बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुँचे सद्गुरु श्री रितेश्वर जी, राष्ट्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना. रितेश्वर जी महाराज ने कहा- भगवा हमारे हृदय में है एवं भारत के शिखर पर है. शिवरीनारायण के संजय अग्रवाल ने कहा-सदगुरु जी का यह प्रवास सनातन धर्म की चेतना को सुदृढ़ करने वाला





बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुँचे सद्गुरु श्री रितेश्वर जी, राष्ट्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -श्री आनंदम धाम के परमपूज्य सद्गुरु श्री रितेश्वर जी महाराज अपने वाराणसी प्रवास के दौरान काशी विश्वनाथ धाम पहुँचे। यहाँ उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन कर राष्ट्र की सुख-शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की मंगलकामना की। काशी पहुँचने पर श्रद्धालुओं एवं अनुयायियों ने सद्गुरुदेव का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।दर्शन के उपरांत सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी ने उपस्थित मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्होंने काशी और भगवान विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा उसके जीवनमूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्र एवं समाज में शांति, सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मकता के विस्तार की कामना की।इसी क्रम में भगवा ध्वज के संदर्भ में सद्गुरु श्री रितेश्वर जी ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है और उसका सदैव सम्मान है, जबकि भगवा हमारे हृदय में है और भारत के शिखर पर है। उन्होंने कहा कि विश्वनाथ मंदिर सहित देश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर भगवा ध्वज सनातन चेतना और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है। भगवा ज्ञान का, सूर्य के प्रकाश का और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ हमारे तीर्थस्थल हैं, वहाँ भगवा हमारी सनातन चेतना और ज्ञान की पहचान के रूप में फहराएगा।सद्गुरुदेव के वाराणसी आगमन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनका दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा विश्वनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा एवं राष्ट्रकल्याण की भावना ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर किया।श्री आनंदम धाम, शिवरीनारायण के संजय अग्रवाल ने सद्गुरुदेव के इस वाराणसी प्रवास को सनातन धर्म की चेतना को सुदृढ़ करने वाला महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रवास बताया। उन्होंने कहा कि सद्गुरुदेव का प्रत्येक संदेश समाज को सनातन मूल्यों, राष्ट्रसेवा और आध्यात्मिक जागरण से जोड़ने की प्रेरणा देता है।







