विभागीय पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता पर शिक्षक संघ का कड़ा विरोध.नियमों में प्रावधान नहीं, फिर पदोन्नति में टीईटी अनिवार्य करना शिक्षकों के साथ अन्याय -संजय ठाकुर एवं मनोज राय.वरिष्ठता के आधार पर तत्काल पदोन्नति की मांग, वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का मिले अवसर. जांजगीर-चांपा जिला इकाई के अध्यक्ष रविंद्र द्विवेदी ने दी जानकारी

विभागीय पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता पर शिक्षक संघ का कड़ा विरोध.नियमों में प्रावधान नहीं, फिर पदोन्नति में टीईटी अनिवार्य करना शिक्षकों के साथ अन्याय -संजय ठाकुर एवं मनोज राय.वरिष्ठता के आधार पर तत्काल पदोन्नति की मांग, वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का मिले अवसर. जांजगीर-चांपा जिला इकाई के अध्यक्ष रविंद्र द्विवेदी ने दी जानकारी kshititech

विभागीय पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता पर शिक्षक संघ का कड़ा विरोध.नियमों में प्रावधान नहीं, फिर पदोन्नति में टीईटी अनिवार्य करना शिक्षकों के साथ अन्याय -संजय ठाकुर एवं मनोज राय.वरिष्ठता के आधार पर तत्काल पदोन्नति की मांग, वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का मिले अवसर. जांजगीर-चांपा जिला इकाई के अध्यक्ष रविंद्र द्विवेदी ने दी जानकारी

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय ठाकुर एवं महामंत्री श्री मनोज राय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक शिक्षक तथा मिडिल स्कूलों में कार्यरत शिक्षक लंबे समय से अपनी लंबित पदोन्नति की बाट जोह रहे हैं। शिक्षकों को उम्मीद थी कि विभाग उनकी रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित करने का ठोस निर्णय लेगा, ताकि पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर मिल सके। किंतु इसके विपरीत टीईटी की आड़ में पदोन्नति प्रक्रिया में नई बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रभावी शिक्षक भर्ती नीति एवं नियमों में पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसी स्थिति में विभागीय बैठक में टीईटी को पदोन्नति के लिए अनिवार्य बताना तथा भर्ती नियमों से परे निर्देश जारी करना स्वयं में परस्पर विरोधी स्थिति है। संघ ने स्पष्ट किया कि नियमों में यदि टीईटी की पात्रता को पदोन्नति के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है, तो विभागीय स्तर पर केवल बैठक के निर्णय के आधार पर शिक्षकों की पदोन्नति रोकना उचित नहीं है।शिक्षक संघ के प्रदेश पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों को वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने की समय-सीमा दी गई है। जब शासन द्वारा स्वयं टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय निर्धारित किया गया है, तब वर्तमान में लंबित पदोन्नति प्रक्रिया में टीईटी को अनिवार्य शर्त बनाकर वरिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति से दरकिनार करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठता के आधार पर वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों को टीईटी के नाम पर रोकने से न केवल शिक्षकों में असंतोष उत्पन्न होगा।इसलिए विभाग को नियमों एवं शासन द्वारा निर्धारित समय-सीमा का सम्मान करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने मांग की है कि वर्तमान में तैयार वरिष्ठता सूची के आधार पर पात्र शिक्षकों की पदोन्नति तत्काल की जाए। पदोन्नत होने वाले शिक्षकों को वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर एवं आवश्यक निर्देश दिए जाएं। टीईटी को पदोन्नति में तत्काल बाध्यता बनाने के बजाय शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए शासन द्वारा निर्धारित समय-सीमा का लाभ दिया जाना चाहिए।संघ ने यह भी मांग की है कि सभी पात्र शिक्षकों को अवसर प्रदान करने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का आयोजन तत्काल कराया जाए। इससे जो शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण करना चाहते हैं, उन्हें पर्याप्त अवसर मिल सकेगा और पदोन्नति प्रक्रिया भी अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं होगी।छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रांतीय मंत्री भुवनेश्वर देवागन जांजगीर-चांपा के जिलाध्यक्ष डॉ. रविन्द्र द्विवेदी,संगठन मंत्री राजेन्द्र जायसवाल,कार्यकारी अध्यक्ष संतोष साव,जिला सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी,प्रदीप श्रीवास,जय तिवारी,सुखदेव सिदार सहित सभी सदस्यों ने प्रदेश नेतृत्व की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षकों की वर्षों से लंबित पदोन्नति को नियमों के अनुरूप शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति शिक्षकों का जायज अधिकार है और टीईटी को लेकर उत्पन्न भ्रम एवं विसंगति के कारण वरिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित करना उनके हित में नहीं होगा

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