कृष्ण- सुदामा की मित्रता का हवाला देकर चेक बाउंस मामले का हुआ निराकरण. 14 मार्च को हुई नेशनल लोग अदालत में हजारों मामलों का हुआ त्वरित निराकरण.करोड़ों रुपए के अवार्ड पारित पति-पत्नी मतभेद भूलाकर एक साथ रहने को हुए राजी





कृष्ण- सुदामा की मित्रता का हवाला देकर चेक बाउंस मामले का हुआ निराकरण. 14 मार्च को हुई नेशनल लोग अदालत में हजारों मामलों का हुआ त्वरित निराकरण.करोड़ों रुपए के अवार्ड पारित पति-पत्नी मतभेद भूलाकर एक साथ रहने को हुए राजी
, शक्ति छत्तीसगढ़ से कन्हैया गोयल की खबर
शक्ति -साल 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत का आयोजन 14 मार्च 2026 को हुआ. इस लोक अदालत ने जहां पीड़ितों को भारी राहत दी तो वहीं नेशनल लोक अदालत के माध्यम से कुल 29810 प्रकरणों का निराकरण व 38157388 रुपये का अवार्ड परित हुआ।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेशानुसार एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन में वर्ष 2026 का प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन दिनांक 14.03.2026 को जिला न्यायालय, समस्त तालुका न्यायालय एवं राजस्व न्यायालयों में आयोजित हुआ। जिला एवं सत्र न्यायालय जांजगीर में नेशनल लोक अदालत का उद्घाटन दीप जलाकर माननीय शक्ति सिंह राजपूत प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर चांपा, समस्त सम्मानीय न्यायाधीश गण, अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ एवं समस्त अधिवक्तागण, जिला प्रशासन के समस्त विभागों के अधिकारीगण, जिला न्यायालय के समस्त अधिकारीगण कर्मचारीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर के अधिकारीगण कर्मचारीगण एवं पैरा लीगल वालेंटियर, शासकीय टीसीएल महाविद्यालय जांजगीर विधि छात्र-छात्राएं व सामान्य मीडियागण की उपस्थिति में हुआ, जहां प्रधान जिला न्यायाधीश महोदय द्वारा सभी को संबोधित करते हुए नेशनल लोक अदालत के महत्व बताते हुए अधिक से अधिक प्रकरण को सफल बनाने हेतु आवश्यक सहयोग करने को कहा गया। मनोज कुमार कुशवाहा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर द्वारा वर्ष 2026 के प्रथम नेशनल लोक अदालत के संबंध में जानकारी देते हुए नेशनल लोक अदालत के महत्व एवं उद्देश्य साझा किया गया। वर्ष का प्रथम नेशनल लोक अदालत के तहत् जिला न्यायालय जांजगीर, समस्त तालुका न्यायालयों एवं राजस्व न्यायालय में कुल 40 खंडपीठों में रखे गए 44811 प्रकरणों में आज नेशनल लोक अदालत के माध्यम से कुल 29810 प्रकरणों का निराकरण व 38157388 /- तीन करोड़ इक्यासी लाख सतावान हजार अठासी रुपये का अवार्ड पारित हुआ।
नेशनल लोक अदालत दिनांक 14.03.2026 की सफल कहानी-कृष्ण सुदामा की पवित्र मित्रता का उदाहरण देकर निपटा चेक बाउंस का मामला
मामला परक्राम्य लिखित अधिनियम अर्थात चेक बाउंस से संबंधित था। प्रकरण क्रमांक 12/2026 में अभियुक्त एवं परिवादी दोनों अच्छे मित्र थे परंतु पैसों से लेनदेन के संबंध में उनके मध्य कड़वाहट पैदा हो गई और परिवादी को अभियुक्त द्वारा उधार लिये गये रकम की एवाज में चेक दिया था जो अनादरित हो गया था। जिनका मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण मिश्रा के न्यायालय में चल रहा था। दोनों मित्रों को कृष्ण एवं सुदामा की पवित्र मित्रता का उदाहरण देकर संबंधित पीठासीन अधिकारी द्वारा राजीनामा कराया गया जिसमें परिवादी ने अपने अभियुक्त मित्र से आधी धन राशि में राजीनामा कर लिया और दोनों गले लगकर अपने-अपने घर को राजी खुशी नेशनल लोग अदालत का धन्यवाद करते हुए गये ।
