शासकीय वेदराम महाविद्यालय मालखरौदा में पदस्थ सहायक अध्यापक वासुदेव एक्का को संस्कृत में मिली पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि. पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से मिली यह उपाधि. विभिन्न संगठनों ने दी एक्का जी को बधाई

शासकीय वेदराम महाविद्यालय मालखरौदा में पदस्थ सहायक अध्यापक वासुदेव एक्का को संस्कृत में मिली पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि. पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से मिली यह उपाधि. विभिन्न संगठनों ने दी एक्का जी को बधाई kshititech
सहायक प्राध्यापक प्रोफेसर वासुदेव एक्का
शासकीय वेदराम महाविद्यालय मालखरौदा में पदस्थ सहायक अध्यापक वासुदेव एक्का को संस्कृत में मिली पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि. पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से मिली यह उपाधि. विभिन्न संगठनों ने दी एक्का जी को बधाई kshititech

शासकीय वेदराम महाविद्यालय में पदस्थ सहायक अध्यापक वासुदेव एक्का को संस्कृत में मिली पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि

शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर

शक्ति -ग्राम – मोरगा (कोरबा) निवासी वासुदेव एक्का जो वर्तमान में शासकीय वेदराम महाविद्यालय मालखरौदा, जिला- सक्ती (छत्तीसगढ़ ) में सहायक प्राध्यापक (संस्कृत) के पद पर पदस्थ हैं के वासुदेव एक्का ने संस्कृत विषय में पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि प्राप्त कर अपने परिवार, गांव और महाविद्यालय का नाम रोशन किया है । जिसका शोध शीर्षक महाकविहर्षवर्धनस्य रूपकेषु लोकतत्त्वानामनुशीलनम् रहा।यह उपलब्धि वर्षों की कठोर परिश्रम, सतत अध्ययन , अनुशासन और अडिग संकल्प का प्रतिफल है । संस्कृत जैसे प्राचीन , गूढ़ और बौद्धिक भाषा में शोध कर पीएचडी की उपाधि अर्जित करना अपने आप में असाधारण उपलब्धि मानी जाती है । सीमित संसाधनों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा और परिश्रम के आगे परिस्थितियां बाधा नहीं बन सकती । अपने शोध कार्य के माध्यम से वासुदेव एक्का ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक और लौकिक संस्कृत की समृद्ध विरासत को आधुनिक जीवन में सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है । उनका शोध न केवल शोधार्थियों और शिक्षाविदों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृत भाषा , भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य के लोकतत्वों को वर्तमान जीवन से जोड़ने का कार्य करेगा

इस उपलब्धि के बाद गृहग्राम – मोरगा और पदस्थ स्थान मालखरौदा सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का वातावरण है । ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों एवं शुभचिन्तकों ने वासुदेव एक्का को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है । इस शोध कार्य की सफलता में शासकीय दू.श्री वै. स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय रायपुर के डॉ. बहुरन सिंह पटेल, विभागाध्यक्ष – व्याकरण ने शोध निर्देशक के रूप में मार्गदर्शन प्रदान किये । सफलता का श्रेय उनके माता-पिता, पत्नी,भाई-बहन, पुत्र-पुत्री , प्राध्यापकगण और गुरुजनों के सकारात्मक सहयोग से ही मिला

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