मुख्यमंत्री जी ने शहरों में जुगनू।गौरैया और मैंना जैसे पक्षियों के गायब होने पर जताई चिंता. प्रदेशवासियों को लिखा खत. जैव विविधता संरक्षण पर जोर देने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री जी ने शहरों में जुगनू।गौरैया और मैंना जैसे पक्षियों के गायब होने पर जताई चिंता. प्रदेशवासियों को लिखा खत. जैव विविधता संरक्षण पर जोर देने दिए निर्देश kshititech

मुख्यमंत्री जी ने शहरों में जुगनू।गौरैया और मैंना जैसे पक्षियों के गायब होने पर जताई चिंता. प्रदेशवासियों को लिखा खत. जैव विविधता संरक्षण पर जोर देने दिए निर्देश

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शहरों से जुगनू, गौरैया और मैना जैसे पक्षियों का गायब होना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रकृति और जैव विविधता संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि हर जीव-जंतु पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और प्रकृति के प्रति जागरूकता ही हमारे भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है

मुख्यमंत्री योगी की पाती

मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों

वर्षा ऋतु में अलग-अलग कीट-पतंगों की आवाज, गर्मियों की रातों में जुगनुओं की चमक, भोर में गौरैयों की चहचहाहट और पेड़ों पर मैनाओं का कलख, जो पहले दैनिक जीवन का हिस्सा थे, आज शहरों में लगभग दुर्लभ हो चुके हैं। इनकी लुप्तप्रायः स्थिति चिंताजनक है और जीवन के लिए खतरे का सूचक।आधुनिकता आवश्यक है, परंतु प्रकृति से विमुख होकर नहीं। जीव-जंतु प्रकृति के सौष्ठव का प्रतीक मात्र नहीं, अपितु स्वस्थ पर्यावरण का श्रृंगार हैं। प्रकृति का संतुलन भी छोटे-छोटे जीव-जंतुओं से बना रहता है। फसल उत्पादन से लेकर खाद्य श्रृंखला तक, प्रकृति के वृहत्तर चक्र में प्रत्येक जीव की महत्वपूर्ण भूमिका है।सनातन संस्कृति में प्रकृति के प्रत्येक जीव को सृष्टि का अभिन्न अंग माना गया है। त्रिलोक में अजेय माने जाने वाले दशानन का संहार करने वाली प्रभु श्रीराम की सेना में वानर से लेकर ऋक्ष, जटायु और नन्ही गिलहरी तक का योगदान था। यह मानव, प्रकृति तथा विभिन्न जीव-जंतुओं के परस्पर आश्रित रहने का परिचायक है।9 वर्ष पूर्व जब हमने कार्यभार संभाला था, तब पर्यावरण संरक्षण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया था। वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के सतत प्रयासों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में बाघों, तेंदुओं और राज्य पक्षी सारस की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित आर्द्रभूमियों की रामसर सूची में प्रदेश के 13 स्थलों ने जगह बनाई है। एक समय जिन जीवों और पक्षियों को उत्तर प्रदेश से विलुप्त माना जा रहा था, वे अब फिर से दिखाई देने लगे हैं। तराई के घास के मैदानों में अत्यंत दुर्लभ जर्डन्स बैबलर पक्षी वर्षों बाद दिखाई दिया। दुधवा टाइगर रिजर्व में पेंटेड कीलबैंक नामक दुर्लभसर्प की मौजूदगी 117 वर्ष बाद दर्ज की गई।जैव विविधता के संरक्षण का प्रयास तभी सफल होगा, जब जन भागीदारी बढ़ेगी। मैं सभी से, विशेषकर युवाओं से आग्रह करता हूं कि जब भी प्रकृति के बीच जाने का अवसर मिले, तो केवल पर्यटक बनकर नहीं, बल्कि जिज्ञासु विद्यार्थी की भांति उस स्थल को परखें। प्रकृति का जीवंत संसार आपको इसके अनछुए रूपों से भी परिचित करा सकता है। अपने अनुभवों को व्लॉग और आलेखों के माध्यम से साझा करें।ग्रीष्मावकाश के दौरान बच्चे इन्हें अपने स्कूली प्रोजेक्ट का विषय बनाएं। प्रकृति के प्रति जागरूकता और अपनापन ही हमारी जैव विविधता के सबसे बड़े संरक्षक है

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