पिता के छलके आंसू 07 वर्ष पुराने चेक बाउंस के प्रकरण का निराकरण हुआ आधी धनराशि में
मामला परक्राम्य लिखित अधिनियम अर्थात चेक बाउंस से संबंधित था। परिवार प्रकरण क्रमांक 72/2019 में अभियुक्त एवं परिवादी दोनों की अच्छी जान पहचान थी। अभियुक्त ने परिवादी से अपनी लड़की की शादी के लिए 2.00.000/- रुपए की मांग की, परंतु पैसों से लेनदेन के संबंध में उनके मध्य कड़वाहट पैदा हो गई और परिवादी ने अभियुक्त द्वारा उधार लिया गया है रकम की एवज में चेक दिया था जो अनादरित हो गया था। जिनका मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण मिश्रा के न्यायालय में चल रहा था। एक पिता ने अपनी लड़की की शादी के लिए लिया गया कर्ज की बेटी ही इस राष्ट्र का भविष्य है , वर्तमान है और पिता द्वारा अपने नैतिक कर्तव्यों को निभाने हेतु आपके उधार लिया था। आप इस कड़वाहट को भूल जाएं क्योंकि आपकी भी बेटी है संबंध में परिवादी को पीठासीन अधिकारी के द्वारा उक्त बातों को समझाए जाने पर परिवादी ने अभियुक्त से आधी धनराशि में राजीनामा कर लिया और दोनों गले लगकर अपने-अपने घर को राजी – खुशी नेशनल लोक अदालत का धन्यवाद करते हुए गये।
अन्याय पूर्ण धनि होने के सिद्धांत को कानून स्वीकार नहीं करता है
मामला सिविल प्रकृति का था जिसका व्यवहार वाद क्रमांक 63अ/2024 था। उक्त प्रकरण में वादी से प्रतिवादी ने संपत्ति देने का इकरार कर 5.00.000/- रुपए प्राप्त कर लिए थे परंतु कालांतर में संपत्ति की रजिस्ट्री करने से प्रतिवादी ने इंकार कर दिया था । जिस पर वादी दुखी होकर न्यायालय के समक्ष व्यवहार वाद पेश किया। उक्त प्रकरण नेशनल लोक अदालत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवीण मिश्रा के न्यायालय के खंडपीठ में था जहां पर पीठासीन अधिकारी द्वारा प्रतिवादी को समझाया गया कि कानून में किसी भी व्यक्ति को अन्यायपूर्ण धनी होने का अधिकार निहित नहीं है। उक्त समझाईस को प्रतिवादी ने समझा और वादी से उनके द्वारा दिए गए 5.00.000/- रुपए लौटाकर प्रकरण में राजीनामा कर आपस का मनमुटाव समाप्त किया और उक्त प्रकरण में वादी को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण के निराकरण किये जाने पर उनके द्वारा संदाय की गई कोर्ट फीस भी वापस प्राप्त हो गई।
पति – पत्नी आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ जाने को हुए राजी
आवेदिका गण द्वारा अनावेदक के विरुद्ध धारा – 144 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत भरण पोषण राशि दिलाए जाने हेतु प्रकरण पेश किया गया था। आवेदिका क्रमांक 01 एवं अनावेदक जून 2025 से पृथक पृथक रह रहे थे। वर्तमान प्रकरण दिनांक 18.07.2025 से लंबित था। आज नेशनल लोक अदालत में समझौता राजीनामा उपरांत आवेदिका क्रमांक 01 पुत्र सहित अपने पति अनावेदक के साथ रहना व्यक्त की है, उक्त आधार पर आवेदिकागण द्वारा भरण पोषण राशि दिलाए जाने हेतु प्रस्तुत प्रकरण आज नेशनल लोक अदालत में राजीनामा के आधार पर निराकृत किया गया।






