिसके कारण इसे अपडेट की आवश्यकता है

तो वही ऐसे हजारों निवेशक हैं जो कि अपना लाखों रुपए सहारा में निवेश किए हुए हैं, तो वही जन चर्चा यह भी है कि एक व्यक्ति को सिर्फ ₹10000/-रुपये ही वापसी होगी तो यह तो ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत होगी तथा सरकार को चाहिए कि सहारा निवेशकों ने जितनी रकम जमा की है उसे अविलंब ब्याज सहित वापस किया जाए तथा सहारा बांड की मैच्योरिटी अवधि पूर्ण होने के बाद से लेकर आज दिनांक तक की जो अवधि है उसका भी ब्याज का भुगतान खाताधारकों को किया जाना चाहिए तथा सारा खाताधारक भी बेहद परेशान हैं एवं अब आगे जाने क्या होगा इसे लेकर सवालिया निशान खड़ा हो गया है

सहारा की बात करें तो केवल शक्ति जिले से ही लगभग 100 करोड रुपए की राशि सहारा ने लोगों ने निवेश की हुई है, तथा सहारा के भुगतान को लेकर विधानसभा- लोकसभा तक अनेकों बार आवाज उठ चुकी हैं, किंतु राजनैतिक दल ना जाने क्यों खाताधारकों के मन में पूर्ण विश्वास बना पाने में आज भी कामयाब नहीं हुए हैं, तो वही मिली जानकारी के अनुसार सहारा ने लगभग 24000 करोड रुपए निवेशकों का वापस नहीं किया है, तथा सहारा का कहना है कि उपरोक्त राशि सेबी ने सीज कर रखी है तथा केंद्र सरकार की पहल पर 5000 करोड़ रुपए की रकम वापसी की बात कही जा रही थी किंतु सहारा की रकम वापसी का क्या मापदंड होगा एवं किन लोगों को यह रकम वापस मिलेगी यह तो आज भी अंधेरे में ही है किंतु यह बात तो स्पष्ट है कि सहारा के निवेदक यदि उनका भुगतान नहीं हुआ तो एक बड़ा जन आंदोलन जरूर करेंगे जिसका खामियाजा सभी जिम्मेदार राजनीतिक दलों को भुगतना पड़ेगा

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