ब्रेकिंग न्यूज़-भिलाई इस्पात संयंत्र में करोड़ों रुपए के स्क्रैप एवं लोहे चोरी के मामले में ठेकेदार. ट्रांसपोर्टर एवं अधिकारियों की हुई गिरफ्तारियां. चोरी के मामले में भाजपा नेता भी हुआ गिरफ्तार. ग्लोबल टेंडर पर खड़ा हुआ बड़ा विवाद




ब्रेकिंग न्यूज़-भिलाई इस्पात संयंत्र में करोड़ों रुपए के स्क्रैप एवं लोहे चोरी के मामले में ठेकेदार. ट्रांसपोर्टर एवं अधिकारियों की हुई गिरफ्तारियां. चोरी के मामले में भाजपा नेता भी हुआ गिरफ्तार. ग्लोबल टेंडर पर खड़ा हुआ बड़ा विवाद
शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -लखोटिया समूह को लाभ पहुंचाने का प्रयास किसी बड़ी मिलीभगत की साजिश के संकेत। कर्मचारियों ने भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए ग्लोबल टेंडर के जरिए बांटकर 6,000 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया गया। वर्तमान में संयंत्र से करोड़ों रुपये के लोहे की कथित चोरी के मामले की पुलिस जांच चल रही है और इस मामले में ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों तथा बीएसपी के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। उनका आरोप है कि फेरो स्क्रैप निगम को किनारे कर लखोटिया समूह को लाभ पहुंचाने का प्रयास किसी बड़ी मिलीभगत की ओर संकेत करता है। उनका दावा है कि यदि यह निर्णय लागू हुआ तो लगभग 6,000 अधिकारी, कर्मचारी और ठेका श्रमिकों की आजीविका प्रभावित होगी। कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (एफएसएनएल) के कर्मचारियों ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एक ओर कंपनी के निजीकरण के बाद कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी ओर करीब 45 वर्षों से नॉमिनेशन आधार पर मिलने वाले स्क्रैप प्रोसेसिंग एवं हैंडलिंग के कार्य को ग्लोबल टेंडर के जरिए बांटकर लगभग 6,000 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया गया है।कर्मचारियों का कहना है कि सेल-बीएसपी में यह कार्य किसी भी स्थिति में फेरो स्क्रैप निगम को ही दिया जाना चाहिए। उनका दावा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो कर्मचारी दोबारा आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों के अनुसार, मार्च माह में भिलाई इस्पात संयंत्र ने स्क्रैप प्रोसेसिंग एवं हैंडलिंग कार्य के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था। पहले यह कार्य फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड द्वारा नॉमिनेशन आधार पर किया जाता था। आरोप है कि इस कार्य को सुनियोजित तरीके से चार हिस्सों में बांटकर निविदाएं आमंत्रित की गईं। इनमें से एक कार्य फेरो स्क्रैप निगम को, एक श्री इंटरनेशनल व्यापार प्राइवेट लिमिटेड (लखोटिया समूह) को तथा एक कार्य जीएसडब्ल्यू समूह को मिला। नियमानुसार इन कंपनियों पर कार्रवाई होनी चाहिए कर्मचारियों का दावा है कि दोनों निजी कंपनियां निर्धारित छह माह की अवधि बीत जाने के बाद भी सैकड़ों करोड़ रुपये की सुरक्षा निधि जमा नहीं कर सकीं और न ही कार्य शुरू कर पाईं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में नियमानुसार इन कंपनियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। एफएसएनएल (कोनोइके ग्रुप) की ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि बीएसपी प्रबंधन लखोटिया समूह को 1 अक्टूबर से काम देने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसी समूह के संचालक को पूर्व सांसद ताराचंद साहू ने कथित रूप से रिश्वत देते समय रंगे हाथ पकड़वाया था। उनका आरोप है कि ऐसे विवादित समूह को काम दिए जाने से संयंत्र में चोरी, दबंगई और स्क्रैप माफिया की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने मांग की कि इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाई जाए और स्क्रैप प्रोसेसिंग एवं हैंडलिंग का पूरा कार्य फेरो