राज्य कर्मचारी बीमा निगम द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों का रिटायरमेंट पश्चात नहीं दी जा रही चिकित्सा उपचार की सुविधाएं,शक्ति के शिक्षक मायाशंकर नामदेव ने लिखा विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र, निगम का गठन ही कर्मचारियों को सुविधाएं देने हेतु किया गया, सरकारी एवं निजी संस्थानो के कर्मचारियों के लिए क्यों अलग-अलग है नियम

राज्य कर्मचारी बीमा निगम द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों का रिटायरमेंट पश्चात नहीं दी जा रही चिकित्सा उपचार की सुविधाएं,शक्ति के शिक्षक मायाशंकर नामदेव ने लिखा विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र, निगम का गठन ही कर्मचारियों को सुविधाएं देने हेतु किया गया, सरकारी एवं निजी संस्थानो के कर्मचारियों के लिए क्यों अलग-अलग है नियम kshititech
राज्य कर्मचारी बीमा निगम
राज्य कर्मचारी बीमा निगम द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों का रिटायरमेंट पश्चात नहीं दी जा रही चिकित्सा उपचार की सुविधाएं,शक्ति के शिक्षक मायाशंकर नामदेव ने लिखा विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र, निगम का गठन ही कर्मचारियों को सुविधाएं देने हेतु किया गया, सरकारी एवं निजी संस्थानो के कर्मचारियों के लिए क्यों अलग-अलग है नियम kshititech
मायाशंकर नामदेव शिक्षक
राज्य कर्मचारी बीमा निगम द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों का रिटायरमेंट पश्चात नहीं दी जा रही चिकित्सा उपचार की सुविधाएं,शक्ति के शिक्षक मायाशंकर नामदेव ने लिखा विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र, निगम का गठन ही कर्मचारियों को सुविधाएं देने हेतु किया गया, सरकारी एवं निजी संस्थानो के कर्मचारियों के लिए क्यों अलग-अलग है नियम kshititech
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राज्य कर्मचारी बीमा निगम द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों का रिटायरमेंट पश्चात नहीं दी जा रही चिकित्सा उपचार की सुविधाएं,शक्ति के शिक्षक मायाशंकर नामदेव ने लिखा विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र, निगम का गठन ही कर्मचारियों को सुविधाएं देने हेतु किया गया

सक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ति- पूरे देश भर में भारत सरकार द्वारा निजी एवं सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों को सेवारत रहते हुए उनके संबंधित संस्थानो के माध्यम से प्रतिवर्ष एक निश्चित प्रीमियम राशि ली जाती है, तथा इस राशि के एवज में संबंधित कर्मचारियों के समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलों में उपचार की सुविधा उपलब्ध होती है, किंतु वर्तमान में सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शक्ति के शिक्षक मायाशंकर नामदेव जो कि विद्यालय में सेवारत रहते हुए स्वयं गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तथा उनका उपचार उपरोक्त कंपनी की सुविधा अनुरूप चल रहा है,तथा आगे भी नियमित रूप से उपचार चलना है, किंतु इसी बीच श्री नामदेव को जानकारी लगी है की सेवानिवृत्ति के पश्चात ऐसी समस्त सुविधाएं उनकी बंद हो जाएगी तथा उन्होंने संबंधित हॉस्पिटल में जाकर संपर्क किया तो वहां पता चला कि राष्ट्रीय कर्मचारी बीमा निगम में सेवानिवृत्ति के पश्चात निजी संस्थाओं के कर्मचारियों को यह चिकित्सा सुविधा लाभ नहीं मिल पाएगा

जिस पर मायाशंकर नामदेव काफी परेशान हो गए तथा उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी शाखा प्रबंधक राज्य कर्मचारी बीमा निगम शाखा बिलासपुर एवं क्षेत्रीय निदेशक राज्य कर्मचारी बीमा निगम रायपुर को दी है, तथा मायाशंकर नामदेव का कहना है कि उन्होंने सेवारत रहते हुए अपने संबंधित संस्थान के माध्यम से प्रतिवर्ष उपरोक्त प्रीमियम की राशि जमा की है,किंतु सेवानिवृत्ति के पश्चात जब उनकी उम्र भी वृद्धावस्था की ओर अग्रसर होंगी एवं उन्हें स्वास्थ्य लाभ की आवश्यकता होंगी तो संबंधित कंपनी द्वारा उन्हें उपचार उपलब्ध नही करवाया जायेगा, जिससे उन्हें आने वाले समय में काफी परेशानियां होगी एवं श्री नामदेव ने उपरोक्त चिकित्सा सुविधाओं को सतत जारी रखने की मांग की है तथा श्री नामदेव ने कहा है कि देश भर में ऐसे लाखों कर्मचारी हैं जो की सेवानिवृत होने के पश्चात स्वास्थ्य चिकित्सा की आवश्यकता महसूस करते हैं एवं संबंधित कंपनी द्वारा यदि ऐसा किया जाएगा तो वे आर्थिक रूप से परेशान हो सकते हैं

ज्ञात हो की राज्य कर्मचारी बीमा निगम का गठन पूरे देश भर में किया गया है, तथा इस निगम के गठन का उद्देश्य ही कर्मचारियों को सुविधा प्रदान करना है, किंतु आज निजी शिक्षण संस्थान में काम करने वाले कर्मचारी यदि सेवानिवृत हो जाए और उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिले तो क्या यह उचित है, तथा कंपनी को चाहिए कि आज इस दिशा में आगे बढ़कर पहल करें एवं नियम कानून सभी के लिए एक बराबर होने चाहिए, आज यदि कोई सरकारी कर्मचारी है तो क्या उससे प्रीमियम की राशि कम ली जा रही है, एवं यदि कोई निजी संस्था का कर्मचारी है तो उसे प्रीमियम की राशि क्या अलग है, यदि प्रीमियम की राशि दोनों से सामान ली जा रही है तो दोनों को ही समान सुविधाएं देनी चाहिए

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