सबसे अनोखा कार्य- जांजगीर का स्नेक मैन-“स्नैक मैन” के रूप में टिंकू शुक्ला ने अंचल में बनाई अपनी पहचान,रोजाना पांच से सात सांपों की करते हैं निःशुल्क रेस्क्यू, बारिश में हो रही है टिंकू की पूछ परख, 15 साल की उम्र से ही कर रहे यह सेवा का कार्य

सबसे अनोखा कार्य- जांजगीर का स्नेक मैन-"स्नैक मैन" के रूप में टिंकू शुक्ला ने अंचल में बनाई अपनी पहचान,रोजाना पांच से सात सांपों की करते हैं निःशुल्क रेस्क्यू, बारिश में हो रही है टिंकू की पूछ परख, 15 साल की उम्र से ही कर रहे यह सेवा का कार्य kshititech
सांपों को पकड़ते जांजगीर के स्नेक मैन
सबसे अनोखा कार्य- जांजगीर का स्नेक मैन-"स्नैक मैन" के रूप में टिंकू शुक्ला ने अंचल में बनाई अपनी पहचान,रोजाना पांच से सात सांपों की करते हैं निःशुल्क रेस्क्यू, बारिश में हो रही है टिंकू की पूछ परख, 15 साल की उम्र से ही कर रहे यह सेवा का कार्य kshititech
जांजगीर का स्नेक मैन

जांजगीर का स्नेक मैन-“स्नैक मैन” के रूप में टिंकू शुक्ला ने अंचल में बनाई अपनी पहचान,रोजाना पांच से सात सांपों की करते हैं निःशुल्क रेस्क्यू, बारिश में हो रही है टिंकू की पूछ परख, 15 साल की उम्र से ही कर रहे यह सेवा का कार्य

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सकती-जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय जांजगीर निवासी अनुराग उर्फ़ टिंकू शुक्ला समूचे क्षेत्र में “स्नैक मैन” के रूप में जाने जाते हैं। वे जहरीले सांपों को चंद मिनट में पकड़ लेते हैं। यही वजह है कि जिलेभर में उनकी खासी पूछपरख है। खास बात यह है कि वे लोगों के घरों और बाग़-बगीचों से सांप को पकड़ने का कार्य नि:शुल्क करते हैं।ज्ञात हो कि बारिश के दिनों में अनुराग उर्फ़ टिंकू शुक्ला की पूछपरख रोजाना होती है। वे एक दिन में पांच से सात जहरीले साँपों का रेस्क्यू करते हैं। दिन हो या फिर आधी रात, उन्हें जब भी कोई फोन करके बुलाता है तो वे स्वयं के साधन से मौके पर पहुंच जाते हैं और निःशुल्क वहाँ से सांप को पकड़ कर निर्जन स्थल या फिर दूर जंगल में छोड़ देते हैं। अनुराग उर्फ़ टिंकू शुक्ला, किसी भी जहरीले सांप को पकड़ने के बाद उसे आम लोगों के सुपुर्द नहीं करते। वे सांप को पकड़कर अपने पास रखते हैं और फिर निर्जन स्थल पर उसे सुरक्षित छोड़ देते हैं

अब तक वे हजारों सफल रेस्क्यू कर भयभीत लोगों सहित असुरक्षित साँपों की रक्षा कर चुके हैं। उनका मानना है कि अंचल में अक्सर देखने को मिलता है कि यदि कोई जहरीला सांप दिखाई देता है तो उसे मारकर जला दिया जाता है, जो गलत है। बताते चलें कि आम लोगों तक पहुंचने के लिए अनुराग उर्फ़ टिंकू शुक्ला ने एक रोचक तरीका अपनाया है। वे और उनके सहयोगी, विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यम से आम लोगों तक इस बात की खबर पहुंचाते हैं कि सांप दिखने पर उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय उनकी रेस्क्यू टीम के लोगों को मोबाइल पर इसकी जानकारी दें। ताकि, आमजन और सांप, दोनों की सुरक्षा की जा सके,अनुराग उर्फ़ टिंकू शुक्ला ने बताया कि वे सांपों के बारे में लोगों को जागरूक करने की भी कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे क्षेत्र में, लोग अब सांपों को नहीं मारते हैं। अगर उन्हें सांप दिखता है, तो वे मुझे फोन करके बुलाते हैं और हम उसे बचा लेते हैं। मैं लोगों से कहा करता हूं कि सांप केवल आत्मरक्षा में हमला करते हैं, जब उन्हें लगता है कि उनकी जान खतरे में है

अनुराग उर्फ़ टिंकू शुक्ला ने कहा कि उनकी टीम में छह और लोग भोला राठौर, दादू राठौर, आशीष कहरा, पप्पू शिवा, सोनू व धन्नू हैं, जो उनके साथ काम करते हैं। उन्होंने कहा, “हम अपने साथ विशेष दस्ताने, लाठी, जूते, हुक और अन्य सुरक्षा सामग्री रखते हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उनकी टीम की निःस्वार्थ सेवा की सराहना की है और उन्हें सम्मानित भी किया है। टिंकू शुक्ला ने कहा क‍ि शुरुआत में, जब मैंने सांपों को बचाना शुरू किया और इसे पूर्णकालिक सेवा कार्य के रूप में करना शुरू किया, तब मेरा परिवार मुझे ऐसा करने से मना करता था। लेकिन, अब उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है

अनुराग उर्फ़ टिंकू शुक्ला ने कहा क‍ि मैं 10 साल से भी अधिक समय से सांपों को बचा रहा हूं। उनमें से ज्यादातर ऐसे सांप हैं, जो लोगों के घरों और बगीचों में घुस जाते हैं। यह पूछे जाने पर कि सांपों को बचाने की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली, तब उन्होंने कहा कि जब वे करीब 15 साल के थे, तब उनके दोस्त के घर एक सांप घुस गया था, जिसे लोग मारने की तैयारी में थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत दिखाकर उस सांप को पकड़ लिया और फिर निर्जन स्थान पर छोड़ दिया, तभी से साँपों को बचाने का यह सिलसिला शुरु हो गया

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