स्क्रैप निगम को ही सौंपा जाए। यह भी कहा कि यदि लखोटिया समूह को करोड़ों रुपये की राहत दी जाती है, तो अन्य चयनित कंपनी जीएसडब्ल्यू भी समान छूट की मांग कर सकती है। उनके अनुसार इससे भविष्य में निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि ऐसे ठेकेदारों को संयंत्र में काम मिलता है तो स्क्रैप चोरी, भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। उनका कहना है कि भिलाई इस्पात संयंत्र देश के लिए महत्वपूर्ण रेल पटरियां तथा रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाली विशेष इस्पात प्लेटें तैयार करता है, इसलिए यहां कार्य आवंटन में पारदर्शिता और गुणवत्ता के सर्वोच्च मानकों का पालन किया जाना चाहिए। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा
बीएसपी में संगठित लोहा चोरी, भाजपा नेता की गिरफ्तारी से विधायक रिकेश सेन के आरोप सच साबित हुए: डॉ. महंत
छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने देश के सबसे बड़े औद्योगिक तीर्थ भिलाई इस्पात संयंत्र में संगठित तरीके से हो रही लोहा चोरी मामले में भाजपा नेता भास्कर मुदलियार की गिरफ्तारी पर कड़ा हमला बोला है। डॉ. महंत ने कहा कि वैशाली नगर के भाजपा विधायक रिकेश सेन ने बीएसपी से हर महीने लगभग 100 करोड़ रुपये की संगठित चोरी का आरोप लगाया था, जिसमें उन्होंने पुलिस और बीएसपी प्रबंधन की सांठ-गांठ की बात कही थी। भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद अब विधायक के आरोप पूरी तरह सही साबित हो रहे हैं। लोहा चोरी के इस बड़े मामले में यह 17वीं गिरफ्तारी है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने कहा कि, भिलाई स्टील प्लांट के बड़े-बड़े अधिकारियों की भी इसमें गिरफ्तारियां हुई हैं। भाजपा नेता की गाडिय़ां बीएसपी के भीतर से लोहा चोरी करती थीं। पुलिस ने पुख्ता सुबूत मिलने और पूछताछ के बाद ही यह गिरफ्तारी की है। इसके तुरंत बाद भाजपा द्वारा उस नेता को 6 साल के लिए पार्टी से निकालना यह दर्शाता है कि मामले में उनकी संलिप्तता पूरी तरह साबित हो चुकी है। संरक्षण देने वाले बड़े चेहरों की हो जांच डॉ. महंत ने आशंका जताई कि भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम ‘सेल’ के इस संयंत्र से लंबे समय से संगठित चोरी का यह खेल सुरक्षाबलों, बीएसपी अधिकारियों, स्थानीय पुलिस और भाजपा पदाधिकारियों-कारोबारियों के गठजोड़ से चल रहाथा, अदना मंडल-पदाधिकारी अपने दम पर केंद्र सरकार के इतने बड़े संस्थान में इतनी बड़ी चोरी नहीं कर सकता। इसके पीछे केंद्र और राज्य के किन-किन बड़े नेताओं का संरक्षण हासिल है, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। एजेंसियां चाहें तो इस चोरी का भांडाफोड़ करने वाले भाजपा विधायक से भी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकती हैं। केन्द्र सरकार और राज्य नेतृत्व पर निशाना डॉ. महंत ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि, सार्वजनिक उपक्रमों को खोखला करने की साजिश केंद्र में 12 वर्षों से काबिज मोदी सरकार बीएसपी को अब तक बेच नहीं पाई है, इसलिए इसे अंदर से खोखला करके बेचने की भूमिका तैयार की जा रही है। डॉ महंत ने कहा कि, जांच एजेंसियों का राजनीतिक दुरुपयोग, सीबीआई, ईडी और आईटी जैसी राष्ट्रीय जांच एजेंसियां स्वतंत्र न रहकर सरकार के इशारों पर काम कर रही हैं, ऐसे में इस मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने से भी सही नतीजे की उम्मीद नहीं की जा सकती। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, मुख्यमंत्री की चुप्पी इस विषय पर सवाल उठना लाजमी है चार दिन पहले जब मीडिया ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से इस चोरी के संबंध में सवाल पूछा था, तो वे बिना जवाब दिए मुंह मोडक़र चले गए थे। अब सुबूत इतने पुख्ता हो चुके थे कि कार्रवाई करना पुलिस की मजबूरी बन गया।







