अग्रसेन जयंती पखवाड़ा पर विशेष-रायपुर के समाजसेवी हरिवल्लभ अग्रवाल जी की कलम से- स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन पर छत्तीसगढ़ के अग्रवाल वैश्य समाज का योगदान। समाज के योद्धा जिन्होंने अंग्रेजों की तानाशाही के बावजूद उनका विरोध करते हुए लोगों के अधिकारों की मजबूती के लिए काम किया




अग्रसेन जयंती पखवाड़ा पर विशेष-रायपुर के समाजसेवी हरिवल्लभ अग्रवाल जी की कलम से- स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन पर छत्तीसगढ़ के अग्रवाल वैश्य समाज का योगदान। समाज के योद्धा जिन्होंने अंग्रेजों की तानाशाही के बावजूद उनका विरोध करते हुए लोगों के अधिकारों की मजबूती के लिए काम किया
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -11 अक्टूबर 2026 को अग्रकुल प्रवर्तक श्री श्री 1008 श्री भगवान श्री अग्रसेन जी की जयंती का महापर्व पूरे देश दुनिया में अग्रवाल समाज द्वारा धूमधाम के साथ आयोजित किया जाएगा। तथा अग्रवाल समाज में जहां पूरी दुनिया में आज अपने कार्यों से अपनी पहचान बनाई है तो वहीं आज देश की आजादी की बात करें तो वही देश में हुए महत्वपूर्ण आंदोलनो की तो कहीं ना कहीं अग्रवाल एवं वैश्य समाज में इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर अपनी सक्रिय भागीदारी करी है। अग्रसेन जयंती के पखवाड़े पर रायपुर के समाजसेवी हरिवल्लभ अग्रवाल ने अपनी कलम से इन बातों का जिक्र करते हुए बताया है कि रायपुर , धमतरी, महासमुंद मे अग्रवाल वैश्य पंचायत ने 1921 के असहयोग आंदोलन में विदेशी कपड़ा बेचना बंद कर अपने दूकान , गोदाम से विदेशी कपड़ों को निकालकर बीच सड़क मे होली जलाई थी। जिससे चिढ़कर अंग्रेजों ने नेतृत्व कर्ता रायपुर के सदरबाजर निवासी गोपीचंद अग्रवाल व राम गोपाल अग्रवाल की दुकानों में ताले लगवा दिए थे।एवं 6 महीने के लिए जेल भेज दिया था, बाबु छेदी लाल गुप्त , गरियाबंद निवासी इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे.इन्हें भी जेल भेजा गया, कंकाली पारा के शिव दास डागा की हवेली स्वतंत्रता सेनानियों के इकट्ठे होने की जगह थी, 1922 मे जमींदार भूरामल अग्रवाल व घासीराम अग्रवाल निवासी आरंग ने धमतरी व रायपुर के किसानों को संगठित कर लगान न देने का आंदोलन चलाया तो अंग्रेजों ने घासीराम को 9 महीने के लिए जेल भेज दिया
समाज के लोगों के इस योगदान पर हरिवल्लभ अग्रवाल जी कहते हैं कि महासमुंद के हरिराम अग्रवाल ने 1930 के झंडा सत्याग्रह चलाया तो अंग्रेज़ों ने इन्हें पिथौरा के जंगलों में लाठियों से बेदम पिटाई कर जेल भेज दिया था,जंगल सत्याग्रह में जब वनवासी समाज को जंगल से लकड़ी निकालने पर रोक लगाई गई तो बड़ा आंदोलन हुआ जिसमें रायपुर के वैश्य व्यापारी आंदोलन में शामिल लोगों के लिए बैलगाड़ी भर – भरकर राशन रायपुर से भेजते थे , सेठ बलदेव प्रसाद अग्रवाल, राजनांदगाँव के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा थे 1933 मे जब महात्मा गांधी जी राजनांदगाँव आए तो इन्हीं के घर ठहरे थे वहाँ इन्होंने गांधी आश्रम भी बनाया था।छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम के अन्य प्रमुख योद्धाओ में सर्वश्री नंदकुमार दानी ,श्रीधर लाल अग्रवाल , रामकुमार अग्रवाल ( रायगढ़) नरसिंह प्रसाद अग्रवाल ( घमदा) गणेश प्रसाद अग्रवाल , निरंजन लाल गुप्ता , चंडी प्रसाद गुप्ता (दुर्ग ), लक्ष्मी नारायण अग्रवाल , ( बिलासपुर)मालुराम केडिया( अकलतरा), कन्हैया लाल अग्रवाल , (राजनांदगाँव ), नारायण दास बगडिया (नेवरा), झब्बूलाल अग्रवाल ( कटघोरा),अलख नारायण अग्रवाल ( बिलासपुर ),हर प्रसाद अग्रवाल हैं। जिन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है






