अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही- सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फैल. 20 से 27 वर्ष की उम्र की है महिलाएं. 5 महिलाओं की हो गई मौत. एम्स करेगा पूरे मामले की जांच

अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही- सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फैल. 20 से 27 वर्ष की उम्र की है महिलाएं. 5 महिलाओं की हो गई मौत. एम्स करेगा पूरे मामले की जांच kshititech

अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही- सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फैल. 20 से 27 वर्ष की उम्र की है महिलाएं. 5 महिलाओं की हो गई मौत

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -कोटा के मेडिकल कॉलेज के बाद बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी डॉक्टरों की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक महीने पहले कोटा में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से 5 महिलाओं (माताओं) की मौत हो गई थी। कई अन्य महिलाओं को गंभीर हालत में दूसरे प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा था।इसी तरह बीकानेर में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक के बाद एक 6 महिलाओं की हालत बिगड़ गई। उनकी किडनी फेल हो गईं। इन मरीजों का डायलिसिस चल रहा है। सभी को आसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है। फलोदी की रहने वाली 20 साल की प्रीति वेंटिलेटर पर हैं। सभी महिलाओं की उम्र 20 से 27 साल के बीच है।शुरुआत में अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर इस पूरे मामले को दबाने और छिपाने की कोशिश करते दिखे, लेकिन प्रभावित महिलाओं की बिगड़ती हालत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।यह घटना 10 से 15 दिन पहले हुई थी। पीबीएम हॉस्पिटल के मैटरनिटी विंग में जिन महिलाओं की सी-सेक्शन सर्जरी हुई थी उनकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें पेशाब रुकने, किडनी फेल होने और प्लेटलेट काउंट कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

एचओडी डॉ. संतोष खजोटिया का कहना है कि किडनी फेल होने का कारण सिर्फ इन्फेक्शन नहीं है। ज्यादा ब्लीडिंग भी इसकी वजह हो सकती है। मामले की जांच की जा रही है। कोटा मेडिकल कॉलेज में हुई लापरवाही की जांच एम्स दिल्ली को सौंपी गई थी। रिपोर्ट से पता चला कि कोटा में गर्भवती महिलाओं को ब्लीडिंग रोकने के लिए दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में जरूरी तत्व नहीं थे। इसके बाद राजस्थान ड्रग डिपार्टमेंट की शिकायत के आधार पर अमृतसर की कंपनी का लाइसेंस रद कर दिया गया।एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा, एक्यूट किडनी इंजरी के कई कारण हो सकते हैं। आईसीयू में भर्ती सभी मरीजों की हालत स्थिर है। ओटी में इन्फेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए हम एक इन्फेक्शन डिटेक्टर लगाने जा रहे हैं। यह सिर्फ 90 सेकंड मेंइन्फेक्शन का पता लगा सकता है।प्रोफेसर (नेफ्रोलॉजी) जितेंद्र फालौदिया ने कहा, HELLP सिंड्रोम की वजह से पांच में से एक महिला वेंटिलेटर पर है। अस्पताल में संक्रमण की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। अभी जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही सही कारणों का पता चल पाएगा

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