शक्ति के गेवाड़ीन दंपति ने लिया विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी का आशीर्वाद. कथा श्रवण करने पहुंचे नरेश- रीना. नरेश गेवाडीन ने दिया भागवत कथा के आयोजक परिवार को साधुवाद

शक्ति के गेवाड़ीन दंपति ने लिया विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी का आशीर्वाद. कथा श्रवण करने पहुंचे नरेश- रीना. नरेश गेवाडीन ने दिया भागवत कथा के आयोजक परिवार को साधुवाद kshititech
विद्वान पंडित का आशीर्वाद लेते हुए नरेश रीना

शक्ति के गेवाड़ीन दंपति ने लिया विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी का आशीर्वाद. कथा श्रवण करने पहुंचे नरेश रीना

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -नगर पालिका शक्ति के पूर्व अध्यक्ष नरेश गेवाडीन एवं पूर्व उपाध्यक्ष श्रीमती रीना गेवाड़ीन ने 7 जून को शक्ति की हटरी धर्मशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में पहुंचकर विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी एवं कथा वाचक श्री कृष्णा तिवारी जी का आशीर्वाद लिया एवं कथा श्रवण किया। तथा उपरोक्त कार्यक्रम का आयोजन शक्ति के तिवारी- वाजपेई परिवार द्वारा करवाया जा रहा है।व्यास पीठ से कथावाचक कृष्णा तिवारी ने कंस वध, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के प्रमुख उद्देश्यों—अधर्म का नाश और प्रेम की विजय—को दर्शाते हैं श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन व्यास पीठ से पंडित कृष्णा तिवारी ने कंस वध रुक्मणी विवाह की कथा श्रवण कराया कृष्णा तिवारी ने भक्तगणों को कथा श्रवण कराते हुए बताया कंस के अत्याचार बढ़ने पर भगवान कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया। लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा। कंस अपने मामा दुंदुभि और अन्य असुरों की हार के बाद श्रीकृष्ण और बलराम को मारने की योजना बनाई। उसने अक्रूर जी के माध्यम से दोनों भाइयों को मथुरा के धनुष यज्ञ में आमंत्रित किया श्रीकृष्ण और बलराम ने मथुरा पहुँचकर कंस के सभी मल्लों और कुवलयापीड़ (मदमस्त) हाथी का वध कर दिया। इसके बाद श्रीकृष्ण क्रोधित होकर कंस को सिंहासन से खींच लिया और श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाया कथा वाचक ने कहा कि रुकमणी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थी, जो भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करने को इच्छुक थी। लेकिन रुकमणी जी के पिता व भाई इस विवाह से सहमत नहीं थे। जिसके चलते उन्होंने रुकमणी के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी आमंत्रित कर लिया। जैसे ही यह खबर रुकमणी को पता चली, तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई।विवाह के दिन श्रीकृष्ण रुक्मिणी का हरण कर द्वारिका की ओर निकल पड़े। रास्ते में शिशुपाल, जरासंध और रुक्मी ने श्रीकृष्ण को रोका। श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को पराजित किया और रुक्मी को बंदी बना लिया। बाद में रुक्मिणी के आग्रह पर श्रीकृष्ण ने रुक्मी को छोड़ दिया और द्वारिका में पूरे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ रुक्मिणी से भगवान श्री कृष्णा विवाह किया।कृष्णा तिवारी ने कहा भागवत कथा श्रवण करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु गण महाआरती प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का लाभ ले रहे हैं

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