बस अब और नहीं बर्दाश्त होगी उपेक्षा- शक्ति की जनता की गुहार- सांसद, विधायक कोई तो दिलवाओ शक्ति के रेलवे स्टेशन में गोंडवाना एक्सप्रेस का स्टॉपेज, बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर बनकर चलती है गोंडवाना, उसके बावजूद शक्ति स्टेशन के यात्री गोंडवाना के मापदंडों में नहीं उतर रहे खरे, नेता मांग तो कर रहे हैं, किंतु नहीं मिल रही है सफलता

बस अब और नहीं बर्दाश्त होगी उपेक्षा- शक्ति की जनता की गुहार- सांसद, विधायक कोई तो दिलवाओ शक्ति के रेलवे स्टेशन में गोंडवाना एक्सप्रेस का स्टॉपेज, बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर बनकर चलती है गोंडवाना, उसके बावजूद शक्ति स्टेशन के यात्री गोंडवाना के मापदंडों में नहीं उतर रहे खरे, नेता मांग तो कर रहे हैं, किंतु नहीं मिल रही है सफलता kshititech
जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े
बस अब और नहीं बर्दाश्त होगी उपेक्षा- शक्ति की जनता की गुहार- सांसद, विधायक कोई तो दिलवाओ शक्ति के रेलवे स्टेशन में गोंडवाना एक्सप्रेस का स्टॉपेज, बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर बनकर चलती है गोंडवाना, उसके बावजूद शक्ति स्टेशन के यात्री गोंडवाना के मापदंडों में नहीं उतर रहे खरे, नेता मांग तो कर रहे हैं, किंतु नहीं मिल रही है सफलता kshititech
जिला मुख्यालय शक्ति का मुख्य रेलवे स्टेशन
बस अब और नहीं बर्दाश्त होगी उपेक्षा- शक्ति की जनता की गुहार- सांसद, विधायक कोई तो दिलवाओ शक्ति के रेलवे स्टेशन में गोंडवाना एक्सप्रेस का स्टॉपेज, बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर बनकर चलती है गोंडवाना, उसके बावजूद शक्ति स्टेशन के यात्री गोंडवाना के मापदंडों में नहीं उतर रहे खरे, नेता मांग तो कर रहे हैं, किंतु नहीं मिल रही है सफलता kshititech
शक्ति के विधायक एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत

शक्ति की जनता की गुहार- सांसद, विधायक कोई तो दिलवाओ शक्ति के रेलवे स्टेशन में गोंडवाना एक्सप्रेस का स्टॉपेज, बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर बनकर चलती है गोंडवाना, उसके बावजूद शक्ति स्टेशन के यात्री गोंडवाना के मापदंडों में नहीं उतर रहे खरे

