छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान को वापस लेना चाहिए इस्तीफा.एक व्यक्ति की गलती के लिए मंत्री जिम्मेदार नहीं. 25 जुलाई को दुर्ग में पत्रकारों से चर्चा में कही मंत्री यादव ने

छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान को वापस लेना चाहिए इस्तीफा.एक व्यक्ति की गलती के लिए मंत्री जिम्मेदार नहीं. 25 जुलाई को दुर्ग में पत्रकारों से चर्चा में कही मंत्री यादव ने kshititech
25 जुलाई को दुर्ग में पत्रकारों से चर्चा करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव

छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान को वापस लेना चाहिए इस्तीफा.एक व्यक्ति की गलती के लिए मंत्री जिम्मेदार नहीं. 25 जुलाई को दुर्ग में पत्रकारों से चर्चा में कई मंत्री यादव ने

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के कामकाज का बचाव करते हुए दुर्ग में पत्रकारों से एक मुलाकात के दौरान कहा- की पेपर लीक जैसी घटना कोई मंत्री नहीं चाहता, जांच में वास्तविक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबरों के बीच छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने उनका समर्थन करते हुए कहा है कि प्रधान को अपना इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए. यादव ने तर्क दिया कि किसी बड़े विभाग में कार्यरत एक व्यक्ति या कुछ कर्मचारियों की गलती के लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है.दुर्ग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गजेंद्र यादव ने कहा कि किसी भी सरकारी विभाग में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं. ऐसे में किसी स्तर पर हुई चूक, अनियमितता या आपराधिक गतिविधि की जिम्मेदारी निर्धारित करने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है. उन्होंने कहा कि कोई भी शिक्षा मंत्री यह नहीं चाहेगा कि उसके विभाग के अंतर्गत आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो या विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हो.

इस्तीफे के बजाय जवाबदेही तय करने पर जोर

गजेंद्र यादव का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया की अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय पर राजनीतिक दबाव बढ़ा है. 25 जुलाई को कई राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने की खबर प्रकाशित की. हालांकि खबर लिखे जाने तक केंद्र सरकार, राष्ट्रपति भवन या शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर इस्तीफे की स्वीकृति से संबंधित स्पष्ट आधिकारिक आदेश उपलब्ध नहीं था. इसलिए प्रधान के पद की संवैधानिक स्थिति को औपचारिक सरकारी अधिसूचना के आधार पर ही अंतिम माना जाना चाहिए.यादव ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं में वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. उनके मुताबिक प्रशासनिक और आपराधिक जिम्मेदारी तय किए बिना केवल राजनीतिक दबाव में मंत्री से इस्तीफा मांगना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. परीक्षा व्यवस्था में शामिल एजेंसियों, अधिकारियों, तकनीकी सेवा प्रदाताओं, परीक्षा केंद्रों और गोपनीय सामग्री की सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक स्तर की जांच आवश्यक है.

धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा क्षेत्र के कामकाज की सराहना

छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, कौशल विकास, मातृभाषा में शिक्षा, तकनीक के प्रयोग और उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार से जुड़े प्रयासों को उन्होंने प्रधान के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया.राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2020 में मंजूरी दी थी. इस नीति में स्कूली शिक्षा के पुराने 10+2 ढांचे के स्थान पर 5+3+3+4 की शैक्षणिक संरचना, प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा या स्थानीय भाषा को प्राथमिकता, बहुविषयक उच्च शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का दायित्व संभालने के बाद नीति के क्रियान्वयन से जुड़ी कई पहलों का नेतृत्व किया था.

छात्र आंदोलन के दबाव के बाद बड़ा फैसला
गजेंद्र यादव ने कहा कि औपनिवेशिक दौर से प्रभावित शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप नई प्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया में धर्मेंद्र प्रधान का योगदान महत्वपूर्ण रहा है. उन्होंने इसे केवल पाठ्यक्रम बदलने का प्रयास नहीं, बल्कि शिक्षा को आधुनिक, कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने की दीर्घकालिक प्रक्रिया बताया.


गजेंद्र यादव ने कहा कि औपनिवेशिक दौर से प्रभावित शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप नई प्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया में धर्मेंद्र प्रधान का योगदान महत्वपूर्ण रहा है. उन्होंने इसे केवल पाठ्यक्रम बदलने का प्रयास नहीं, बल्कि शिक्षा को आधुनिक, कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने की दीर्घकालिक प्रक्रिया बताया.

पेपर लीक विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर पिछले कुछ समय से विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों में नाराजगी देखी गई है. विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं. संसद में भी इस मुद्दे को लेकर गतिरोध और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की खबरें सामने आईं.पेपर लीक की घटनाएं केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रहतीं. इनका सीधा असर महीनों या वर्षों से तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ता है. परीक्षा दोबारा आयोजित होने पर विद्यार्थियों को आर्थिक खर्च, मानसिक दबाव, यात्रा और तैयारी की समयसीमा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके साथ ही सरकारी भर्ती और उच्च शिक्षा संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया में देरी होती है.इसी कारण इस विवाद में दो अलग-अलग सवाल सामने हैं. पहला सवाल राजनीतिक और नैतिक जवाबदेही का है, जबकि दूसरा परीक्षा तंत्र की संस्थागत सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार का. गजेंद्र यादव ने अपने बयान में पहले सवाल पर धर्मेंद्र प्रधान का बचाव किया, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और सुधार की आवश्यकता से इनकार नहीं किया.इस्तीफा स्वीकार करने का फैसला केंद्र के स्तर परकिसी केंद्रीय मंत्री द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद उसे स्वीकार करने और मंत्रिपरिषद में बदलाव की संवैधानिक प्रक्रिया प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति के स्तर से पूरी होती है. इसलिए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को वापस लेने की गजेंद्र यादव की अपील राजनीतिक समर्थन का बयान है. अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही होगा.दूसरी ओर, प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले दलों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली में गंभीर अनियमितता होने पर राजनीतिक नेतृत्व को भी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए. समर्थकों का तर्क है कि मंत्री को तभी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाना चाहिए, जब जांच में उनके निर्देश, जानकारी, लापरवाही या निर्णय से संबंधित ठोस तथ्य सामने आएं. इस प्रकार विवाद अब व्यक्ति विशेष के इस्तीफे के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार की बहस में बदल गया है.

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