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

सक्ती- शक्ति शहर राजनैतिक रूप से दशकों से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाए हुए हैं, किंतु मूलभूत सुविधाओं के नाम पर शक्ति के रेलवे स्टेशन को निजामुद्दीन से रायगढ़ एवं रायगढ़ से निजामुद्दीन गोंडवाना एक्सप्रेस का स्टॉपेज ना मिल पाना कहीं ना कहीं शहर की राजनीति के प्रभाव को कम करने का प्रत्यक्ष उदाहरण है, गोंडवाना एक्सप्रेस का संचालन लगभग 15 वर्षों पूर्व प्रारंभ हुआ था तथा क्षेत्र के यात्री एक लंबे समय से इस ट्रेन के स्टॉपेज की मांग कर रहे हैं, शक्ति क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस दोनों ही दलों के राजनैतिक नेताओं का प्रदेश की एवं राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में बराबर का वर्चस्व रहा है,वर्तमान में भी क्षेत्रीय सांसद जहां प्रदेश एवं केंद्र की सत्तारूढ़ दल भाजपा पार्टी की जनप्रतिनिधि हैं, तो वहीं स्थानीय विधायक भी पूर्व में विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं तथा 2014 से पूर्व में केंद्र की मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं, एवं वर्तमान में भी वे विधायक एवम छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे प्रतिष्ठा पूर्ण पद पर विराजमान हैं ,किंतु शहर की जनता का यह कहना है कि गोंडवाना एक्सप्रेस जो की बिलासपुर से रायगढ़ के बीच पैसेंजर बनकर चलती है,किंतु रेल यात्रियों को अब ऐसा एहसास होने लगा है कि वे गोंडवाना जैसी इस पैसेंजर ट्रेन में चढ़ने की भी पात्रता नहीं रखते है, जिसके चलते आज तक इस ट्रेन का स्टॉपेज शक्ति को नहीं मिल पाया है, एवं क्षेत्र के रेलयात्री इस बात को लेकर काफी नाराज हैं, एवं गोंडवाना की मांग को लेकर अनेकों बार जहां पत्राचार किया जा चुका है, तो वहीं जन आंदोलन भी हो चुका है,किंतु अब तो ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं क्षेत्र की राजनीति बड़े राष्ट्रीय स्तर के विषयों को लेकर कहीं न कहीं प्रभाव विहीन हो गई है, जिसके चलते यहां के नेताओं की बातों को या तो ऊपर में बैठे हुए नेता सुनना नहीं चाहते या कहीं ना कहीं तवज्जो नहीं देते, इस बात को क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी स्वीकार करना होगा, तथा अगर उनका राजनैतिक वजूद ऊपर स्तर पर प्रभावशाली है, तो उन्हें अपने प्रभाव का सदुपयोग क्षेत्र की जनता की सुविधाओं के लिए करना चाहिए, ऐसा लोगों का मानना है, बाकी अब वह तो नेताओं की मर्जी है, कि वे अपने प्रभाव का कितना उपयोग जन कल्याण की दिशा में करते हैं

शक्ति को जिले का दर्जा मिले लगभग 4 वर्ष बीत चुके हैं, एवं जिला मुख्यालय होने के बावजूद शक्ति के रेलवे स्टेशन को ना हीं अमृत स्टेशन का दर्जा मिला, और ना ही यहां सुविधाओं के नाम पर कोई विशेष सकारात्मक प्रयास हो रहे हैं, जिसके चलते जिला मुख्यालय होने के नाते आसपास के अनेकों विकासखंडों से रेल की यात्रा प्रारंभ करने के लिए सक्ती आने वाले यात्रियों को कहीं ना कहीं रेल प्रशासन की उपेक्षा का ही शिकार होना पड़ता है, तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कई बार लोगों की मांग पर पत्र जरूर लिखते हैं, किंतु ऐसा लगता है कि ये पत्र सिर्फ पत्र बनकर फाइलों में कैद हो जाते है एवं उन पत्रो पर कार्रवाई होने की बजाय वे अलमारी में शोपीस बनकर रखे हुए है

शक्ति क्षेत्र की विभिन्न सक्रिय संस्थाओं का यहां तक कहना है कि उन्होंने अनेकों बार स्थानीय बड़े जनप्रतिनिधियों से रेलवे के उच्च अधिकारियों से मिलने के लिए भी निवेदन किया था, किंतु आज तक जनप्रतिनिधियों ने रेलवे के अधिकारियों से क्षेत्रीय संस्थाओं के प्रमुखों से मुलाकात करवाना तक उचित नहीं समझा है, तथा यदि नेताओं की बातों को रेलवे के अधिकारी तवज्जो नहीं दे रहे हैं, तो कम से कम क्षेत्र के विभिन्न व्यापारिक, सामाजिक, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि ही उन तक रेल यात्रियों एवं जनता की भावनाओं को पहुंचाने का काम करेंगे, जिससे हो सकता है ट्रेनों का स्टॉपेज संभव हो जाए, किंतु यह मुलाकात कब संभव होगी यह कोई नहीं जानता

Discover more from GL News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading